भारत को पीछे छोड़ने के लिए छाती पीट रहे हैं शहबाज शरीफ, लेकिन सच्चाई कर रही कुछ और ही बयां
शहबाज शरीफ
Pakistan PM Shehbaz Sharif : पाकिस्तान के गठन के बाद से ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और अन्य शासन प्रमुख भारत के साथ मुकाबले के लिए परेशान रहते हैं और कई बार भारत विरोधी बयान भी देते हैं, ताकि जनता की बीच उनकी पैठ बने. कई बार वे ऐसे मुद्दों पर भारत के साथ टक्कर लेने की बात करते हैं, जहां वे भारत के आसपास भी नजर नहीं आते हैं. पाकिस्तान पीएम शहबाज शरीफ का हालिया बयान उसी तरह का है
Pakistan PM Shehbaz Sharif : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे अपनी छाती पीटकर यह कहते नजर आ रहे हैं कि अगर पाकिस्तान ने अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भारत को पीछे ना कर दिया तो मेरा नाम शहबाज शरीफ. शहबाज इतने अति उत्साह में हैं कि वे उछल पड़ते हैं और माइक तक को गिरा देते हैं.
शहबाज चूंकि भारत को पीछे करने की बात करते हैं, तो उनके भाषण पर भीड़ खूब ताली पीटती है. शहबाज शरीफ पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भाषण दे रहे थे. शहबाज शरीफ के नाम का अर्थ सफेद बाज. बाज हमेशा अपने लक्ष्य को भेदने के लिए जाना जाता है, लेकिन शहबाज शरीफ जिस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं, ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि वे सही तरीके से अपने लक्ष्य को समझते हैं.
भारत की अर्थव्यवस्था के सामने सिफर है पाकिस्तान
| वर्ष | भारत (%) | बांग्लादेश (%) | पाकिस्तान (%) |
|---|---|---|---|
| 2023 | 6.1 | 5.5 | 3.5 |
| 2024 | 6.3 | 5.8 | 3.7 |
| 2025 | 6.5 | 6.0 | 3.9 |
भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है. आईएमएफ(International Monetary Fund) के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की तुलना में काफी बड़ी है. भारत का विकास दर जहां 6.5% है, वहीं पाकिस्तान का विकास दर महज 3.2% है. अर्थव्यवस्था के मामले में आईएमएफ भारत को पाकिस्तान से काफी आगे मानता है. भारत की अपेक्षा पाकिस्तान पर ऋण का बोझ भी बहुत ज्यादा है.
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भारत की अर्थव्यवस्था 3.73 ट्रिलियन डॉलर की है
भारत की अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन डालर के करीब है, अर्थव्यवस्था के लिहाज से पूरी दुनिया में उससे ऊपर सिर्फ अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी हैं. अगर भारत 5 ट्रिलियन डालर की इकोनाॅमी हो जाएगी, तो उससे ऊपर सिर्फ चीन और अमेरिका ही रहेंगे. इस लिस्ट में पाकिस्तान का कहीं जिक्र भी नहीं होता है. पाकिस्तान का जीडीपी 341 अरब डालर का है और वह विश्व की रैंगिंग में 158वें नंबर पर है.
विश्व की दस बड़ी अर्थव्यवस्थाएं
| स्थान | देश | GDP (मिलियन अमेरिकी डॉलर में) |
|---|---|---|
| 1 | संयुक्त राज्य अमेरिका | 26,950,000 |
| 2 | चीन | 17,790,000 |
| 3 | जापान | 4,230,000 |
| 4 | जर्मनी | 4,430,000 |
| 5 | भारत | 3,730,000 |
| 6 | यूनाइटेड किंगडम | 3,330,000 |
| 7 | फ्रांस | 3,050,000 |
| 8 | इटली | 2,190,000 |
| 9 | ब्राज़ील | 2,130,000 |
| 10 | कनाडा | 2,120,000 |
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति खस्ता, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कठोर शर्तों पर दिया है ऋण
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब है. देश कंगाली के हालात में है. कर्ज इतना बढ़ चुका है कि ब्याज चुकाने में भी पाकिस्तान को परेशानी हो रही है. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गवर्नर जमील अहमद का बयान कुछ दिन पहले आया था जिसमें उन्होंने यह बताया था कि पाकिस्तान पर 26.2 बिलियन डालर का कर्ज है. इस कर्ज को चुकाने के लिए पाकिस्तान ने मित्र देशों से समय सीमा बढ़ाने की गुजारिश की है, वहीं अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से कठोर शर्तों पर ऋण लिया है, क्योंकि चीन के अतिरिक्त अन्य कोई देश पाकिस्तान को ऋण देकर अपना पैसा गंवाना नहीं चाह रहा है.
राजनीतिक अस्थिरता भी अर्थव्यवस्था को करती है कमजोर
पाकिस्तान के गठन के बाद से ही वहां राजनीतिक स्थिरता का अभाव रहा है. सेना कई बार सत्ता पलट कर वहां कमान अपने हाथों में ले लेती है. शहबाज शरीफ को भी सत्ता राजनीतिक अस्थिरता के बाद ही मिली थी, जब इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया गया था.
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लेखक के बारे में
By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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