देश का सिरमौर बनाने की कल्पना रह गयी अधूरी

Updated at : 21 Aug 2021 12:19 PM (IST)
विज्ञापन
देश का सिरमौर बनाने की कल्पना रह गयी अधूरी

15 नवंबर, 2000 को राज्य का जन्म हुआ था,तब आर्थिक पंडितों ने घोषणा की थी कि इस राज्य का भविष्य उज्ज्वल है और इसकी तुलना एक विलक्षण शिशु से की जा रही थी, जो जल्द ही इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने में सक्षम होगा.लेकिन झारखंड विकास की दौड़ में पिछड़ गया है.

विज्ञापन

||अमृतांशु प्रसाद||

झारखंड बने लगभग 21 वर्ष हो चुके हैं. यह परखने का विषय है कि वयस्क हो चुके झारखंड राज्य की परवरिश कैसी रही है? बीस वर्षों के बाद झारखंड राज्य विकास के पैमाने पर कहां खड़ा है?

जब 15 नवंबर, 2000 को राज्य का जन्म हुआ था,तब आर्थिक पंडितों ने घोषणा की थी कि इस राज्य का भविष्य उज्ज्वल है और इसकी तुलना एक विलक्षण शिशु से की जा रही थी, जो जल्द ही इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने में सक्षम होगा.लेकिन झारखंड विकास की दौड़ में पिछड़ गया है. झारखंड को देश का सिरमौर बनाने की कल्पना अधूरी रह गयी है.

प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के बावजूद, राज्य का प्रदर्शन कई मोर्चों पर विफल रहा है. बहरहाल, इस राज्य की क्षमता को नकारा नहीं जा सकता है.इस समय जब राज्य का संचालन युवा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कर रहे हैं, तो यह माना जा रहा है और आशा है कि राज्य करवट लेगा और विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा.

यदि हम औद्योगिक विकास की दृष्टि से राज्य के विकास के रिपोर्ट कार्ड को देखें, तो हमें दूरदृष्टि और उद्देश्य की भावना नहीं दिखती है. यह एक ऐसा सवाल है जो इस खूबसूरत और खनिज संपदा से भरपूर राज्य के सभी सामाजिक-आर्थिक विचारकों और शुभचिंतकों को परेशान करता है. जिस गति से उद्योग यहां शुरू में लगे, वो गति बीच में कहीं आकर लुप्त हो गयी.

राज्य की भौगोलिक संचरना और संसाधनों की उपलब्धता दुनिया भर के छोटे-बड़े उद्योगों का ध्यान अपनी तरफ आसानी से खींच लेती है. कंपनियां यहां तक पहुंचती भी है, लेकिन उद्योग स्थापित करने में ज्यादातर कामयाब नहीं हो पाती है और अंतत: निराश होकर लौट जाती है.

राज्य के संचालकों, नीति निर्माताओं और खासतौर पर अधिकारी तंत्र को इस पर गंभीर विचार करना चाहिए. राज्य सरकार जिस ऊर्जा और उत्सुकता से कंपनियों को अपने यहां आमंत्रित करती है, उसी ऊर्जा, उत्सुकता और गति से औद्योगिक कंपनियों द्वारा की जा रही निर्माण के साथ खड़ा भी रहना चाहिए. औद्योगिक भूमि के साथ साथ, बिजली और पानी की उपलब्धता एवं कानून-व्यवस्था को भी सुनिश्चित करना चाहिए. हाल के दिनों में कुछेक छोटे-बड़े उद्योग राज्य में निर्माणाधीन है. औद्योगिक विकास की दृष्टि से राज्य में कई निर्माण भी हुए है.

झारखंड के विरोधाभास : स्थलाकृति, वनस्पतियों या जीवों, उद्योगों या खनिज संपदा की दृष्टि से, झारखंड राज्य एक विशिष्ट एवं प्रशंसनीय राज्य है. देश के कुल खनिज संसाधनों का 40% जिसमें कोयला, लौह अयस्क, तांबा अयस्क, कानाइट, ग्रेफाइट, अभ्रक, यूरेनियम और सोना वगैरह इस राज्य के लिए एक अच्छा औद्योगिक आधार है जिससे लोहा और स्टील, एल्युमिनियम, लौह-अयस्क और कोयला खनन, मोटर वाहन, कोक-ओवन उत्पाद, लौह और अलौह धातु, मशीनरी आदि के कारखाने आसानी से स्थापित किये जा सकते हैं. झारखंड के लिए बेहतर औद्योगिकरण नीति तय करने के लिए निम्नलिखित कारकों को महत्व दिया जाना चाहिए

दीर्घकालीन परिप्रेक्ष्य योजना : राज्य को भविष्य की योजनाओं पर युद्धस्तर पर काम करना चाहिए. योजनाओं के क्रियान्वयन की रणनीति पर काम करना चाहिए, ताकि योजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके. सक्षम नौकरशाहों, अर्थशास्त्रियों, शिक्षाविदों और प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों के प्रबंधकों से परामर्श लिया जाना चाहिए.

शिक्षा और कौशल विकास : झारखंड में प्राथमिक और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देश के कुछ प्रमुख संस्थान हैं. परंतु शिक्षा और कौशल विकास को बहुत बढ़ावा देने की आवश्यकता है.कौशल विकास को नई प्रौद्योगिकी की तरह एजेंडे में शामिल करना चाहिए.

इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति : इन्फ्रास्ट्रक्चर पहला पहलू है जो उद्योगों आकर्षित करता है. ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति, अच्छी सड़क, रेलवे नेटवर्क और हवाई संपर्क में विकास राज्य की इंफ्रास्ट्रक्चर की छवि को और बेहतर बना सकते हैं.

खनिज संपदा का दोहन : राज्य की खनिज संपदा का समुचित उपयोग सुनिश्चित होना चाहिए. प्राकृतिक संपदा का गैरजरूरी इस्तेमाल, चोरी या दोहन पर पूर्णत: लगाम लगाई जानी चाहिए. खनिज संपदा के लिए जेएसएमडीसी जैसे सरकारी इकाइयों को ठोस कदम उठाने चाहिए क्योंकि राज्य में निजी क्षेत्र और खान विकास विशेषज्ञ के साथ संयुक्त उद्यमों का चयन कर के राज्य के लिए राजस्व उत्पन्न करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं.

स्थानीय उत्पादों का भंडारण-विपणन : राज्य में कोल्ड स्टोरेज का निर्माण बड़े पैमाने पर होना चाहिए, ताकि राज्य की उत्पादित वस्तुओं का शेल्फ-लाइफ सीमित न हो. विपणन के लिए परिवहन से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया जाये.

पर्यटन उद्योग : झारखंड में पर्यटन क्षेत्र में जबरदस्त संभावनाएं हैं, लेकिन इस क्षमता का पर्याप्त रूप से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. यहां कई दर्शनीय स्थल, धार्मिक स्थल, आरोग्याश्रम,झीलें, प्राचीन मंदिर, वन्य जीवन, जलप्रपात हैं जो लोकप्रिय है और पर्यटकों के लिए आकर्षण हैं. अच्छा परिवहन, भोजन और पेय सुविधाओं के साथ सुरक्षित और आरामदायक पर्यटन स्थलों को उपलब्ध कराने से पर्यटन उद्योग को कई गुना बढ़ावा मिलेगा.

नयी उद्योग नीति : 2021 में घोषित झारखंड की नयी उद्योग नीति में कई स्पष्ट और सराहनीय बदलाव किये गये हैं. सब्सिडी व उद्योग प्रोत्साहन राशि पर विशेष ध्यान दिया गया है. कृषि उत्पाद,इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन उद्योग, औषधि उद्योग पर उचित और उपयुक्त ध्यान दिया गया है. विद्युत कार पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. अलग उत्पाद पार्क बनाये जायेंगे.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola