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मात्र 45 पैसे में 10 लाख का जीवन बीमा, ये कंपनी देती है देश की सबसे सस्ती बीमा पॉलिसी

Updated at : 31 Dec 2024 11:10 AM (IST)
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IRCTC Insurance

आईआरसीटीसी बीमा पॉलिसी

IRCTC Insurance: आईआरसीटीसी की यह बीमा योजना भारतीय रेलवे यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है. यह योजना न केवल किफायती है, बल्कि यात्रियों और उनके परिवारों के लिए वित्तीय सुरक्षा की गारंटी भी देती है. यात्रियों को इस योजना का लाभ अवश्य उठाना चाहिए, क्योंकि यह उन्हें यात्रा के दौरान दुर्घटनाओं से उत्पन्न अनिश्चितताओं से सुरक्षित रखती है.

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IRCTC Insurance: जीवन बीमा कराने वालों के लिए एक आवश्यक खबर है. वह यह है कि देश में एक ऐसी कंपनी भी है, जो सिर्फ 45 पैसे में आपको 10 लाख की बीमा पॉलिसी देती है. क्या आप जानते हैं? हालांकि, आप इस पर कम ही भरोसा करेंगे, लेकिन यह 100 फीसदी सच है. इतनी सस्ती बीमा पॉलिसी मुहैया कराने वाली कंपनी का नाम आईआरसीटीसी है. भारतीय रेलवे कैटरिंग और टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) ने यात्रियों के लिए एक विशेष और किफायती बीमा योजना शुरू की है, जो 45 पैसे में 10 लाख रुपये का कवरेज देती है. यह योजना न केवल किफायती है, बल्कि यात्रियों के लिए यात्रा के दौरान वित्तीय सुरक्षा का एक भरोसेमंद विकल्प भी है. आइए, इस बीमा योजना के बारे में जानते हैं.

आईआरसीटीसी बीमा योजना का उद्देश्य

आईआरसीटीसी की ओर से पेश की गई यह बीमा योजना भारतीय रेलवे के यात्रियों के लिए डिजाइन की गई है. यह योजना ट्रेन टिकट बुकिंग के समय उपलब्ध होती है और यात्रियों को इसका लाभ उठाने के लिए केवल 45 पैसे का अतिरिक्त भुगतान करना होता है. इस योजना का उद्देश्य यात्रियों को यात्रा के दौरान संभावित दुर्घटनाओं से सुरक्षा प्रदान करना है.

आईआरसीटीसी बीमा योजना के तहत कवरेज और लाभ

  • आईआरसीटीसी बीमा योजना के तहत यात्रियों को कई सुविधाएं प्रदान की जाती हैं.
  • इसके तहत ट्रेन दुर्घटना में मौत होने पर यात्री के परिजनों को 10 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाता है.
  • ट्रेन हादसे में स्थायी विकलांगता की स्थिति में 7.5 लाख रुपये का मुआवजा मिलता है.
  • आंशिक विकलांगता की स्थिति में 2 लाख रुपये तक का मुआवजा मिलता है.
  • ट्रेन दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती होने पर 2 लाख रुपये तक के चिकित्सा खर्च का भुगतान किया जाता है.
  • इसके अलावा, आकस्मिक मृत्यु या विकलांगता के मामले में परिवार को वित्तीय सहायता दी जाती है.

किसे मिलता है आईआरसीटीसी बीमा योजना का लाभ

आईआरसीटीसी बीमा योजना केवल उन्हीं यात्रियों के लिए लागू होती है, जो आईआरसीटीसी की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से अपना टिकट बुक करते हैं. यह सुविधा सभी प्रकार की ट्रेन यात्राओं के लिए उपलब्ध है, चाहे वह शताब्दी, राजधानी, या सुपरफास्ट ट्रेन ही क्यों न हो.

आईआरसीटीसी बीमा योजना के लिए ऐसे करें आवेदन

आईआरसीटीसी बीमा योजना का लाभ उठाना बेहद आसान है. जब यात्री आईआरसीटीसी की वेबसाइट या ऐप पर टिकट बुक करते हैं, तो बीमा का विकल्प अपने आप सामने आता है. यात्री को बस इस विकल्प को चुनकर 45 पैसे का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है. बीमा पॉलिसी टिकट बुकिंग के तुरंत बाद सक्रिय हो जाती है.

कौन-कौन कंपनी देती हैं सबसे सस्ती बीमा पॉलिसी

आईआरसीटीसी ने इस योजना के लिए विभिन्न बीमा कंपनियों के साथ साझेदारी की है. इनमें आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस, एसबीआई जनरल इंश्योरेंस और रॉयल सुंदरम जनरल इंश्योरेंस कंपनी शामिल हैं.

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आईआरसीटीसी बीमा योजना की खासियत

  • किफायती प्रीमियम: केवल 45 पैसे में इतनी बड़ी बीमा योजना मिलना दुर्लभ है.
  • ऑनलाइन प्रक्रिया: आवेदन और क्लेम प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है, जिससे समय और मेहनत की बचत होती है.
  • राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धता: यह योजना पूरे भारत में उपलब्ध है.
  • फास्ट क्लेम सेटलमेंट: क्लेम प्रक्रिया आसान और बेहद फास्ट है, जिससे प्रभावित परिवार को समय पर सहायता मिल जाती है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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