मजदूरों और कंपनियों के लिए बड़ा बदलाव , सरकार ने लागू की चार नई श्रम संहिताएं

Published by :Abhishek Pandey
Published at :09 May 2026 3:48 PM (IST)
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New Labour Code

सांकेतिक तस्वीर (फोटो : Canva)

New Labour Code : केंद्र सरकार ने चार नई श्रम संहिताओं के नियमों को अधिसूचित कर इन्हें पूरी तरह लागू कर दिया है. 29 पुराने कानूनों की जगह लेने वाली ये संहिताएं मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा और कंपनियों को व्यापार में सुगमता प्रदान करेंगी.

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New Labour Code : भारत के श्रम सुधारों के इतिहास में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने चार नई श्रम संहिताओं (Labour Codes) को पूरी तरह से लागू कर दिया है. करीब पांच साल के लंबे इंतजार के बाद अब इन संहिताओं से जुड़े नियमों को भी अधिसूचित (Notify) कर दिया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य देश के हर मजदूर को न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देना है.

क्या हैं ये चार श्रम संहिताएं ?

सरकार ने पुराने और जटिल 29 श्रम कानूनों को मिलाकर चार सरल संहिताओं में बदल दिया है.

  • वेतन संहिता (Wage Code), 2019: यह सभी कर्मचारियों के लिए समय पर वेतन और न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करती है.
  • औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code), 2020: यह कंपनियों और मजदूरों के बीच विवादों को सुलझाने के नियमों को आधुनिक बनाती है.
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code), 2020: इसका लक्ष्य असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को भी पेंशन और बीमा जैसी सुविधाएं देना है.
  • व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य संहिता (OSH Code), 2020: यह कार्यस्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर कामकाजी माहौल पर जोर देती है.

पूरी हुई लागू करने की प्रक्रिया

हालांकि ये चारों संहिताएं 21 नवंबर, 2025 को ही कानून बन गई थीं, लेकिन विस्तृत नियमों के अभाव में इनका पूरी तरह पालन नहीं हो पा रहा था. अधिकारियों के मुताबिक

  • 30 दिसंबर, 2025 को इन नियमों का ड्राफ्ट जारी कर जनता और विशेषज्ञों से राय मांगी गई थी.
  • अब विधिक जांच (Legal Scrutiny) के बाद इन नियमों को आधिकारिक राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित कर दिया गया है.
  • नियमों के प्रकाशन के साथ ही इन कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन (Implementation) का रास्ता साफ हो गया है.

इससे क्या फायदे होंगे ?

सरकार के इस कदम के पीछे तीन मुख्य लक्ष्य हैं.

  • मजदूरों की सुरक्षा: हर श्रमिक को सही वेतन, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा (जैसे पीएफ और बीमा) मिलना अनिवार्य होगा.
  • व्यापार में आसानी (Ease of Doing Business): 29 अलग-अलग कानूनों की जगह सिर्फ 4 संहिताएं होने से कंपनियों के लिए नियमों का पालन करना सरल हो जाएगा.
  • रोजगार सृजन: नए और आधुनिक ढांचे से निवेश बढ़ेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

इस बदलाव के साथ भारत का श्रम ढांचा अब अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आधुनिक हो गया है.

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लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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