भारतीय घरों में ₹830 लाख करोड़ का सोना, दुनिया के टॉप-10 बैंकों से भी ज्यादा भंडार

Updated at : 11 Apr 2026 5:58 PM (IST)
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India Household Gold Value

सांकेतिक तस्वीर (Canva)

India Household Gold Value: भारतीय घरों और मंदिरों में ₹830 लाख करोड़ का 50,000 टन सोना जमा है, जो दुनिया के टॉप-10 सेंट्रल बैंकों के कुल भंडार से भी अधिक है. यह संपदा भारत की जीडीपी का 125% है, जो देश की बेमिसाल आर्थिक शक्ति को दर्शाती है.

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India Household Gold Value: भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि आस्था और सुरक्षा का सबसे बड़ा प्रतीक है. एसोचैम (ASSOCHAM) और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट चौंकाने वाले दावे कर रही है. भारतीय घरों और मंदिरों में करीब 50,000 टन सोना जमा है, जिसकी कीमत लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर (₹830 लाख करोड़) आंकी गई है.

दुनिया की महाशक्तियों से भी आगे है भारतीयों की ‘निजी तिजोरी’

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीयों के पास मौजूद यह निजी गोल्ड स्टॉक अमेरिका और चीन को छोड़कर दुनिया के लगभग हर देश की सालाना GDP से भी बड़ा है. दिलचस्प बात यह है कि यह भंडार दुनिया के सबसे बड़े 10 सेंट्रल बैंकों के कुल रिजर्व से भी अधिक है. जहाँ अमेरिका के सरकारी खजाने में 8,133 टन सोना है, वहीं भारतीय परिवारों के पास उससे 6 गुना ज्यादा सोना है.

बैंक बैलेंस से ज्यादा भरोसेमंद ‘सोना’

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के डेटा के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच सोने की बढ़ती कीमतों ने भारतीय घरों को मालामाल कर दिया है:

  • जीडीपी का 125%: घरों में रखे सोने की वैल्यू भारत की कुल जीडीपी के 125% तक पहुंच गई है.
  • शेयर और डिपॉजिट पर भारी: भारतीयों का सोने पर भरोसा इतना है कि बैंक डिपॉजिट और शेयर बाजार में लगे कुल पैसे की तुलना में सोने की वैल्यू 175% अधिक है.
  • 65% हिस्सेदारी: जमीन-मकान को छोड़ दें, तो भारतीयों की कुल संपत्ति में 65% हिस्सा सिर्फ सोने का है.

दुनिया के टॉप-5 गोल्ड रिजर्व (सरकारी) बनाम भारतीय निजी भंडार

देशसरकारी गोल्ड रिजर्व (टन में)
भारतीय घर और मंदिर (निजी)~50,000 टन
अमेरिका (USA)8,133.5 टन
जर्मनी3,351.5 टन
इटली2,451.8 टन
फ्रांस2,436.9 टन
भारत (RBI)880.3 टन
स्रोत: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल

विशेषज्ञ की राय

एसोचैम (ASSOCHAM – Associated Chambers of Commerce and Industry of India) का मानना है कि यह 50,000 टन सोना फिलहाल एक ‘आइडल एसेट’ (बेकार पड़ी संपत्ति) है. यदि सरकार गोल्ड मोनेटाइजेशन जैसी योजनाओं के जरिए इस सोने का सिर्फ 10% हिस्सा भी बैंकिंग सिस्टम या बिजनेस सर्कुलेशन में लाने में कामयाब रहती है, तो भारत को अपनी विकास दर (Growth Rate) बढ़ाने के लिए किसी विदेशी कर्ज की जरूरत नहीं पड़ेगी.

यह जानकारी आपके FY27 फाइनेंशियल रिपोर्ट के लिए एक बहुत मजबूत ‘इकोनॉमिक बैकड्रॉप’ (पृष्ठभूमि) तैयार कर सकती है.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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