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शेयरों से पैसा कूटने वालों को लगने वाला है झटका! आईटीआर के नियम में हो सकता है बदलाव

Updated at : 04 Jan 2025 11:00 AM (IST)
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Taxation

शेयरों के लाभांश, ब्याज और पूंजीगत लाभ पर भी टैक्स देना होगा.

Budget 2025: संसद में एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2025-26 का सालाना बजट पेश करेंगी. इसके लिए देश के आर्थिक और वित्तीय संस्थानों, बैंकों और उद्योग जगत ने अपना-अपना सुझाव, सिफारिशें और मांगे देना शुरू कर दिया है. इन्हीं सुझावों में आईसीएआई ने सरकार को शेयरों से होने वाली कमाई पर टैक्स लगाने का सुझाव दिया है.

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Budget 2025: कंपनियों के शेयरों को खरीद-बेचकर लाखों-करोड़ों रुपये कमाने वाले धुरंधरों को बड़ा झटका लग सकता है. सरकार ने बजट के लिए दिए गए सुझाव को लागू करती है, तो आने वाले दिनों में शेयरों और प्रतिभूतियों से मोटी कमाई करने वालों को आयकर रिटर्न (आईटीआर) में इस कमाई की जानकारी देनी होगी. चार्टर्ड एकाउंटेंट की शीर्ष संस्था आईसीएआई ने जलवायु परिवर्तन रोकथाम रणनीतियों को बढ़ावा देने के लिए कर लाभ और आयकर रिटर्न फॉर्म में शेयरों और प्रतिभूतियों से होने वाली आमदनी के लिए एक अलग कॉलम जोड़ने की मांग की है.

एलएलपी के लिए आईटीआर फॉर्म को सरल बनाने का सुझाव

भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) ने साझेदार फर्मों और सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) के लिए एक विशेष कर व्यवस्था के साथ ही आयकर रिटर्न फॉर्म को सरल बनाने का भी सुझाव दिया है. संस्थान ने शुक्रवार को कहा कि उसने बजट से पहले दिए अपने सुझाव में आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने और पर्यावरणीय अनुकूल उपायों को प्रोत्साहित करने के लिए विवेकपूर्ण कर सुधारों की वकालत की है.

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लाभांश, ब्याज और कैपिटल गेन पर देना होगा टैक्स

आईसीएआई की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन रोकथाम रणनीतियों को बढ़ावा देने के लिए कर लाभ का प्रावधान भारत के जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों में योगदान देगा और टिकाऊ व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर आर्थिक वृद्धि को भी गति देगा. आईसीएआई ने शेयरों और प्रतिभूतियों से होने वाली आमदनी दिखाने के लिए एक नए कॉलम का प्रस्ताव दिया है, जिसमें लाभांश, ब्याज या पूंजीगत लाभ से हुई आमदनी के संबंध में कर देनदारी के प्रावधान होंगे. संस्थान ने ई-फाइलिंग व्यवस्था में आईटीआर को दोषपूर्ण मानने के लिए शर्तों को तर्कसंगत बनाने और दोषपूर्ण रिटर्न को अमान्य मानने से पहले सुनवाई का मौका देने का सुझाव भी दिया है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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