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निर्यातकों को बड़ी राहत, सरकार ने एक्सपोर्ट टैक्स रिफंड योजना मार्च 2026 तक बढ़ाई

Updated at : 30 Sep 2025 5:32 PM (IST)
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Export Tax Refund Scheme

Export Tax Refund Scheme

Export Tax Refund Scheme: केंद्र सरकार ने निर्यातकों के लिए राहत देते हुए आरओडीटीईपी योजना को 31 मार्च, 2026 तक बढ़ा दिया है. यह योजना विनिर्माण और वितरण के दौरान लगने वाले कर, शुल्क और उपकरों की वापसी करती है. एसईजेड, ईओयू और अग्रिम प्राधिकृत धारक इसका लाभ उठा सकते हैं. संशोधित दरें यथावत रहेंगी. सरकार का यह कदम वैश्विक व्यापार में भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और वित्तीय अनिश्चितता कम करने में मदद करेगा.

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Export Tax Refund Scheme: केंद्र सरकार ने मंगलवार को देश के निर्यातकों को बहुत बड़ी राहत प्रदान की है. उसने ‘निर्यात उत्पादों पर शुल्क और करों की वापसी’ (आरओडीटीईपी) योजना को छह महीने के लिए बढ़ाकर 31 मार्च, 2026 तक कर दिया. यह योजना 30 सितंबर, 2025 को समाप्त होने वाली थी. सरकार का यह कदम भारतीय निर्यातकों को आर्थिक राहत देने और वैश्विक बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है.

आरओडीटीईपी योजना की खासियत

जनवरी 2021 में शुरू हुई आरओडीटीईपी योजना के तहत निर्यातकों को वे कर, शुल्क और उपकर वापस किए जाते हैं, जो विनिर्माण और वितरण प्रक्रिया के दौरान लगते हैं और अन्य किसी केंद्रीय, राज्य या स्थानीय व्यवस्था से वापस नहीं किए जाते. योजना घरेलू सीमा-शुल्क क्षेत्र के अलावा अग्रिम प्राधिकृत धारक विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) और निर्यात-उन्मुख इकाइयां (ईओयू) भी इसका लाभ उठा सकते हैं. संशोधित दरें यथावत लागू रहेंगी, जो वर्तमान में विभिन्न निर्यात उत्पादों के लिए 0.3% से 3.9% तक हैं.

निर्यातकों के लिए लाभ और प्रभाव

भारतीय निर्यातकों का शीर्ष निकाय फियो के अध्यक्ष एससी रल्हन ने इस फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा, “समय सीमा को आगे बढ़ाने का यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं. इसने निर्यातकों के सामने बनी अनिश्चितता को दूर किया है और उन्हें आत्मविश्वास के साथ निर्यात योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी.” रल्हन ने यह भी बताया कि यह योजना भारतीय निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाने में अहम भूमिका निभाती है. वैश्विक व्यापार परिदृश्य में निर्यातकों के लिए यह योजना गति बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण साधन है.

आंकड़े और वैश्विक दबाव

आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 में भारत का निर्यात 6.7% बढ़कर 35.1 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि आयात में 10.12% की कमी होकर यह 61.59 अरब डॉलर रह गया.
हालांकि, अमेरिकी बाजार में निर्यात पर 50% शुल्क के कारण भारतीय उत्पादों की बिक्री पर दबाव पहले से बना हुआ है. ऐसे में आरओडीटीईपी योजना निर्यातकों के लिए राहत की बड़ी वजह बन रही है.

आरओडीटीईपी योजना के फायदे

आरओडीटीईपी योजना का विस्तार निर्यातकों को नई योजनाएं बनाने और लंबी अवधि के निवेश निर्णय लेने में आत्मविश्वास देगा. निर्यातकों के लिए वित्तीय अनिश्चितता कम होगी. उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने का अवसर मिलेगा. योजना का स्थायी होना व्यापारिक रणनीतियों को अधिक प्रभावशाली बनाएगा.

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वैश्विक बाजार में मजबूत होंगे भारतीय निर्यातक

सरकार द्वारा आरओडीटीईपी योजना का विस्तार मार्च 2026 तक निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा. यह कदम न केवल भारतीय निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाएगा बल्कि वैश्विक बाजार में उनकी उपस्थिति को मजबूत करने में मदद करेगा. निर्यातकों को कर और शुल्क की वापसी से वित्तीय स्थिरता और आत्मविश्वास मिलेगा, जिससे वे नए बाजारों और अवसरों की ओर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे.

भाषा इनपुट के साथ

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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