मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, क्या ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए अब बदल जाएंगे ग्लोबल ट्रेड के नियम?

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इजरायल-लेबनान सीमा पर हवाई हमला के बाद का दृश्य (Photo: ANI)

Global Trade Risks: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल सप्लाई चेन को प्रभावित किया है. अब विदेशी व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस अनिवार्य हो गया है.

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Global Trade Risks: आज के दौर में दुनिया भर के देशों के बीच व्यापार करना सिर्फ मुनाफे का सौदा नहीं रह गया है, बल्कि यह बड़े जोखिमों से भरा सफर बन गया है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल सप्लाई चेन की नींव हिला दी है. अब व्यापार केवल आर्थिक समझ पर नहीं, बल्कि राजनीतिक स्थिरता पर टिका है.

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व्यापारिक रास्तों पर खतरा क्यों बढ़ रहा है?

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया का लगभग 80% व्यापार समुद्र के रास्ते होता है. लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण रास्तों पर जारी अस्थिरता ने जहाजों की आवाजाही को मुश्किल बना दिया है. इसका सीधा असर यह हुआ है कि माल ले जाने वाले जहाजों का किराया (Freight Rates) 30% से 50% तक बढ़ गया है. इतना ही नहीं, जहाजों के आने-जाने में अब दो हफ्ते तक की देरी हो रही है, जिससे सामान समय पर नहीं पहुंच पा रहा है. 

क्या साधारण बीमा अब काफी नहीं है?

एक्स्पर्ट्स का मानना है कि अब जोखिम का स्वरूप बदल गया है. बीमा कवच (BimaKavach) के सीईओ तेजस जैन कहते हैं कि समुद्री बीमा अब सिर्फ सामान की सुरक्षा तक सीमित नहीं है. व्यापार कैश फ्लो पर चलता है, और अगर सामान समय पर नहीं पहुंचता, तो पूरा बिजनेस मॉडल गड़बड़ा जाता है. साधारण पॉलिसी में मिसाइल हमलों या ड्रोन हमलों जैसे जोखिम कवर नहीं होते थे, इसलिए अब ‘वॉर रिस्क’ और ‘स्पेशल कवर’ की मांग बढ़ गई है. 

पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस क्यों जरूरी हो गया है?

आज व्यापार के लिए सबसे बड़ा खतरा क्रेडिट यानी उधारी नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता है. EDME इंश्योरेंस ब्रोकर्स के विश्वजीत कदम के अनुसार, राजनीतिक हिंसा, प्रतिबंध (Sanctions) और करेंसी की पाबंदियों ने कंपनियों को मजबूर कर दिया है कि वे पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस लें. जो कंपनियां पहले इसे फिजूल मानती थीं, अब उनके लिए यह नॉन-नेगोशिएबल यानी अनिवार्य हो गया है.

भारतीय कंपनियों पर इसका क्या असर होगा?

भारत के लिए मिडिल ईस्ट ऊर्जा (Oil & Gas) और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है. हाउडेन इंडिया के राजेश कुमार सिंह का कहना है कि आज के माहौल में बिना पॉलिटिकल रिस्क कवर के बॉर्डर पार व्यापार करना अंधेरे में तीर चलाने जैसा है. भारतीय कंपनियों को अगर ग्लोबल लेवल पर टिके रहना है, तो उन्हें इन नए सुरक्षा कवच को अपनाना ही होगा. 

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