भारत की रफ्तार पर 'वॉर' का ब्रेक: मूडीज ने घटाया GDP अनुमान, महंगाई दोगुनी होने की आशंका

सांकेतिक तस्वीर (फोटो/Canva)
Moody's Report: मिडिल ईस्ट संकट के चलते मूडीज ने भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 0.8% घटाया. 55% कच्चे तेल और 90% LPG के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर भारत में बढ़ेगा महंगाई का बोझ. जानिए क्यों रेमिटेंस और विदेशी निवेश पर भी पड़ेगा असर.
Moody’s Report: दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत के लिए एक चिंताजनक खबर है. ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने चालू वित्त वर्ष (2026-27) के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.8% से घटाकर 6% कर दिया है. इसका सीधा कारण पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष है. मूडीज की चेतावनी साफ है: अगर यह युद्ध लंबा खिंचा, तो भारत में न केवल पेट्रोल-डीजल बल्कि रसोई गैस (LPG) और खाने-पीने की चीजों के दाम भी तेजी से बढ़ेंगे.
मूडीज की रिपोर्ट की 5 बड़ी बातें
- ग्रोथ में गिरावट: भारत की जीडीपी वृद्धि दर अब 6.8% के बजाय 6% रहने का अनुमान है.
- महंगाई : मूडीज का मानना है कि औसत महंगाई दर पिछले साल के 2.4% से बढ़कर 4.8% (लगभग दोगुनी) हो सकती है.
- ब्याज दरों: महंगाई बढ़ने के खतरे को देखते हुए RBI शायद ब्याज दरों (Repo Rate) में कटौती न करे, या इन्हें धीरे-धीरे बढ़ा दे. यानी आपकी EMI कम होने के आसार कम हैं.
- रेमिटेंस: विदेश से भारतीय जो पैसा घर भेजते हैं, उसका 40% हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. युद्ध के कारण इस आवक पर बुरा असर पड़ेगा.
- खाद्य सुरक्षा का संकट: भारत खाद (Fertilizer) के लिए आयात पर निर्भर है. सप्लाई रुकने से खेती की लागत बढ़ेगी और अनाज महंगा होगा.
हम खाड़ी देशों पर इतने निर्भर क्यों हैं?
भारत की ऊर्जा सुरक्षा का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से जुड़ा है, यही वजह है कि वहां का तनाव हमारी रसोई और सड़कों तक पहुंचता है.
कच्चा तेल (Crude Oil): भारत अपनी जरूरत का 55% तेल इसी क्षेत्र से मंगाता है.
रसोई गैस (LPG): हमारी 90% से ज्यादा एलपीजी सप्लाई खाड़ी देशों पर टिकी है.
अन्य एजेंसियों के अनुमान
| एजेंसी | 2026-27 के लिए GDP अनुमान |
| मूडीज (Moody’s) | 6% (पहले 6.8% था) |
| OECD | 6.1% |
| इक्रा (ICRA) | 6.5% |
| EY (इकॉनमी वॉच) | 1% की गिरावट (अगर युद्ध जारी रहा) |
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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