₹200 करोड़ का इंस्टेंट लोन स्कैम! ‘मस्त मनी’ ऐप बनाने वाला सॉफ्टवेयर इंजीनियर गिरफ्तार

Updated:
विज्ञापन

मस्त मनी जैसे इंस्टेंट लोन ऐप्स फिर से जांच के घेरे में हैं. नागपुर पुलिस ने 200 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया है. यह ऐप लोगों का डेटा चुराकर ब्लैकमेल करता था.

विज्ञापन

इंस्टेंट लोन देने का दावा करने वाले मोबाइल ऐप्स एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं. नागपुर पुलिस की साइबर सेल ने 'मस्त मनी' नाम के कथित इंस्टेंट लोन ऐप से जुड़े करीब 200 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में भोपाल के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसियों का दावा है कि इस ऐप के जरिए लाखों लोगों का डेटा हासिल कर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था और तय रकम से कई गुना ज्यादा वसूली की जाती थी. यह मामला सिर्फ एक ऐप का नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ रहे डिजिटल लोन फ्रॉड का बड़ा उदाहरण है.

विज्ञापन

मस्त मनी ऐप मामले में क्या है पूरा मामला?

नागपुर के दो लोगों की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की. तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर साइबर सेल ने भोपाल निवासी कामिल सिद्दीकी को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने 'मस्त मनी' नाम का इंस्टेंट लोन ऐप तैयार किया था.

जांच में आरोप है कि इस ऐप का सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर प्रचार किया जाता था. लोगों को 15,000 रुपये तक का तुरंत लोन देने का लालच दिया जाता था. शुरुआती जांच में पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए करीब 5 लाख लोगों को निशाना बनाया गया.

Mast Money: कर्ज मंजूर करून खाजगी डेटावर ताबा, 5 लाख युजर्सनी डाउनलोड केलेले लोन ॲप पोलिसांच्या रडारवर

कैसे काम करता था कथित लोन स्कैम?

पुलिस के अनुसार, ठगी का तरीका कई चरणों में चलता था.

1. इंस्टेंट लोन का लालच : सोशल मीडिया और ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए तुरंत लोन मिलने का दावा किया जाता था.

2. ऐप डाउनलोड करवाना : यूजर से ऐप इंस्टॉल करवाया जाता था. इंस्टॉल करते समय कॉन्टैक्ट, स्टोरेज और अन्य संवेदनशील परमिशन मांगी जाती थीं.

3. निजी डेटा तक पहुंच : आरोप है कि ऐप इंस्टॉल होने के बाद गिरोह यूजर की कॉन्टैक्ट लिस्ट और अन्य निजी जानकारी तक पहुंच बना लेता था.

4. ज्यादा पैसे की वसूली : पुलिस के मुताबिक, 15,000 रुपये के लोन के बदले 25,000 से 50,000 रुपये तक वसूले जाते थे.

5. ब्लैकमेल : यदि कोई भुगतान करने से इनकार करता, तो उसके रिश्तेदारों और परिचितों को फोन करने या निजी जानकारी सार्वजनिक करने की धमकी दी जाती थी.

पुलिस अब किन पहलुओं की जांच कर रही है?

साइबर सेल अब यह पता लगाने में जुटी है कि.

  • इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था.
  • लगभग 200 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन का पैसा कहां गया.
  • क्या इस गिरोह के तार दूसरे राज्यों या विदेशों से जुड़े हैं.
  • कितने लोगों को वास्तव में आर्थिक नुकसान हुआ.

जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों पर निर्भर करेंगे.

ऐसे इंस्टेंट लोन ऐप से कैसे बचें?

अगर आप ऑनलाइन लोन लेने की सोच रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें.

  • केवल RBI से रेगुलेटेड बैंक या NBFC से ही लोन लें.
  • किसी भी ऐप को बिना जरूरत कॉन्टैक्ट, गैलरी या मैसेज की परमिशन न दें.
  • ऐप डाउनलोड करने से पहले उसकी रेटिंग, डेवलपर और रिव्यू जांचें.
  • सोशल मीडिया विज्ञापन देखकर तुरंत ऐप इंस्टॉल न करें.
  • किसी भी तरह की धमकी मिलने पर तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल या स्थानीय पुलिस में शिकायत करें.
  • अपने बैंक और वित्तीय जानकारी किसी अनजान ऐप के साथ साझा करने से बचें.

ऐसे मामलों में सबसे बड़ा खतरा क्या होता है?

डिजिटल लोन फ्रॉड में अक्सर पैसों से ज्यादा नुकसान निजी डेटा का होता है. एक बार कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो या अन्य जानकारी गलत हाथों में पहुंच जाए, तो उसका इस्तेमाल ब्लैकमेल, फर्जी कॉल और साइबर अपराध के लिए किया जा सकता है.

अगर आप पहले से ऐसे ऐप का इस्तेमाल कर चुके हैं तो क्या करें?

  • ऐप को तुरंत हटाने से पहले जरूरी सबूत सुरक्षित रखें.
  • फोन की सभी संवेदनशील परमिशन बंद करें.
  • बैंक अकाउंट और UPI ट्रांजैक्शन पर नजर रखें.
  • पासवर्ड बदलें.
  • साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें.
  • यदि धमकी मिल रही हो तो स्थानीय पुलिस से तुरंत संपर्क करें.



विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola