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Garima Greh Yojana: ट्रांसजेंडरों को फ्री में घर के साथ मिलती हैं कई सुविधाएं, जानें कैसे?

Updated at : 15 Feb 2025 5:09 PM (IST)
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Garima Greh Yojana

भारत में सरकार ने ट्रांसजेंडरों के लिए गरिमा गृह योजना की शुरुआत की है.

Garima Greh Yojana: गरिमा गृह योजना ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए आत्मनिर्भरता, सम्मान और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह न केवल उन्हें सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है, बल्कि उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने और सशक्त बनाने का भी कार्य करता है. इस योजना के माध्यम से सरकार समाज में ट्रांसजेंडरों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और उन्हें समान अधिकार दिलाने का प्रयास कर रही है.

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Garima Greh Yojana: भारत में ट्रांसजेंडर यानी किन्नर समुदाय लंबे समय से सामाजिक भेदभाव, आर्थिक असुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है. लेकिन, इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने “गरिमा गृह योजना” की शुरुआत की है. इस योजना का उद्देश्य ट्रांसजेंडरों को सुरक्षित आवास, सामाजिक समावेशन और आत्मनिर्भर बनाना है. यह योजना ट्रांसजेंडर समुदाय को न केवल आश्रय देती है, बल्कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराती है. मगर सबसे बड़ी विडंबना यह है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकांश लोगों को सरकार की इस योजना के बारे में जानकारी ही नहीं है और आज भी वे भिक्षाटन पर ही अपना जीवन बिता रहे हैं. आइए, इस योजना के बारे में विस्तार से जानते हैं.

गरिमा गृह योजना क्या है?

“गरिमा गृह योजना” भारत सरकार की ओर से शुरू की गई एक कल्याणकारी योजना है, जो ट्रांसजेंडरों के पुनर्वास और सुरक्षा के लिए डिजाइन की गई है. इस योजना के तहत देशभर में “गरिमा गृह” नामक आश्रय गृह स्थापित किए गए हैं, जहां ट्रांसजेंडरों को फ्री में रहने, स्वास्थ्य सुविधाए, मनोवैज्ञानिक परामर्श, कौशल विकास और कानूनी सहायता जैसी सेवाएं दी जाती हैं. यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से संचालित की जाती है और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की मदद से ट्रांसजेंडर समुदाय को लाभ पहुंचाया जाता है.

गरिमा गृह योजना के फायदे

  • सुरक्षित आवास और देखभाल: बेघर, पीड़ित या संकट में फंसे ट्रांसजेंडरों को गरिमा गृह में फ्री में सुरक्षित आवास मिलता है. यहां पर उन्हें फ्री में भोजन, स्वच्छता सुविधाएं और स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध कराई जाती है.
  • मनोवैज्ञानिक और कानूनी सहायता: गरिमा गृह में रहने वाले ट्रांसजेंडरों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया जाता है. यदि वे किसी कानूनी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो उन्हें नि:शुल्क कानूनी सहायता भी प्रदान की जाती है.
  • शिक्षा और कौशल विकास: ट्रांसजेंडर समुदाय को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं. उन्हें सिलाई, कंप्यूटर एजुकेशन, ब्यूटीशियन कोर्स और अन्य व्यावसायिक कौशल सिखाए जाते हैं, ताकि वे रोजगार प्राप्त कर सकें.
  • स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाएं: ट्रांसजेंडरों को नियमित स्वास्थ्य जांच और चिकित्सा सहायता दी जाती है. एचआईवी/एड्स और अन्य स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
  • आत्मनिर्भरता और समाज में पुनर्स्थापना: गरिमा गृह में रहने वाले ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाते हैं. उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें.

गरिमा गृह योजना से किसे फायदा मिलता है?

  • गरिमा गृह योजना का लाभ विशेष रूप से ट्रांसजेंडर समुदाय को मिलता है. खासकर उन लोगों को जो परिवार से अस्वीकृत करने के बाद बेघर हो चुके हैं.
  • जो शोषण, हिंसा या सामाजिक भेदभाव का शिकार हुए हैं. जिन्हें रोजगार और शिक्षा के अवसरों से वंचित रखा गया है.
  • जो मानसिक और शारीरिक रूप से पीड़ित हैं और चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है.

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भारत में गरिमा गृह योजना का क्रियान्वयन

  • सरकार ने विभिन्न राज्यों में 10 से अधिक गरिमा गृह केंद्र स्थापित किए हैं और इसे आगे बढ़ाने की योजना है.
  • इस योजना को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के साथ साझेदारी की गई है.
  • कई सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन ट्रांसजेंडर समुदाय को इस योजना का लाभ दिलाने में मदद कर रहे हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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