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विदेशी मुद्रा भंडार में 2.41 अरब डॉलर की गिरावट, 5 अप्रैल को था रिकॉर्ड हाई पर

Updated at : 04 May 2024 12:05 PM (IST)
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Foreign Exchange Reserves

Foreign Exchange Reserves

Forex: विदेशी मुद्रा भंडार को एफएक्स रिजर्व भी कहा जाता है. यह केंद्रीय बैंक की ओर से रखी गई नकदी और सोना और चांदी जैसी अन्य आरक्षित संपत्तियां हैं, जो मुख्य रूप से देश के भुगतान को संतुलित करने के लिए उपलब्ध हैं.

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Forex: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार भंडार में करीब 2.41 अरब डॉलर की गिरावट आ गई है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले 26 अप्रैल 2024 को समाप्त सप्ताह में 2.41 अरब डॉलर घटकर 637.92 अरब डॉलर रहा. पिछले कारोबारी सप्ताह में भी देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2.28 अरब डॉलर घटकर 640.33 अरब डॉलर रहा था. यह कई सप्ताह की तेजी के बाद पांच अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 648.56 अरब डॉलर के नये सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था. इससे पहले, सितंबर 2021 में विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 642.45 अरब डॉलर पर पहुंच गया था.

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियां 1.16 अरब डॉलर घटकर 559.70 अरब डॉलर रही. डॉलर के संदर्भ में उल्लेखित विदेशी मुद्रा आस्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की घट-बढ़ का प्रभाव शामिल होता है.

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55.53 अरब डॉलर का सोने का आरक्षित भंडार

रिजर्व बैंक ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान सोने का आरक्षित भंडार का मूल्य 1.27 अरब डॉलर घटकर 55.53 अरब डॉलर रहा. रिजर्व बैंक ने कहा कि विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 1.5 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.04 अरब डॉलर हो गया. रिजर्व बैंक के मुताबिक, समीक्षाधीन सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के पास भारत की आरक्षित जमा भी 80 लाख डॉलर बढ़कर 4.64 अरब डॉलर हो गई.

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किस काम आता है विदेश मुद्रा भंडार

विदेशी मुद्रा भंडार को एफएक्स रिजर्व या फॉरेक्स भी कहा जाता है. यह केंद्रीय बैंक या अन्य मौद्रिक प्राधिकरण द्वारा रखी गई नकदी और सोना और चांदी जैसी अन्य आरक्षित संपत्तियां हैं, जो मुख्य रूप से देश के भुगतान को संतुलित करने के लिए उपलब्ध हैं. यह विदेशी विनिमय दर को प्रभावित करता है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसी विदेशी मुद्रा भंडार से विदशों से आयात किया जाता है. इसके अलावा, विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि निवेशकों में आत्मविश्वास और उत्साह को भी बढ़ाता है. विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी कर्ज दायित्वों को पूरा करने में सरकार की सहायता कर सकता है. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आपदाओं की स्थिति में बेहतर ढंग से निपटने में विदेशी मुद्रा भंडार की प्रभावी भूमिका हो सकती है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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