भारत में नकली सामान का बड़ा जाल, 89% शहरी लोग जिंदगी में कभी न कभी खरीद चुके हैं फेक प्रोडक्ट

Updated at : 16 Mar 2026 4:18 PM (IST)
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Fake Product

नकली सामान असली से करीब 22% सस्ता होता है. (सांकेतिक तस्वीर-Canva)

Fake Product: एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में नकली सामान तेजी से बढ़ रहा है. पिछले साल 35% ग्राहकों ने फेक प्रोडक्ट देखा या खरीदा, जबकि 89% शहरी लोग जीवन में कभी न कभी इसका शिकार हुए.

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Fake Products: भारत में नकली सामान (काउंटरफिट प्रोडक्ट) का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में करीब 35% भारतीय ग्राहकों ने नकली प्रोडक्ट का सामना किया है. वहीं शहरों में रहने वाले करीब 89% लोगों ने जिंदगी में कम से कम एक बार नकली सामान खरीद लिया है.

यह जानकारी “State of Counterfeiting in India 2025” नाम की रिपोर्ट में सामने आई है. यह रिपोर्ट Authentication Solution Providers’ Association (ASPA) और CRISIL Intelligence ने मिलकर तैयार की है. इसके लिए देश के 9 बड़े शहरों,दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, अहमदाबाद, जयपुर और इंदौर में 1,639 लोगों से सर्वे किया गया.

कपड़ों में सबसे ज्यादा नकली सामान

रिपोर्ट के मुताबिक नकली कपड़ों का बाजार सबसे ज्यादा बड़ा है. करीब 31% लोगों ने पिछले एक साल में नकली कपड़े देखे या खरीदे हैं. ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह फेक फैशन प्रोडक्ट खूब बिक रहे हैं. सिर्फ कपड़े ही नहीं, रोज इस्तेमाल होने वाले सामान में भी नकली चीजें मिल रही हैं. करीब 27% लोगों ने नकली FMCG प्रोडक्ट जैसे पैकेज्ड फूड, पर्सनल केयर और घरेलू सामान देखे.

गाड़ियों के पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स भी प्रभावित

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि

  • 22% लोगों को नकली ऑटो पार्ट्स मिले
  • 18% लोगों को नकली इलेक्ट्रॉनिक्स या घरेलू उपकरण मिले
  • इनमें से कई नकली प्रोडक्ट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बेचे जा रहे हैं.

नकली दवाइयों से बढ़ी चिंता

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि दवाइयों के बाजार में भी नकली प्रोडक्ट मौजूद हैं. अनुमान है कि दवा बाजार का करीब 28% हिस्सा नकली दवाइयों का हो सकता है, जो लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा है. नकली सामान का असर किसानों पर भी पड़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक 35% किसानों को नकली खेती से जुड़े उत्पाद मिले. किसानों का मानना है कि बाजार में मिलने वाले करीब 30% कृषि इनपुट नकली हो सकते हैं, जिससे फसल और कमाई दोनों पर असर पड़ता है.

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बन रहे बड़ा जरिया

रिपोर्ट में बताया गया कि 53% नकली सामान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए खरीदे जाते हैं.
वहीं कृषि उत्पाद और दवाइयों के मामले में लोकल दुकानों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है.

जागरूकता बढ़ाने की जरूरत

सर्वे में 74% लोगों का मानना है कि पिछले एक साल में नकली सामान की घटनाएं बढ़ी हैं. वहीं 93% लोगों ने कहा कि इस बारे में ज्यादा जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है. विशेषज्ञों का कहना है कि नकली सामान की समस्या से निपटने के लिए सरकार, कंपनियों, दुकानदारों और ग्राहकों को मिलकर काम करना होगा, तभी इस खतरे को कम किया जा सकता है.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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