तमिलनाडु : मंदिरों के कर्मचारियों के डीए और बोनस में की गई बढ़ोतरी, 1 जनवरी से मिलेगा लाभ, जानें कैसे?

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार ने मंदिरों के कर्मचारियों के डीए और बोनस में बढ़ोतरी कर दिया है. मंदिरों के कर्मचारियों को 1 जनवरी 2023 से बढ़े हुए डीए और बोनस का लाभ दिया जाएगा.
DA-Bonus Hike : क्या आप जानते हैं कि भारत में मंदिरों के कर्मचारियों को भी महंगाई भत्ता (डीए) और बोनस का लाभ दिया जाता है? शायद आपको यकीन नहीं होगा, लेकिन यह सच है कि मंदिर में काम करने वाले पुजारी से लेकर सफाईकर्मी तक को कर्मचारी का दर्जा प्राप्त है और उन्हें भी आम कर्मचारियों की तरह वेतन के साथ महंगाई भत्ता और बोनस का लाभ दिया जाता है. खबर है कि तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार ने मंदिरों के कर्मचारियों के डीए और बोनस में बढ़ोतरी कर दिया है. मंदिरों के कर्मचारियों को 1 जनवरी 2023 से बढ़े हुए डीए और बोनस का लाभ दिया जाएगा.
मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मंगलवार को हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (एचआर एंड सीई) के अंतर्गत मंदिरों के स्थायी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) में 4 फीसदी बढ़ोतरी करने का आदेश दिया है. सरकार की ओर से जारी किए गए एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मंदिर कर्मचारियों का भत्ता अब 34 फीसदी से बढ़कर 38 फीसदी हो गया है.
सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, तमिलनाडु में मंदिरों के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते में की गई 1 जनवरी, 2023 से प्रभावी हो गई है. इससे मंदिरों के करीब 10,000 स्थायी कर्मियों को लाभ मिलेगा और सरकार पर सालाना रूप से सात करोड़ रुपये बोझ पड़ेगा. यह आदेश उन मंदिरों पर लागू हुआ है, जिनकी सालाना आमदनी एक लाख रुपये या इससे अधिक है.
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इसके साथ ही मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सभी मंदिर के कर्मचारियों (पूर्णकालिक, अल्पकालिक या दैनिक भत्ताभोगी) के लिए पोंगल पर्व का बोनस भी 2000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने का आदेश दिया है. इससे सरकारी खजाने पर इस वर्ष 1.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा. राज्यकर्मियों का महंगाई भत्ता भी हाल ही में 34 फीसदी से चार फीसदी बढ़ाकर 38 फीसदी कर दिया गया था.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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