Cement Price Hike: जनवरी से घर बनाना हो सकता है महंगा, सीमेंट के दाम बढ़ने की उम्मीद
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 26 Dec 2025 7:33 PM
जनवरी से सीमेंट की कीमत बढ़ने की उम्मीद.
Cement Price Hike: जनवरी 2026 से सीमेंट के दाम बढ़ने की उम्मीद है, जिससे घर बनाना और निर्माण कार्य महंगा हो सकता है. सिस्टमैटिक्स रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, हालिया गिरावट के बाद मांग में तेजी आने की संभावना है. लंबे मानसून के कारण निर्माण गतिविधियां प्रभावित रहीं, लेकिन नई अवसंरचना परियोजनाओं और शहरी आवास से आगे चलकर मांग मजबूत होने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में सीमेंट सेक्टर में कीमतों और बिक्री दोनों में सुधार देखने को मिल सकता है.
Cement Price Hike: खरमास खत्म होने के बाद क्या आप घर बनाने या हाउसिंग प्रोजेक्ट का काम शुरू करने का प्लान बना रहे हैं? अगर हां, तो यह आपके लिए थोड़ा महंगा पड़ सकता है. इसका कारण यह है कि जनवरी 2026 से देश में सीमेंट के दामों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद जाहिर की जा रही है. इसलिए नया घर बनाने या निर्माण कार्य की योजना बना रहे लोगों के लिए आने वाले समय में खर्च बढ़ सकता है. सिस्टमैटिक्स रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 से सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमेंट की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद मांग में सुधार की संभावना है, जिसके चलते कंपनियां कीमतें बढ़ा सकती हैं.
गिरावट के बाद कीमतों में उछाल की उम्मीद
सिस्टमैटिक्स रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले महीने अखिल भारतीय औसत सीमेंट कीमतों में महीने-दर-महीने 6 रुपये प्रति बैग की गिरावट दर्ज की गई है.यह गिरावट मुख्य रूप से दक्षिणी और पूर्वी भारत में कीमतों में कटौती के कारण आई है. हालांकि, सिस्टमैटिक्स रिसर्च का मानना है कि यह कमजोरी अस्थायी है और जनवरी 2026 से कीमतों में फिर से उछाल देखने को मिल सकता है.
मानसून और निर्माण गतिविधियों पर असर
लंबे समय तक चले मानसून ने देशभर में निर्माण गतिविधियों को प्रभावित किया है. खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में काम की रफ्तार धीमी रही, जिससे सीमेंट की मांग कमजोर पड़ी. इसका सीधा असर कंपनियों की मूल्य निर्धारण क्षमता पर पड़ा और उन्हें कीमतों में कटौती करनी पड़ी.
पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा गिरावट
सभी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा गिरावट पूर्वी बाजारों में देखने को मिली. बिहार में चल रहे राज्य चुनावों के कारण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सुस्ती रही. इसके चलते जीएसटी दर में 30 रुपये प्रति बैग की कटौती के बाद सीमेंट की कीमतों में 10 से 15 रुपये प्रति बैग तक की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में भी कीमतें 10 से 12 रुपये प्रति बैग तक कम हुईं.
दूसरे क्षेत्रों में कीमतों की स्थिति
छत्तीसगढ़ में सीमेंट की कीमतें 300 रुपये प्रति बोरी पर स्थिर रहीं. हालांकि, यहां श्रम की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. दक्षिणी भारत में कीमतों में 5 से 10 रुपये प्रति बोरी की नरमी देखी गई और औसत कीमत 325 रुपये प्रति बोरी रही. उत्तरी और पश्चिमी भारत में कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रहीं, जहां औसत कीमत क्रमशः 365 रुपये और 335 रुपये प्रति बोरी दर्ज की गई.
तीसरी तिमाही में बढ़ोतरी की संभावना कम
शोध फर्म द्वारा किए गए चैनल सर्वेक्षणों से पता चलता है कि लंबे मानसून के कारण मांग कमजोर जरूर हुई है, लेकिन साल-दर-साल आधार पर यह बेहतर बनी हुई है. डीलरों का कहना है कि जीएसटी पास-थ्रू पर सरकार की कड़ी निगरानी के चलते चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम है.
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2026 में मजबूत सुधार की उम्मीद
हालांकि, जनवरी 2026 से निर्माण गतिविधियों के फिर से शुरू होने के साथ मांग में सुधार की उम्मीद है. रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही में अवसंरचना परियोजनाओं और शहरी आवास से मजबूत मांग देखने को मिल सकती है. अधिकांश समेकन पूरा हो जाने के बाद, वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में कीमतों में मजबूत पुनरुत्थान और सीमेंट की खपत में 7-8% की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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