Bhutani Infra: भूटानी इन्फ्रा ने WTC से संबंधों पर दी सफाई, न जमीन मिली और न ही फंड
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 07 Mar 2025 5:44 PM
Bhutani Infra
Bhutani Infra: भूटानी इन्फ्रा ने स्पष्ट किया कि उसे WTC से कोई जमीन या फंड नहीं मिला. फरवरी 2024 में सभी संबंध समाप्त कर दिए गए और कंपनी ED जांच में पूरा सहयोग कर रही है.
Bhutani Infra: भूटानी इन्फ्रा ने WTC बिल्डर के साथ अपने संबंधों को लेकर चल रही अफवाहों पर विराम लगाते हुए स्थिति स्पष्ट की है. कंपनी ने कहा कि WTC के साथ उनकी साझेदारी बेहद कम समय के लिए थी. इस दौरान न तो कोई जमीन मिली और न ही किसी प्रकार का फंड हस्तांतरित किया गया. इसके अलावा, भूटानी इन्फ्रा या उसके निदेशकों को भूमि स्वामित्व रखने वाली किसी भी कंपनी में कोई शेयर नहीं मिला है.
भूटानी इन्फ्रा का जुलाई 2023 में WTC के साथ समझौता
भूटानी इन्फ्रा ने जुलाई 2023 में WTC ग्रुप के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे. हालांकि, केवल छह महीने बाद फरवरी 2024 में कंपनी ने इस साझेदारी को पूरी तरह से समाप्त कर दिया. कंपनी ने स्पष्ट किया कि WTC से उसका कोई आर्थिक या ऑपरेशन से जुड़ा संबंध नहीं है और इस अवधि में उसे किसी प्रकार की वित्तीय या संपत्तिगत प्राप्ति नहीं हुई.
भूटानी इन्फ्रा ने WTC ग्राहकों की मदद की
भूटानी इन्फ्रा ने कहा कि इसके विपरीत कोई भी दावा पूरी तरह से भ्रामक और गलत है. फरवरी की शुरुआत में ही WTC से अलग हो जाने के कारण मौजूदा विवाद से कंपनी का कोई लेना-देना नहीं है. इसके बावजूद, कंपनी ने उन ग्राहकों की सहायता की है जो WTC से जुड़े मामलों को लेकर परेशान थे.
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भूटानी इन्फ्रा का ईडी की जांच में सहयोग का दावा
भूटानी इन्फ्रा ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से की जा रही जांच में भी पूरा सहयोग दिया है और आवश्यक जानकारी मुहैया कराई है. कंपनी ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी यदि जरूरत पड़ी, तो वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग जारी रखेगी. कंपनी ने स्पष्ट किया कि WTC के साथ उसके पूर्व संबंधों को लेकर जो भी गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं, वे निराधार हैं. भूटानी इन्फ्रा पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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