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किशमिश-बादाम के बढ़ सकते हैं दाम, अटारी-वाघा बॉर्डर बंद होने से अफगानिस्तान से आयात प्रभावित

Updated at : 28 Apr 2025 8:46 PM (IST)
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India-Pakistan Tension

Dry fruits in shop

India-Pakistan Tension: अटारी-वाघा सीमा बंद होने से अफगानिस्तान से भारत में सूखे मेवों के आयात पर संकट आ सकता है. इससे बादाम, किशमिश, खुबानी और पिस्ता जैसी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने की आशंका है. भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के कारण आयात प्रभावित हो सकता है, जिससे अगले कुछ दिनों में इन सूखे मेवों की कीमतें 20% तक बढ़ सकती हैं.

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India-Pakistan Tension: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के चलते अटारी-वाघा सीमा को बंद कर दिया गया है. इसका सीधा असर अफगानिस्तान से भारत आने वाले सूखे मेवों के आयात पर पड़ सकता है. इससे बादाम, किशमिश, खुबानी और पिस्ता जैसी चीजों की घरेलू कीमतों में तेजी आ सकती है.

आयात पर बड़ा असर

भारत, अटारी-वाघा सीमा के जरिए अफगानिस्तान से बड़े पैमाने पर सूखे मेवे, हींग और केसर का आयात करता है. वित्त वर्ष 2024-25 (अप्रैल-जनवरी) के दौरान अफगानिस्तान से भारत का कुल आयात 59.14 करोड़ डॉलर रहा, जिसमें से 35.8 करोड़ डॉलर का सूखे मेवों का व्यापार शामिल है. अब सीमा बंद होने के कारण यह व्यापार पूरी तरह ठप हो सकता है.

10 दिन बाद कीमतों में भारी बढ़ोतरी संभव

खारी बावली ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव बत्रा के मुताबिक, “तुरंत कोई बड़ा प्रभाव नहीं दिखेगा, लेकिन 10 दिनों के भीतर सूखे मेवे की सप्लाई बाधित हो जाएगी और दिल्ली जैसे प्रमुख बाजारों में कीमतें 20% तक बढ़ सकती हैं.”

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वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशने की कोशिश

आयातकों के अनुसार, अब यूएई, ईरान और इराक जैसे देशों से सूखे मेवों के आयात पर जोर दिया जाएगा, ताकि आपूर्ति की कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सके. हालांकि, इससे लागत भी बढ़ सकती है और उपभोक्ताओं को महंगे दाम पर मेवे खरीदने पड़ सकते हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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