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शनिवार तक हट सकता है Yes Bank पर लगा प्रतिबंध, प्रशासक प्रशांत कुमार ने जतायी उम्मीद

Updated at : 09 Mar 2020 9:03 PM (IST)
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शनिवार तक हट सकता है Yes Bank पर लगा प्रतिबंध, प्रशासक प्रशांत कुमार ने जतायी उम्मीद

Yes Bank के प्रशासक और SBI के पूर्व अधिकारी प्रशांत कुमार ने सोमवार को उम्मीद जाहिर की है कि शनिवार तक Yes Bank पर से लगा प्रतिबंध हटा दिया जाएगा. इस दिशा में कारगर कदम उठाये जा रहे हैं, ताकि इसके ग्राहकों को दिक्कत का सामना न करना पड़े. RBI ने Yes Bank पर बीते पांच मार्च को प्रतिबंध लगा दिया था.

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मुंबई : संकटग्रस्त यस बैंक को उम्मीद है कि उसके कामकाज पर लगी रोक इस शनिवार को हटा ली जाएगी. आरबीआई द्वारा नियुक्त बैंक के प्रशासक प्रशांत कुमार ने सोमवार को यह बात कही. उन्होंने कहा कि एसबीआई की अगुवाई वाली पुनर्गठन योजना पर रिजर्व बैंक की अंतिम मंजूरी के बाद यस बैंक के काम कामकाज पर रोक हटा ली जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि कामकाज पर रोक हटाने का असर पूंजी जुटाने की योजना पर नहीं होगा. कुमार एसबीआई के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी हैं.

कुमार ने कहा कि बैंक पूंजी की तलाश जारी रखेगा और उन्होंने इसे जमाकर्ताओं के विश्वास को बहाल करने के साथ ही अपनी शीर्ष प्राथमिकता बताया. बैंक में 2.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की जमाएं हैं और पूंजी जुटाने में नाकामयाब रहने के चलते गुरुवार को उसके कामकाज पर रोक लगा दी थी. बैंक के बोर्ड को निलंबित कर दिया गया और कुमार को प्रशासक नियुक्त किया गया.

आरबीआई द्वारा नियुक्त यस बैंक के प्रशासक प्रशांत कुमार ने कहा कि बैंक अपने ग्राहकों के लिए सभी बैंकिंग सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए काम कर रहा है. कुमार को लगता है कि हमारी सबसे पहली प्राथमिकता ग्राहक हैं और अपने ग्राहकों को सुविधाजनक व्यापार मुहैया कराना है और जैसा कि आपने पहले दिन से देखा होगा, हमारे सभी एटीएम ग्राहकों के लिए चालू थे. उन्होंने कहा कि यहां तक कि शनिवार शाम से दूसरे बैंकों के एटीएम से भी ग्राहक नकदी निकाल सकते थे.

कुमार ने एक टीवी चैनल से कहा कि और हमारी शाखाओं में हमारे कर्मचारी ग्राहकों को सेवाएं दे रहे हैं. वे उनके मसलों से निपट रहे हैं. मैं इस अवसर पर अपने सभी ग्राहकों को भी धन्यवाद कहना चाहता हूं, जिन्होंने वास्तव में हमारा सहयोग किया और जिन्होंने बहुत अधिक धैर्य का परिचय दिया. मैं सोचता हूं कि यह यस बैंक के ब्रांड में विश्वास के चलते है.

बता दें कि रिजर्व बैंक ने पांच मार्च, 2020 को यस बैंक के बोर्ड को निलंबित कर दिया था और एसबीआई के पूर्व अधिकारी प्रशांत कुमार को उसका प्रशासक नियुक्त किया. इसके साथ ही, ग्राहकों के लिए तीन अप्रैल तक अधिकतम निकासी की सीमा 50,000 रुपये तय कर दी गयी. कुमार ने भरोसा दिलाया कि सभी बैंकिंग सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए बैंक के कर्मचारी कठिन परिश्रम कर रहे हैं. आरबीआई की रोक से यस बैंक के विनिमय लेनदेन, क्रेडिट कार्ड, डिजिटल भुगतान जैसे वित्तीय बाजार के लेनदेन भी प्रभावित हुए.

कुमार ने कहा कि मेरा मानना है कि हम 14 मार्च को अपना परिणाम घोषित करने जा रहे हैं. आरबीआई की कार्रवाई से पहले बैंक ने 2019-20 की तीसरी तिमाही के लिए अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा को टाल दिया था. यह पूछने पर कि बैंक की पूंजी आवश्यकता एसबीआई द्वारा 2,450 करोड़ रुपये में 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के मुकाबले काफी अधिक है? कुमार ने कहा कि जब बोर्ड तीसरी बैठक में तिमाही आय की घोषणा करेगा, तो इस बारे में स्पष्टता आएगी.

उन्होंने कहा कि एसबीआई ने 49 फीसदी के लिए जो रुचि दिखाई है, निश्चित रूप से जरूरत उससे काफी अधिक होगी. हम समान सोच वाले निवेशकों के साथ बातचीत कर रहे हैं. कुमार ने कहा कि इसलिए हमें पूरी उम्मीद है कि दो दिनों में पूंजी की आवश्यकता के मुद्दे पर ध्यान दिया जाएगा.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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