''निकट भविष्य में ब्याज दरें घटाने की संभावना से एसबीआई ने किया इंकार''
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Aug 2015 1:22 PM
मुंबई : सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बडे बैंक एसबीआइ ने अपने ग्राहकों के लिए हाल फिलहाल ब्याज दर घटाने की संभावना से आज इनकार किया जबकि आरबीआइ ने इस साल नीतिगत दर में की गयी कटौतियों का ज्यादा लाभ ग्राहकों तक नहीं पहुंचाने के लिए वाणिज्यिक बैंकों को झिडकी दी है. एसबीआइ की अध्यक्ष अरुंधती […]
मुंबई : सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बडे बैंक एसबीआइ ने अपने ग्राहकों के लिए हाल फिलहाल ब्याज दर घटाने की संभावना से आज इनकार किया जबकि आरबीआइ ने इस साल नीतिगत दर में की गयी कटौतियों का ज्यादा लाभ ग्राहकों तक नहीं पहुंचाने के लिए वाणिज्यिक बैंकों को झिडकी दी है. एसबीआइ की अध्यक्ष अरुंधती भट्टाचार्य ने कहा कि बैंकों के ब्याज में कमी कटौती ऋण वृद्धि समेत बहुत सी बातों पर निर्भर करती है.
साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें निकट भविष्य में उनके बैंक की ब्याज कम किया जाने की गुंजाइश नहीं दिखती है. अरुंधती की यह टिप्पणी आज मुंबई में रिजर्व बैंक की द्वैमासिक नीतिगत समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर (रेपो दर) जस की तस बरकरार रखने के रिजर्व बैंक के फैसले के तत्काल बाद आयी है. रेपो दर वह अल्पकालिक ब्याज दर है जिस पर केंद्रीय बैंक अन्य बैंकों को एकाध दिन के लिए धन उधार देता है.
आरबीआइ गवर्नर रघुराम राजन ने आज भी कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति ऊंचे स्तर पर है और बैंकों ने नीतिगत दरों में की गई पिछली कटौतियों का अभी ज्यादा फायदा ग्राहकों को नहीं दिया है. आरबीआइ ने 2015 में अब तक नीतिगत दर में तीन बार 0.25-0.25 प्रतिशत कर कुल 0.75 प्रतिशत की कटौती की है.
गवर्नर ने नीतिगत दरों में कटौती का अधिक फायदा नहीं देने के खिलाफ फटकार लगाते हुए कहा कि बैंकों ने इस वर्ष अब तक ग्राहकों के लिए ब्याज दर में औसतन 0.30 प्रतिशत की कटौती की है जबकि आरबीआइ ने नीतिगत दर में कुल मिला कर 0.75 प्रतिशत घटायी है.
इस संबंध में भट्टाचार्य ने एसबीआइ के रुख का बचाव किया और कहा कि बैंक ने उस समय ब्याज दर में सिर्फ 0.3 प्रतिशत की बढोतरी की थी जबकि आरबीआइ ने नीतिगत दर 0.75 प्रतिशत बढाई थी और अब बैंकों की ब्याज में सिर्फ 0.3 प्रतिशत की कटौती हुई है जबकि केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दर 0.75 प्रतिशत घटायी. उन्होंने हालांकि कहा कि आरबीआइ की पहल उम्मीद के मुताबिक है और ये अच्छा है कि केंद्रीय बैंक ने उदार रुख बरकरार रखा है.
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