संकट से निपटने के लिए आकस्मिक आपात योजना तैयार रखे सरकार : रिजर्व बैंक
Updated at : 02 Jun 2015 3:53 PM (IST)
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मुंबई : रिजर्व बैंक ने आज रेपो रेट में 0.25 बेसिस की कटौती की है. सालभर में यह तीसरा मौका है जब रेपो रेट में कटौती की गयी है. हालांकि उद्धोग जगत को इससे भी ज्यादा कटौती की उम्मीद थी . रेपो रेट में कटौती बावजूद शेयर बाजार में उत्साह का माहौल नहीं दिखा ,उल्टे […]
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मुंबई : रिजर्व बैंक ने आज रेपो रेट में 0.25 बेसिस की कटौती की है. सालभर में यह तीसरा मौका है जब रेपो रेट में कटौती की गयी है. हालांकि उद्धोग जगत को इससे भी ज्यादा कटौती की उम्मीद थी . रेपो रेट में कटौती बावजूद शेयर बाजार में उत्साह का माहौल नहीं दिखा ,उल्टे सेंसेक्स में गिरावट देखने को मिली.
रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने बैंको से कहा कि नीतिगत दर में कटौती का लाभ आम जनता और उद्योगों तक पहुंचना चाहिए. रिजर्व बैंक ने हालांकि, इसके साथ ही निकट भविष्य में दर में और कटौती नहीं किये जाने का संकेत दिया है. उसका कहना है कि तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगतार तेजी और भू राजनैतिक जोखिमों के साथ बारिश कम होने से मुद्रास्फीति का दबाव बढने का खतरा है.
वहीं रिजर्व बैंक ने वैश्विक कारकों और सामान्य से कम मानसून के संभावित असर के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि का अनुमान अप्रैल के 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है.बैंक का मानना है कि मुद्रास्फीति अगस्त तक नीचे बनी रहेगी पर उसके बाद जनवरी 2016 तक यह बढकर 6 प्रतिशत तक हो जायेगी.
रिजर्व बैंक ने सरकार से इस स्थिति से निपटने के लिए आकस्मिक आपात योजना तैयार रखने को कहा है ताकि कमजोर मानसून की वजह से कम खाद्यान्न उत्पादन के प्रभाव से बेहतर ढंग से निपटा जा सके.रिजर्व बैंक के लिये दूसरी चिंता कच्चे तेल के बढते दाम की है. अप्रैल की मौद्रिक समीक्षा के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 9 प्रतिशत बढ गये हैं.
राजन ने कहा कि अप्रैल में मुद्रास्फीति के समक्ष जिस जोखिम की पहचान की गई थी लगातार दूसरे वर्ष सामान्य से कम मानसून की भविष्यवाणी से संकट के बादल छा सकते हैं. उन्होंने मानसून के असफल रहने की स्थिति में संभावित मुद्रास्फीतिक प्रभाव से निपटने के लिये मजबूत खाद्य प्रबंधन पर जोर दिया.वृहद आर्थिक स्थिति के बारे में रिजर्व बैंक ने कहा कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां नरम बनी हुई है, मार्च में देश के ज्यादातर हिस्सों में बेमौसम वर्षा आलोवृष्टि से कृषि क्षेत्र की स्थिति सबसे ज्यादा निराशाजनक है.
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