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मोदी सरकार निवेश के प्रति संवेदनशील, लेकिन चमत्कार की उम्मीदें करना अव्यवहारिक : रघुराम राजन

Updated at : 20 May 2015 1:55 PM (IST)
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मोदी सरकार निवेश के प्रति संवेदनशील, लेकिन चमत्कार की उम्मीदें करना अव्यवहारिक : रघुराम राजन

न्यूयार्क : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गर्वनर रघुराम राजन ने कहा कि मोदी सरकार पिछले साल जबर्दस्त उम्मीदों के साथ सत्ता में आयी लेकिन जिस तरह से चमत्कार की उम्मीद उनसे की जा रही है. वह अव्यवहारिक है. हालांकि ,उन्होंने यह भी कहा कि सरकार निवेश का माहौल बनाने की कोशिश कर रही है […]

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न्यूयार्क : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गर्वनर रघुराम राजन ने कहा कि मोदी सरकार पिछले साल जबर्दस्त उम्मीदों के साथ सत्ता में आयी लेकिन जिस तरह से चमत्कार की उम्मीद उनसे की जा रही है. वह अव्यवहारिक है. हालांकि ,उन्होंने यह भी कहा कि सरकार निवेश का माहौल बनाने की कोशिश कर रही है और निवेशकों की चिन्ताओं के प्रति संवेदनशील है.

राजन ने कहा कि नरेन्द्र मोदी की इमेज रोनाल्ड रीगन के तरह थी जो सफेद घोड़े पर सवार होकर आएंगे और बाजार विरोधी ताकतों को खत्म कर देंगे. इस तरह की तुलना जायज नही है. राजन ने कल यहां इकॉनामिक क्लब ऑफ न्यूयार्क में अपने संबोधन के दौरान यह सारी बातें कही.
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने अपने संबोधन के दौरान देश के वित्तीय हालत पर भी चर्चा किया और कहा कि टैक्स, कारोबारी माहौल का बडा हिस्सा है और सरकार ने कहा कि वह पिछली तारीख से प्रभावी कराधान की प्रक्रिया नहीं लाएगी. राजन ने कहा हालांकि कर विभाग यदि आपको कर संबंधी मांग नोटिस भेजता है तो इस प्रक्रिया का स्वरुप अर्ध-न्यायिक होता है इसलिए इसे निपटाने के लिए अदालत से गुजरना पडता ही है. सरकार हस्तक्षेप नहीं कर सकती है. उन्होंने कहा पुराने मामले अदालतों के जरिए निपट रहे हैं जिनमें उन कानूनों पर आधारित विवाद भी शामिल हैं जो कानून में परिवर्तन से पहले के हैं. उन्होंने कहा कि कार्पोरेट कर की दर आने वाले दिनों में हर साल एक प्रतिशत रह घटेगी.
आईएमएफ के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा कि शायद भारत इन मुद्दों से निपटने में बेहतर भूमिका निभा सकता था लेकिन सरकार ने कहा है कि आने वाले दिनों में हम और इस तरह के कदम नहीं उठाएंगे. राजन ने कहा कि कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां सरकार ने अपेक्षाकृत अधिक गंभीर और महत्वपूर्ण पहल की हैं ताकि निवेशकों का भरोसा और वृद्धि बढाई जा सके. सब्सिडी के संबंध में उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल सब्सिडी खत्म हो गई. उन्होंने कहा आने वाले दिनों में सब्सिडी सीधे बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी. रसोई गैस सब्सिडी सीधे बैंक खातों में हस्तांतरित की जा रही है
राजन ने कहा रुपया अन्य मुद्राओं के मुकाबले ज्यादा मजबूत रहा. चालू खाते का घाटा इस साल चार प्रतिशत से अधिक घटकर 1.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है. यह जिक्र करते हुए राजन ने कहा कि घाटा कम हुआ है और अब ध्यान वृद्धि पर है. उन्होंने हालांकि कहा कि निवेश का रझान और निवेश गति पकड रहा है और रफ्तार तेज हुई है. राजन ने कहा कि कुछ हद तक समस्या बैंकों के कमजोर तुलना पत्र में है और आपूर्ति की कोई समस्या नहीं है क्योंकि बैंक ऋण देने के लिए तैयार हैं. सरकार बैंकों पर दबाव डाल रही है कि वे अपना तुलना पत्र ठीक करें और बैंकों के संचालन के ढांचे में सुधार करें जिनमें अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के पदों को अलग करना शामिल है. बैंकों को नए, हो सके तो प्रणाली से बाहर के भी लोगों को चेयरमैन के तौर पर चुनने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
राजन ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर व्यापक सहमति है और उन्हें उम्मीद थी कि जीएसटी विधेयक हाल में समाप्त सत्र में पारित हो जाएगा. उन्हें लगता है कि पूरी संभावना है कि यह समय पर हो जाएगा और अगले साल 31 मार्च या एक अप्रैल तक लागू हो जाएगा. राजन ने कहा दरअसल सरकार सारे तरीके अपना रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ऐसा हो जाए राजन ने कहा कि सरकार एक अन्य प्रमुख विधेयक पर ध्यान केंद्रित कर रही है और वह है भूमि अधिग्रहण विधेयक जो सार्वजनिक कार्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा विभिन्न राज्यों के अपने भूमि अधिग्रहण कानून हैं और कुछ टिप्पणीकारों ने संभावना व्यक्त की है कि राज्यों को स्वयं फैसला करना चाहिए कि अपने संबंधित भूमि अधिग्रहण प्रावधानों को कैसे लागू करना चाहिए.
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि निवेश, विशेष तौर पर मुंबई-दिल्ली औद्योगिक गलियारे और माल गलियारे में निवेश की विस्तृत योजना है. उन्होंने कहा मेरा मानना है कि चीजें हो रही हैं. राजन ने सरकार द्वारा व्यय में कटौती को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि सरकार अपने उपर जो जिम्मेदारी ले रही है उसके अलावा कुछ राजकोषीय पुनर्गठन भी हुआ है. उन्होंने कहा कि भारत में मुद्रास्फीति में तेज गिरावट आयी है और रुपया इस साल की शुरुआत से लगभग एक ही स्तर पर बरकरार है. राजन ने कहा यदि आप अन्य मुद्राओं के मुकाबले रुपया में उतार-चढाव पर नजर डालें तो आपको यह कहना पडेगा कि रुपया डॉलर के मुकाबले ज्यादा स्थिर मुद्रा है.
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