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रघुराम राजन ने बैंकों को इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर अत्यधिक वित्तपोषण के प्रति किया आगाह

Updated at : 02 Apr 2015 5:10 PM (IST)
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रघुराम राजन ने बैंकों को इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर अत्यधिक वित्तपोषण के प्रति किया आगाह

मुंबई : बैंकों को बुनियादी ढांचा क्षेत्र को अत्यधिक कर्ज देने के प्रति आगाह करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने आज कहा कि इस तरह का वित्त पोषण करते समय समग्र वित्तीय स्थिरता को ताख पर नहीं रखा जाना चाहिए. उन्होंने समग्र वित्तीय स्थिरता को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण’ बताया. रिजर्व […]

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मुंबई : बैंकों को बुनियादी ढांचा क्षेत्र को अत्यधिक कर्ज देने के प्रति आगाह करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने आज कहा कि इस तरह का वित्त पोषण करते समय समग्र वित्तीय स्थिरता को ताख पर नहीं रखा जाना चाहिए. उन्होंने समग्र वित्तीय स्थिरता को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण’ बताया. रिजर्व बैंक के परिचालन के 80 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व वित्त मंत्री अरुण जेटली की मौजूदगी में राजन ने कहा, ‘देश को बुनियादी ढांचा क्षेत्र में अत्यधिक वित्त की जरुरत है, और हमारे काफी अधिक बैंकों ने पहले ही इस क्षेत्र को अधिक ऋण दिया हुआ है. बुनियादी ढांचा क्षेत्र की कंपनियों ने भी काफी अधिक कर्ज लिया हुआ है.’

राजन ने आगाह किया कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र को वित्तपोषण से हमारी वित्तीय स्थिरता प्रभावित नहीं होनी चाहिए, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है. दिसंबर, 2014 तक बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) तीन लाख करोड रुपये से अधिक थीं. उन्‍होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के पूर्ववर्ती सरकार द्वारा आवंटित 204 कोयला खानों का आवंटन रद्द किए जाने के बाद बिजली क्षेत्र में आये संकट की वजह से बैंकों को भी काफी मुश्किल दौर से गुजरना पडा. वित्त मंत्री जेटली ने 2015-16 के बजट में बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश पर जोर देते हुए क्षेत्र के लिए आवंटन में 70,000 करोड रुपये की बढोतरी का प्रस्ताव किया है. इसके अलावा कई अन्य कदम उठाये गये हैं.

12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) में बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 1,000 अरब डालर के निवेश का लक्ष्य रखा गया है. इसमें से आधा निवेश निजी क्षेत्र से आना है. जेटली ने बुनियादी ढांचा विकास के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) माडल में नयी जान फूंकने पर भी जोर दिया है. वित्त मंत्री ने अपने समक्ष मौजूद पांच मुख्य चुनौतियों में से एक बुनियादी ढांचे को भी बताया है. राजन ने कहा कि रिजर्व बैंक व सरकार के बीच हमेशा ही रचनात्मक बातचीत होती है जिसमें दोनों समय सीमा और जोखिम को लेकर अपने अपने दृष्टिकोण से बात रखते है. इतिहास में यह दर्ज है कि, बिना नागा, सभी सरकारों ने रिजर्व बैंक की सलाह की बुद्धिमत्ता की सरहाना की है.

गवर्नर ने कहा, ‘मजबूत राष्ट्रीय संस्थानों का निर्माण काफी मुश्किल से होता है. ऐसे में मौजूदा संस्थाओं की बाहर से भी हिफाजत की जानी चाहिए तथा अंदर से इनमें नयी शक्ति पैदा की जानी चाहिए क्यों कि ऐसी संस्थाओं की संख्या बहुत कम है.’ राजन का यह बयान उन रपटों के बाद आया है जिनमें सरकारी ऋणों के प्रबंध की नयी व्यवस्था करने जैसे बजट के कुछ प्रावधानों के बारे में रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय के बीच मतभेद की बातें उठी थीं. उन्‍होंने जोर देकर कहा कि कोई भी रिजर्व बैंक की ईमानदारी पर सवाल नहीं उठा सकता. राजन ने कहा कि रिजर्व बैंक में लॉबिंग के दौरान जो सिक्का चालता है उसका नाम है गहराई व तर्क इसमें पैसा कहीं नहीं होता.

गवर्नर ने कहा कि रिजर्व बैंक ने कई मोर्चों पर सफलता हासिल की हैं. इसमें सबसे महत्वपूर्ण मोर्चा मुद्रास्फीति का मोर्चा है जिस पर अनाज की कमी, तेल कीमतें व युद्ध के बावजूद सफलता मिली है. विभिन्न प्रकार के बैंकों की शुरुआत किये जाने का उल्लेख करते हुए राजन ने कहा कि अगले साल हम कई नये प्रकार के बैंकों मसलन भुगतान बैंक, छोटे वित्त बैंक और संभवत: डाक बैंक को काम करते देखेंगे, जो अन्य बैंकों के साथ प्रतिस्पर्धा करेंगे.

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