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कल से जेब करनी पड़ेगी ढीली

Updated at : 31 Mar 2015 6:39 AM (IST)
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कल से जेब करनी पड़ेगी ढीली

सेंट्रल डेस्क एक अप्रैल यानी दुनिया के लिए मूर्ख दिवस, लेकिन यह भारतीयों की जेब खाली करनेवाला दिन होगा. वित्त वर्ष 2015-16 के बजट में प्रस्तावित कई क्षेत्रों की रियायतों में कटौतियां शुरू हो जायेंगी, तो कई वस्तुओं के दाम बढ़ जायेंगे. रेलवे प्लेटफॉर्म टिकट के दाम में छह रुपये की वृद्धि होगी, तो माल […]

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सेंट्रल डेस्क

एक अप्रैल यानी दुनिया के लिए मूर्ख दिवस, लेकिन यह भारतीयों की जेब खाली करनेवाला दिन होगा. वित्त वर्ष 2015-16 के बजट में प्रस्तावित कई क्षेत्रों की रियायतों में कटौतियां शुरू हो जायेंगी, तो कई वस्तुओं के दाम बढ़ जायेंगे. रेलवे प्लेटफॉर्म टिकट के दाम में छह रुपये की वृद्धि होगी, तो माल ढुलाई भाड़ा बढ़ जायेगा.

अहम यह कि बीते सौ सालों से ग्रामीण भारतीय के बैंक के रूप में प्रख्यात मनीऑर्डर सेवा भी बंद हो जायेगी. टेलीग्राफ के बाद डाक सेवाओं में यह दूसरी सेवा होगी, जिसे समाप्त किया जा रहा है. कुल मिला कर यह कि एक अप्रैल से जनता को अपनी जेब ढीली करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए.

प्लेटफॉर्म टिकट व माल ढुलाई होंगे महंगे : बुधवार से रेलवे स्टेशनों पर प्लेटफार्म का दाम दोगुना होकर 10 रुपये हो जायेगा. वहीं, अनाज, दालों, यूरिया, कोयला व सीमेंट की रेल से ढुलाई 10 प्रतिशत तक महंगी होने जा रही है. रेल बजट 2015-16 में मालढुलाई में बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया गया है. इसके अलावा, अब यात्रा के टिकट 120 दिन पहले बुक कराये जा सकेंगे. अभी टिकट 60 दिन पहले बुक कराये जा सकते हैं. रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेल बजट में हालांकि यात्री किरायों में बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन मालभाड़े में औसतन 3.2 फीसदी की वृद्धि की गयी है. इसका सीधा असर आवश्यक जिंसों के ग्राहकों के अलावा इस्पात व अल्युमीनियम उद्योग पर पड़ेगा. अगले वित्त वर्ष से अनाज, दालों और यूरिया की ढुलाई 10 प्रतिशत महंगी होगी.

बंद हो जायेगी मनीऑर्डर सेवा : टेलीग्राफ के बाद अब डाकघर की करीब सौ साल पुरानी मनीऑर्डर सेवा एक अप्रैल से बंद हो जायेगी. इसका मुख्य कारण शहरों के साथ-साथ गांवों में भी लोगों का मोबाइल बैंकिंग से लेकर इंटरनेट बैंकिंग पर पूरी तरह से सक्रि य होना है. डाक विभाग ने मनीऑर्डर की जगह इंस्टेंट मनी ऑर्डर सेवा शुरू की है. मनीऑर्डर सेवा के तहत जैसे ही कोई डाकघर में पैसा भेजने जाता है, तो उसे एक कोड नंबर दिया जाता है. उस कोड नंबर को दूसरी पार्टी को फोन करके बताना होता है. फिर वह व्यक्ति डाकघर में कोड बता कर पैसा हासिल कर सकता है.

बैंक वसूलेंगे अधिक शुल्क : देश के निजी बैंक ग्राहकों से अब एक अप्रैल से सेवाओं के बदले अधिक शुल्क चुकाना होगा. बचत खाते में अनिवार्य न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर पैनाल्टी भी देनी होगी. इतना ही नहीं, ग्राहकों को नयी चेक बुक लेने और खाते में नकद जमा कराने जैसी जरूरी सेवाओं के बदले भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी. देश के प्रमुख निजी बैंक आइसीआइसीआइ, एचडीएफसी, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक ने ग्राहकों से अधिक शुल्क वसूलने का खाका पहले ही तैयार कर रखा है.

बढ़ जायेगा सर्विस टैक्स : एक अप्रैल से बिजनेस क्लास में हवाई सफर करने पर अब 60 फीसदी किराये पर सेवा कर देना होगा, जबकि इकोनॉमी क्लास पर 40 फीसदी किराये पर सेवा लगेगा. इससे बिजनेस क्लास का सफर महंगा होगा. सरकारी इमारत और सरकारी मकानों के निर्माण पर अब सेवा कर का भुगतान करना होगा. एयरपोर्ट, पोर्ट के निर्माण और इसे जुड़ी गतिविधियों पर अब सेवा कर देना होगा. रेल, ट्रक या जहाज से चाय, कॉफी, चीनी, दूध के उत्पाद और खाद्य तेलों की ढुलाई पर भी सेवा कर लगेगा.

ये चीजें हो जायेंगी महंगी : खाने-पीने की चीजें, इलाज, जिम, एयर टिकट, वाई-फाई, पंडाल, फोन बिल, कैब, कूरियर, ब्यूटी पालर सेववा, रेडियो टैक्सी, रेलवे टिकट, निर्माण, प्रॉपर्टी की खरीद जैसी तमाम सेवाएं महंगी हो जायेंगी.

लागू होगी नयी विदेश व्यापार नीति

लंबे इंतजार के बाद एक अप्रैल को विदेश व्यापार नीति की घोषणा हो सकती है. इसमें मेक इन इंडिया पर खास फोकस हो सकता है. इसके साथ ही इसमें निर्यात कारोबार को आसान करने पर भी जोर दिया जा सकता है. नौ महीने के लंबे इंतजार के बाद निर्यातकों के लिए भी सरकार की ओर से विशेष घोषणा होने की संभावना है. निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जारी होनेवाली इस विदेश व्यापार नीति में बहुत कुछ खास हो सकता है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, नये निवेश करने पर खास रियायत देने और विदेशी निवेशकों को निर्यात के लिहाज से यहां फैक्टरी लगाने के लिए बढ़ावा दिया जा सकता है. इतना ही नहीं, कारोबार आसान करने की ओर कदम बढ़ाते हुए सरकार निर्यातकों के लिए लाइसेंस की शर्तों में रियायत देने और कागजी कार्रवाई कम करने पर भी जोर दे सकती है.

सरकारी कंपनियों में शुरू होगा विनिवेश

सरकार अप्रैल के दूसरे हफ्ते में ही 2015-16 का विनिवेश कार्यक्रम शुरू कर सकती है. बशर्ते, शेयर बाजार की हालत उसके लायक हो. यह अब तक का सबसे बड़ा विनिवेश कार्यक्रम हो सकता है. आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सरकार बिजली क्षेत्र और भारी उद्योग कंपनियों में से किसी एक के साथ पहला इश्यू ला सकती है.

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