बजट 2020 : पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत जिला अस्पतालों में खोले जायेंगे मेडिकल कॉलेज

नयी दिल्ली : सरकार ने योग्य चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) प्रारूप के तहत मौजूदा जिला अस्पतालों में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का प्रस्ताव किया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 का बजट पेश करते हुए कहा कि योग्य चिकित्सकों की कमी है. फिजिशियन एवं विशेषज्ञ […]
नयी दिल्ली : सरकार ने योग्य चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) प्रारूप के तहत मौजूदा जिला अस्पतालों में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का प्रस्ताव किया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 का बजट पेश करते हुए कहा कि योग्य चिकित्सकों की कमी है. फिजिशियन एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों, दोनों की.
उन्होंने कहा कि इस जरूरत को पूरा करने के लिए पीपीपी प्रारूप में मौजूदा जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज को जोड़ने का प्रस्ताव किया जाता है. वे राज्य जो अस्पताल में मेडिकल कॉलेज की सुविधा देने की पूरी इजाजत देंगे और रियायती दर पर भूमि मुहैया करने की इच्छा प्रकट करेंगे, वे व्यवहार्यता अंतराल कोष प्राप्त करने में सक्षम होंगे. योजना के ब्योरे पर काम किया जायेगा.
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार पर्याप्त क्षमता वाले बड़े अस्पतालों को प्रोत्साहित करेगी, ताकि राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड के तहत रेजीडेंट डॉक्टर डिप्लोमा और राष्ट्रीय बोर्ड (डीएनबी/एफएनबी) पाठ्यक्रम चलाये जा सके. सीतारमण ने कहा कि विदेशों में शिक्षकों, नर्सों, पारा मेडिकल स्टाफ और देखभाल करने वालों की भारी मांग है. हालांकि, उनका कौशल कई बार नियोक्ता के मानदंड से मेल नहीं खाता और इसलिए उसे सुधारे जाने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि मैं प्रस्ताव करती हूं कि स्वास्थ्य और कौशल विकास मंत्रालयों द्वारा पेशवेर संगठनों के साथ मिल कर विशेष ब्रिज कोर्स तैयार किये जाएं. उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों की भाषाई जरूरतों को भी शामिल करने की जरूरत है. इन सभी चीजों को विशेष प्रशिक्षण पैकेजों के जरिये हासिल किया जाना चाहिए.
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