आम्रपाली मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश : घर खरीदारों को कब्जा देने में देर होने पर अधिकारियों को खानी पड़ सकती है जेल की हवा

नयी दिल्ली : रियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली मामले मंगलवार को नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को साफ लहजे में चेतावनी देते हुए आदेश दिया कि अब अगर घर खरीदारों को उनके आशियाने का कब्जा देने में देर की गयी, तो अधिकारियों को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है. शीर्ष अदालत ने दोनों प्राधिकरणों […]
नयी दिल्ली : रियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली मामले मंगलवार को नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को साफ लहजे में चेतावनी देते हुए आदेश दिया कि अब अगर घर खरीदारों को उनके आशियाने का कब्जा देने में देर की गयी, तो अधिकारियों को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है. शीर्ष अदालत ने दोनों प्राधिकरणों को आदेश दिया है कि वे आम्रपाली में घर के खरीदारों के फ्लैट्स के पंजीकरण का काम शुरू कर दें. इसके साथ ही, अदालत ने मामले में देर करने को लेकर प्राधिकरण को फटकार भी लगाया.
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अदालत का रुख देखते हुए प्राधिकरण ने कहा कि आम्रपाली के घर खरीदारों से जुड़े मामलों के लिए स्पेशल सेल बनायी जा चुकी है. उन्होंने अदालत को भरोसा दिया कि आदेश का पालन करने के लिए अधिकारी नियुक्त किये गये हैं. सुप्रीम कोर्ट में 24 जुलाई को हुई सुनवाई के बाद से खरीदार असमंजस में पड़े थे. सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली के सभी परियोजनाओं से बिल्डर का अधिकार खत्म कर दिया है और इस अधिकार की जिम्मेदारी कोर्ट रिसीवर को दे दी गयी.
साथ ही अदालत ने प्राधिकरण को आदेश दिया था कि दोनों प्राधिकरण पैसों के कारण जिन परियोजनाओं के क्लियरेंस सर्टिफिकेट जारी करने होंगे. अदालत का कहना था कि प्राधिकरण अपना पैसा बिल्डर की निजी संपत्ति बेचकर वसूले. अधूरे परियोजनाओं को पूरा करने का काम एनबीसीसी करेगा. अदालत के इस फैसले से खरीदारों के मन में कई सवाल भी पैदा हुए थे. इस दौरान आम्रपाली के खरीदारों ने अर्जी दाखिल कर कहा कि बदले परिस्थितियों में उन्हें जो बकाया राशि देनी है, उसे बैंक किस तरह जारी करे, यह भी स्पष्ट होना चाहिए.
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