दिल्ली हाईकोर्ट ने पॉलिसी बाजार पर लगाया 10 लाख रुपये का जुर्माना

नयी दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने बीमा कंपनियों को ऑनलाइन जोड़ने का मंच उपलब्ध कराने वाली कंपनी पॉलिसी बाजार पर 10 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है. यह कार्रवाई एक बीमा कंपनी के खिलाफ पॉलिसी बाजार के ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में एक तरफा स्थगन आदेश प्राप्त करने की खातिर तथ्य छिपाने के लिए की गयी […]
नयी दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने बीमा कंपनियों को ऑनलाइन जोड़ने का मंच उपलब्ध कराने वाली कंपनी पॉलिसी बाजार पर 10 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है. यह कार्रवाई एक बीमा कंपनी के खिलाफ पॉलिसी बाजार के ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में एक तरफा स्थगन आदेश प्राप्त करने की खातिर तथ्य छिपाने के लिए की गयी है.
हाईकोर्ट ने ऑनलाइन पॉलिसी बेचने वाली एको जनरल इंश्योरेंस पर किसी भी रूप में ‘पॉलिसी बाजार’ ट्रेड मार्क का इस्तेमाल करने या गूगल पर इस तरह के या इससे मिले-जुले शब्दों या एडवर्ड/‘कीवर्ड’ प्रोग्राम के उपयोग पर रोक लगा दी थी. एको जनरल इंश्योरेंस ने अदालत के समक्ष अपने आवेदन में 16 मई के आदेश पर रोक लगाने का आग्रह करते हुए कहा कि पॉलिसी बाजार ने एकतरफा अंतरिम रोक आदेश प्राप्त करने को लेकर तथ्यों को छिपाया है.
कंपनी ने न्यायाधीश संजीव नरूला के सामने कहा कि पॉलिसी बाजार ने अदालत में आकर एको के खिलाफ अपने नाम/निशान का उपयोग ‘कीवर्ड’ के रूप में करने का आरोप लगाया था, जबकि वह (पॉलिसी बाजार) स्वयं उसी (बीमा कंपनी) के नाम से यही चीज कर रही थी. बीमा कंपनी ने दावा किया कि पॉलिसी बाजार उसके नाम को ‘कीवर्ड’ के रूप में उपयोग कर रही थी. इसीलिए जब कभी कोई ‘एको’ को तलाश करता, उसे प्रायोजित लिंक के रूप में उसकी वेबसाइट दिखती थी.
पॉलिसी बाजार ने इसे स्वीकार किया, लेकिन अदालत को बताया कि उसने 23 अप्रैल, 2019 से ऐसा करना बंद कर दिया. हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि वादी से यह अपेक्षा थी कि वह मामले में वास्तविक तथ्यों को रखता. न्यायाधीश ने कहा कि आवेदन में आज जो बातें कही गयी हैं, उससे यह उभरकर सामने आता है कि वादी स्वयं उन गतिविधियों में शामिल थी, जिसकी उसने मौजूदा मामले में शिकायत की.
अदालत ने कहा कि मामले में रोक के लिए प्रासंगिक तथ्यों को छिपाने को कहीं से भी जायज नहीं ठहराया जा सकता. अदालत ने पॉलिसी बाजार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया. आदेश में 5 लाख रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष तथा 5 लाख रुपये दिल्ली कानूनी सहायता सेवा प्राधिकरण के पास जमा करने को कहा गया. साथ ही, मामले में 11 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई तक रोक के अंतरिम आदेश को निलंबित कर दिया गया.
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