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भारत ने कहा, WTO की विवाद सुलझाने की प्रणाली के ठप्प होने से प्रभावित हो रहा विकासशील देशों का हित

Updated at : 13 May 2019 5:31 PM (IST)
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भारत ने कहा, WTO की विवाद सुलझाने की प्रणाली के ठप्प होने से प्रभावित हो रहा विकासशील देशों का हित

नयी दिल्ली : भारत ने सोमवार को कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की विवाद सुलझाने की प्रणाली के अपीलीय निकाय के ठप्प होने तथा डब्ल्यूटीओ में सुधार के लिए कुछ विकसित देशों के असंतुलन पैदा करने वाले एजेंडा से विकासशील देशों का हित प्रभावित हो सकता है. भारत ने डब्ल्यूटीओ के 22 सदस्य देशों […]

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नयी दिल्ली : भारत ने सोमवार को कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की विवाद सुलझाने की प्रणाली के अपीलीय निकाय के ठप्प होने तथा डब्ल्यूटीओ में सुधार के लिए कुछ विकसित देशों के असंतुलन पैदा करने वाले एजेंडा से विकासशील देशों का हित प्रभावित हो सकता है. भारत ने डब्ल्यूटीओ के 22 सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की यहां हुई बैठक में यह मुद्दा उठाया.

इसे भी देखें : WTO की मई में होने वाली बैठक में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों की घोषणा कर सकते हैं 25 सदस्य देश

गौरतलब है कि अमेरिका ने इसके सदस्यों की नियुक्ति में अड़ंगा लगाया हुआ है. निकाय के कार्य करने के लिए कम से कम तीन सदस्य होने अनिवार्य हैं और 10 दिसंबर के बाद यह स्थिति भी नहीं रहेगी. इससे 10 दिसंबर के बाद निकाय की कार्यप्रणाली ठप्प हो जायेगी. वाणिज्य सचिव अनूप वधावन ने उद्घाटन सत्र में कहा कि कुछ देशों द्वारा एकपक्षीय कदम उठाने तथा जवाबी कार्रवाइयों के कारण बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के समक्ष अस्तित्व की चुनौतियां हैं.

उन्होंने कहा कि व्यापार वार्ताओं के अटकने तथा डब्यूटीओ अपीलीय मंच के सदस्यों की नियुक्तियों में गतिरोध से चुनौतियां खड़ी हो गयी हैं. एक आधिकारिक बयान में वधावन के हवाले से कहा गया कि अपीलीय निकाय का ठप्प हो जाना डब्ल्यूटीओ की विवाद सुलझाने की व्यवस्था तथा इसकी क्रियान्वयन प्रणाली के लिए गंभीर जोखिम है.

उन्होंने कहा कि व्यापार में संरक्षणवादी उपायों के बढ़ने से वैश्विक आर्थिक वातावरण बिगड़ रहा है और यह स्थिति सबसे अल्प विकसित देशों समेत सभी विकासशील देशों के लिए ठीक नहीं है. वधावन ने कहा कि डब्ल्यूटीओ के अपीलीय निकाय के सदस्यों की नियुक्ति के ऊपर गतिरोध से भारत जैसे विकासशील देश और सबसे कम विकसित देशों को अधिक नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि प्रणाली को बचाये रखने के लिए रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ने तथा समस्या का रचनात्मक समाधान लाने की तत्काल जरूरत है.

वधावन ने कहा कि डब्ल्यूटीओ की स्थिति से इस संगठन में सुधार की बातचीत जोर पकड़ रही है, लेकिन दुर्भाग्य से इसमें संतुलन का पूरा अभाव है. उन्होंने कहा कि सुधार के एजेंडे में विकासशील देशों की चिंताओं पर गौर नहीं किया गया है. ऐसा कोई भी एजेंडा भेदभाव से मुक्त होना चाहिए और सुधार आपसी विश्वास के आधार पर होने चाहिए. इनसे वर्तमान समझौते में पहले से चले आ रहे असंतुलनों और विषमताओं का समाधान होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि विकासशील देशों के लिए कृषि सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है, लेकिन इस क्षेत्र में अब तक हुई सहमतियों और निर्णयों को बिल्कुल पीछे धकेलने का प्रयास चल रहा है. उन्होंने कहा कि डब्ल्यूटीओ वार्ता के विषय में अल्प विकसित और विकासशील देशों के हित के विषयों पर कोई बात या प्रगति नहीं हो रही हैं. उन्होंने विकसित और विकासशील देशों को मिलकर काम करने को कहा, ताकि मछली उद्योग को सब्सिडी के बारे में एक निष्पक्ष और न्यायोचित समझौता हो सके.

इस सम्मेलन में चीन, ब्राजील, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, बांग्लादेश और मलेशिया सहित कुल 16 विकासशील और 6 विकसित देश भाग ले रहे हैं. बैठक में डब्ल्यूटीओ के महानिदेशक रोबर्तो एजेवेदो भी भाग ले रहे हैं.

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