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चुनाव आयोग पुनिरीक्षण के फैसले के खिलाफ प्रशांत भूषण ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा 

Updated at : 05 Jul 2025 1:23 PM (IST)
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ADR

ADR: सुप्रीम कोर्ट में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने एक याचिका दायर की है, जिसमें 25 जून को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें बिहार में वोटर लिस्ट का एक "स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन" यानी विशेष गहन पुनरीक्षण करने को कहा गया है.

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Alternative dispute resolution (ADR) के जरिए सीनियर वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के मतदाता सूची पुनिरीक्षण के फैसले के खिलाफ पिटीशन फाइल की है. ADR के अनुसार आदेश मनमाना और असंवैधानिक है. इससे लाखों लोगों के वोटर लिस्ट से बाहर होने का खतरा बन गया है. इस आदेश के अनुसार जिन लोगों के नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं हैं, उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने के लिए स्पेशल डॉक्युमेंट्स देने होंगे. पिटीशन में कहा गया है कि यह नियम संविधान के आर्टिकल 14, 19, 21, 325 और 326 के साथ-साथ Representation of the People Act, 1950 और वोटर रजिस्ट्रेशन रूल्स, 1960 के नियम 21A का भी उल्लंघन करता है. 

ADR ने क्या कहा ? 

ADR का कहना है कि अगर इस आदेश को रद्द नहीं किया गया तो बिना किसी उचित प्रक्रिया के लाखों लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा. इससे निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव की मूल भावना को ठेस पहुंचेगी और मूल संवैधानिक ढांचे को नुकसान होगा. 

चुनाव आयोग ने मांगे सख्त कागजात 

याचिका में ये भी आरोप लगाया गया है कि ECI ने नागरिकता साबित करने के लिए बहुत सख्त डॉक्युमेंट्स मांगे हैं, लेकिन उन्हें जमा करने के लिए लोगों को पर्याप्त समय और सुविधा नहीं दी गई. इससे लाखों असली वोटरों के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं. ADR ने यह भी कहा है कि ECI ने नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी सरकार से हटाकर आम लोगों पर डाल दी है। आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे सामान्य पहचान पत्रों को न मानने से गरीब और वंचित वर्ग ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि उनके पास अक्सर जरूरी दस्तावेज नहीं होते।

चुनाव से पहले पुनिरीक्षण अनुचित 

याचिका में यह भी कहा गया है कि इस प्रक्रिया में लोगों को सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि अपने माता-पिता की नागरिकता भी साबित करनी होगी, जो कि संविधान के आर्टिकल 326 के खिलाफ है. अगर वे ऐसा नहीं कर पाए, तो उनके नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए जाएंगे या नाम ही दर्ज नहीं हो पाएगा. इसके अलावा, ADR ने यह भी कहा है कि बिहार में नवंबर 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं, और चुनाव से ठीक पहले इस तरह का रिवीजन करना अव्यवस्थित और अव्यवहारिक है. खासकर अनुसूचित जाति, जनजाति और प्रवासी मजदूरों जैसे लोगों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं होते, जिससे वे वोट देने के हक से वंचित हो सकते हैं. 

Also Read: चुनाव आयोग से मिले 11 दलों के प्रतिनिधि, बोले- मतदाता पुनरीक्षण के फैसले पर फिर से विचार करे आयोग

कई लोग नहीं दे पा रहे कागज 

ADR का अनुमान है कि इस आदेश के कारण करीब 3 करोड़ लोग, खासकर गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदाय, अपने वोटिंग अधिकार से हाथ धो सकते हैं। उन्होंने बिहार से मिल रही शुरुआती रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि गांवों और गरीब तबके के कई लोग ECI के मांगे गए डॉक्युमेंट्स नहीं दे पा रहे हैं. 

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Nishant Kumar

लेखक के बारे में

By Nishant Kumar

Nishant Kumar: निशांत कुमार पिछले तीन सालों से डिजिटल पत्रकारिता कर रहे हैं. दैनिक भास्कर के बाद राजस्थान पत्रिका के डिजिटल टीम का हिस्सा रहें. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के नेशनल-इंटेरनेशनल और स्पोर्ट्स टीम में काम कर रहे हैं. किस्सागोई हैं और देश-विदेश की कहानियों पर नजर रखते हैं. साहित्य पढ़ने-लिखने में रुचि है.

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