Madhubani News: नगर निगम का 3.62 करोड़ फंसा, टैक्स वसूली वाले विभागों पर गिरेगी गाज

Published by :Purushottam Kumar
Published at :09 May 2026 12:14 PM (IST)
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सांकेतिक तस्वीर

Madhubani News: मधुबनी नगर निगम की टैक्स वसूली रिपोर्ट में बड़ा खुलासा। सरकारी विभागों की लापरवाही से होल्डिंग टैक्स वसूली महज 15.51% पर सिमटी। निगम का कुल 3.62 करोड़ रुपये का राजस्व फंसा, अब वसूली के लिए कड़े कदम उठाने की तैयारी। जानिए खबर विस्तार से…

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 Madhubani News: नगर निगम मधुबनी के लिए पिछला वित्तीय वर्ष टैक्स वसूली के लिहाज से मिला-जुला रहा. जहाँ एक ओर आम नागरिकों ने निजी होल्डिंग टैक्स और कचरा संग्रहण शुल्क जमा करने में उत्साह दिखाया, वहीं सरकारी विभागों की उदासीनता ने निगम की कमर तोड़ दी है. सरकारी महकमों ने कुल मांग का मात्र 15.51% टैक्स ही जमा किया है, जो निगम की वित्तीय स्थिति के लिए चिंता का विषय है.

वसूली का गणित: लक्ष्य और उपलब्धि

नगर निगम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष में कुल मांग 9.19 करोड़ रुपये थी (जिसमें 3.12 करोड़ पिछला अवशेष और 6.06 करोड़ चालू वर्ष की मांग शामिल थी). हालांकि, वर्ष समाप्ति तक निगम केवल 5.56 करोड़ रुपये ही वसूल सका. अब भी 3.62 करोड़ रुपये की वसूली शेष है.

सरकारी विभाग फिसड्डी, आम जनता आगे

निगम की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:

सरकारी होल्डिंग टैक्स: 67.15 लाख की मांग के विरुद्ध मात्र 10.41 लाख की वसूली हुई.

निजी संपत्ति कर: आम जनता ने 81.97% टैक्स जमा किया. 3.79 करोड़ की मांग के मुकाबले 3.13 करोड़ वसूले गए.

कचरा संग्रहण (डोर-टू-डोर): इसमें सबसे शानदार 98.53% वसूली रही. 1.33 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 1.31 करोड़ प्राप्त हुए.

इन मदों में भी रही निराशा

ट्रेड लाइसेंस और नल-जल शुल्क की स्थिति भी काफी खराब है. ट्रेड लाइसेंस मद में मात्र 19.25% वसूली हुई, जबकि नल-जल शुल्क में लक्ष्य का केवल 3.52% ही जमा हो सका. 91.25 लाख रुपये की मांग के मुकाबले महज 3.22 लाख रुपये ही निगम के खाते में आए.

मेयर का पक्ष:

मेयर अरुण राय ने कहा कि निजी होल्डिंग और कचरा संग्रहण में वसूली संतोषजनक है. सरकारी विभागों से टैक्स न मिलना निराशाजनक है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कम वसूली वाले मदों में तेजी लाएं ताकि चालू वित्तीय वर्ष (2025-26) के लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जा सके.

मधुबनी से अशोक ठाकुर की रिपोर्ट

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