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Purnea: सभा में जुटी महिलाओं की भीड़ लेकिन प्रशांत किशोर को नहीं पहचान पाई

Updated at : 21 Aug 2025 6:11 PM (IST)
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Purnea

Purnea News: पूर्णिया जिले के कसबा विधानसभा के गढ़बनैली में जनसुराज पार्टी की बदलाव रैली में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं. हालांकि, अधिकांश को यह तक नहीं पता था कि मंच पर भाषण प्रशांत किशोर दे रहे हैं. कई महिलाएं और स्थानीय लोग नेता को पहचान नहीं पाए. पार्टी की महिला नेता ने इसे अशिक्षा का परिणाम बताया.

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Purnea: जनसुराज पार्टी की ओर से बिहार के पूर्णिया जिले के कसबा विधानसभा के गढबनैली में आयोजित बिहार बदलाव रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. खास बात यह रही कि इस जनसभा में महिलाओं की उपस्थिति सबसे अधिक रही, जो कि राजनीतिक दृष्टिकोण से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. हालांकि, इस उत्साहपूर्ण भागीदारी के बीच एक चौंकाने वाली सच्चाई भी सामने आई. अधिकांश लोगों को यह ही नहीं पता था कि मंच पर भाषण देने वाले नेता कौन थे.

महिलाओं ने क्या कहा ?  

रैली में आईं महिलाओं ने भाषण तो सुना लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि नेता का नाम क्या है और वे किस पार्टी से हैं. कई महिलाओं ने कहा कि उन्होंने प्रशांत किशोर का नाम तो सुना है लेकिन वे उन्हें पहचान नहीं पाईं. कुछ ने कहा कि जो बोले वो अच्छा बोले, परंतु पार्टी का नाम तक नहीं पता. बीबी रबीना खातून, पूर्णिया की एक महिला ने कहा, “हमने तो भाषण सुन लिया लेकिन नेता का नाम नहीं पता.” इसी तरह हीना खातून (कसबा) ने भी यही बात दोहराई, “हां, भाषण तो अच्छा था, पर किसका था ये नहीं मालूम. जनसुराज पार्टी सुनी है लेकिन नेता का नाम नहीं पता.”

दुकानदार नहीं बात पाए नेता का नाम 

मंच पर प्रशांत किशोर खुद मौजूद थे और उन्होंने ही भाषण दिया था लेकिन यह जानकारी वहां मौजूद अधिकांश लोगों को नहीं थी. कुछ लोगों को पार्टी का नाम तो मालूम था लेकिन प्रमुख नेता के नाम से वे अनभिज्ञ थे. स्थानीय दुकानदार रतन ठाकुर और मो. इमाम, सभा में कौन बोल रहा था और किस पार्टी का कार्यक्रम था वो नाम नहीं बता पाए और न ही नेता की पहचान कर सके. 

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जनसुराज की महिला नेता ने क्या कहा ? 

हालांकि, कुछ महिलाओं ने जनसुराज और प्रशांत किशोर का नाम जरूर लिया, लेकिन जब यह पूछा गया कि आज यहां कौन भाषण देने आया है, तो वे भी भ्रमित नजर आईं. इस स्थिति पर जनसुराज पार्टी की महिला नेता लक्ष्मी कुमारी ने कहा, “यह अशिक्षा का ही प्रभाव है. ये महिलाएं प्रशांत किशोर को नाम से जानती हैं, लेकिन पहचानती नहीं. यही तो हमारी लड़ाई है. पिछले 35 वर्षों में बिहार को क्या मिला? अब इस स्थिति को बदलने के लिए जनसुराज पार्टी सामने आई है.”

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Nishant Kumar

लेखक के बारे में

By Nishant Kumar

Nishant Kumar: निशांत कुमार पिछले तीन सालों से डिजिटल पत्रकारिता कर रहे हैं. दैनिक भास्कर के बाद राजस्थान पत्रिका के डिजिटल टीम का हिस्सा रहें. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के नेशनल-इंटेरनेशनल और स्पोर्ट्स टीम में काम कर रहे हैं. किस्सागोई हैं और देश-विदेश की कहानियों पर नजर रखते हैं. साहित्य पढ़ने-लिखने में रुचि है.

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