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Bihar Elections 2025: ऐन वक्त पर CM नीतीश ने बदली बाहुबली के बेटे की सीट, सता रहा था हारने का डर 

Updated at : 16 Oct 2025 3:12 PM (IST)
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Chetan Anand

Chetan Anand

Bihar Elections 2025: सूत्रों के मुताबिक जेडीयू के नेताओं को इस बात का डर सता रहा था कि अगर पार्टी ने इस बार चुनाव में चेतन आनंद को शिवहर से उम्मीदवार बनाया गया तो तो उन्हें लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है. क्योंकि पिछला चुनाव उन्होंने राजद के टिकट पर लड़ा था और बाद में JDU के साथ हो गए थे.

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Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जनता दल यूनाइटेड ने बुधवार को अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की. इस लिस्ट में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद की सीट को लेकर था. दरअसल, चेतन शिवहर सीट से 2020 में राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर विधायक बने थे. लेकिन 2024 में वह पाला बदलकर JDU में आ गए थे. ऐसे में पार्टी ने उन्हें इस बार शिवहर की जगह औरंगाबाद के नबीनगर सीट से उम्मीदवार बनाया है. 

JDU को सता रहा था चेतन के हार का डर

सूत्रों के मुताबिक जेडीयू के नेताओं को इस बात का डर था कि अगर पार्टी ने चेतन को उम्मीदवार बनाया तो उन्हें लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है. क्योंकि पिछला चुनाव उन्होंने राजद के टिकट पर लड़ा था और बाद में JDU के साथ हो गए थे. इस वजह से पार्टी ने उनकी सीट को बदल दिया. बताया जा रहा है कि चेतन की जीत को सुनिश्चित करने के लिए खुद सीएम ने अपने बड़े नेताओं को टास्क दे रखा है. बता दें कि चेतन की मां और शिवहर से जदयू की सांसद  लवली आनंद 1996 में पहली बार इसी सीट से विधायक बनी थीं. हालांकि इससे पहले वह 1994 में वैशाली सीट से उप-चुनाव जीतकर सांसद बन चुकी थीं.  

2020 में RJD के साथ था आनंद परिवार 

2019 के लोकसभा और 2020 के विधानसभा चुनाव में आनंद मोहन का परिवार राष्ट्रीय जनता दल के साथ था. 2019 के लोकसभा चुनाव में लवली ने राजद के टिकट पर सहरसा से चुनाव भी लड़ा. लेकिन बीजेपी उम्मीदवार से उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था. हालांकि 2020 के विधानसभा चुनाव में चेतन शिवहर विधानसभा से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के टिकट पर विधायक बने. 

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1990 में पहली बार महिषी से विधायक बने थे आनंद मोहन  

आनंद मोहन 1990 में पहली बार सहरसा जिले की महिषी सीट से विधायक बने थे और तब उस इलाके में पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव से अपने झगड़े को लेकर अगड़ों के नेता के तौर पर उभरे थे. 1996 और 1998 में दो बार वो शिवहर लोकसभा सीट से सांसद बने. मुजफ्फरपुर में गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया की 1994 में मॉब लिंचिंग केस में फंसने के बाद आनंद और उनके परिवार पर राजनीतिक संकट छा गया. 2005 में लवली जेडीयू के टिकट पर बाढ़ सीट से एक बार जीती थीं. लेकिन वह विधानसभा कुछ महीने में ही भंग हो गई.

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Prashant Tiwari

लेखक के बारे में

By Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.

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