छपरा सदर अस्पताल में इमरजेंसी सेवाओं के लिए एसओपी लागू, तीन श्रेणियों में होगा मरीजों का इलाज

Author Karuna Tiwari|Edited by Karuna Kumari
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Chhapra News: छपरा सदर अस्पताल में इमरजेंसी सेवाओं के लिए एसओपी लागू, तीन श्रेणियों में होगा मरीजों का इलाज

इमरजेंसी विभाग में नई व्यवस्था लागू Chhapra News: (चंद्रशेखर की रिपोर्ट) छपरा के सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में पहल शुरू हो गयी है. इस नई व्यवस्था का उद्देश्य मरीजों को समयबद्ध और व्यवस्थित उपचार उपलब्ध कराना है. उपाधीक्षक […]

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इमरजेंसी विभाग में नई व्यवस्था लागू

Chhapra News: (चंद्रशेखर की रिपोर्ट) छपरा के सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में पहल शुरू हो गयी है. इस नई व्यवस्था का उद्देश्य मरीजों को समयबद्ध और व्यवस्थित उपचार उपलब्ध कराना है.

उपाधीक्षक ने किया निरीक्षण और दिया प्रशिक्षण

इस क्रम में उपाधीक्षक डॉ. केएम दुबे ने इमरजेंसी विभाग का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया. उन्होंने संबंधित कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए एसओपी के तहत प्रशिक्षण भी दिया, ताकि सभी कर्मचारी नई प्रणाली के अनुसार कार्य कर सकें.

गंभीरता के आधार पर तीन श्रेणियों में इलाज

एसओपी लागू होने के बाद मरीजों के इलाज के लिए ट्रायज प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू किया गया है. इसके तहत मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार रेड (गंभीर), येलो (मध्यम) और ग्रीन (सामान्य) श्रेणियों में विभाजित किया जाता है.

अलग-अलग समय सीमा में होगा उपचार

रेड श्रेणी के मरीजों का तुरंत इलाज शुरू किया जाता है. येलो श्रेणी के मरीजों को 10 से 15 मिनट के भीतर उपचार देने का प्रावधान है, जिसमें सांस की तकलीफ, तेज बुखार या फ्रैक्चर जैसे मामले शामिल हैं. वहीं ग्रीन श्रेणी के मरीजों का इलाज 30 से 60 मिनट के भीतर किया जाता है, जिनमें सामान्य बुखार या मामूली चोट के मामले होते हैं.

नर्सिंग स्टाफ की भूमिका भी तय

नई व्यवस्था में नर्सिंग स्टाफ की जिम्मेदारी भी स्पष्ट की गई है. वे मरीजों के महत्वपूर्ण शारीरिक संकेतों की जांच करते हैं, उनकी निगरानी रखते हैं, डॉक्टर को सूचित करते हैं और प्राथमिक उपचार शुरू करते हैं. सामान्य मरीजों को बाह्य रोगी विभाग की तरह प्रबंधित कर प्रतीक्षा कक्ष में भेजा जाता है.

प्रवेश द्वार पर स्क्रीनिंग और त्वरित पंजीकरण

ट्रायज प्रक्रिया के तहत इमरजेंसी प्रवेश द्वार पर स्क्रीनिंग नर्स की तैनाती की गई है, जो मरीज के श्वसन, रक्त प्रवाह और चेतना स्तर की जांच करती है. एक से दो मिनट के भीतर मरीज को श्रेणी में रखकर टैग किया जाता है और इमरजेंसी रजिस्टर में प्रविष्टि दर्ज की जाती है.

नई व्यवस्था से सेवाएं हुईं तेज और पारदर्शी

इस नई प्रणाली के लागू होने से इमरजेंसी सेवाओं में तेजी, पारदर्शिता और उपचार की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जिससे मरीजों को काफी सहूलियत मिल रही है.

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Karuna Tiwari

लेखक के बारे में

By Karuna Tiwari

करुणा तिवारी पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की. 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है. अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं.

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