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Bihar Politics: संतोष सुमन का लालू यादव पर बड़ा हमला, बोले- राजद कांग्रेस की सरकार ने किया मिथिला को उद्योगविहीन

Updated at : 04 Jul 2025 7:57 AM (IST)
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Bihar Politics: संतोष सुमन का लालू यादव पर बड़ा हमला, बोले- राजद कांग्रेस की सरकार ने किया मिथिला को उद्योगविहीन

मंत्री संतोष सुमन

Bihar Politics: हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष सुमन ने कहा कि कांग्रेस-राजद राज में सबसे बुरी स्थिति मिथिला की रही. कभी यहां की सकरी और रैयाम चीनी मिलों का नाम था.

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Bihar Politics: पटना. हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष सुमन ने कहा है कि राजद-कांग्रेस के शासनकाल (1981-2005) के 25 वर्षों में ‘चीनी का कटोरा’ कहे जानेवाले उत्तर बिहार में आधा दर्जन चीनी मिलें एक-एक कर बंद हो गईं. जंगल राज में भय व दहशत से उद्योगपतियों का बड़ी संख्या में बिहार से पलायन हुआ. उन्होंने कहा कि कांग्रेस-राजद राज में सबसे बुरी स्थिति मिथिला की रही. कभी यहां की सकरी और रैयाम चीनी मिलों का नाम था.

एक एक कर बंद हुई सारी चीनी मिलें

संतोष सुमन ने कहा कि 1993 में सकरी और एक साल बाद 1994 में रैयाम में तालाबंदी हो गई. मुजफ्फरपुर की मोतीपुर चीनी मिल में सन् 1997 से पेराई ठप हो गई. समस्तीपुर जिला मुख्यालय स्थित चीनी मिल में 1985 (कांग्रेस के शासनकाल) से ताला बंद है. चीनी का कटोरा कहे जानेवाले इलाके के लोग आज दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए जाने को मजबूर हैं. पूरा इलाका उद्योगविहीन हो गया. उन्होंने पूछा है कि राजद को बताना चाहिए कि यह किसका कार्यकाल था.

मिथिला जैसा किया चंपारण का भी हाल

संतोष सुमन ने कहा कि एक जमाने में उत्तर बिहार में 16 चीनी मिलें चलती थीं, उनमें से 7 लालू-राबड़ी के राज में बंद हुईं। मिलें बंद होने का असर न सिर्फ रोजगार पर पड़ा, बल्कि लाखों किसान नकदी फसल की खेती से अलग हो गए. चंपारण में भी सात चीनी मिलें राजद और कांग्रेस के राज में तालाबंदी का शिकार हुई. पश्चिम चंपारण में नरकटियागंज, लौरिया, मझौलिया, चनपटिया, बगहा और रामनगर में कुल छह चीनी मिलें थीं. चनपटिया चीनी मिल वर्ष 1994 से बंद है। मधुबनी की लोहट चीनी मिल भी जंगल राज के दहशत के दौर में 1996 में जो बंद हुई, आज तक बंद है.

मजदूर और किसान पलायन को मजबूर

मंत्री ने कहा कि राजद के दहशत भरे राज में अपराध, भ्रष्टाचार, फिरौती के लिए अपहरण और लूट-खसोट से जहां बिहार के लोग तबाह थे, वहीं चीनी मिलों की बंदी ने लाखों गन्ना किसानों व मिलों में कार्यरत करीब एक लाख कामगारों के परिजनों को भुखमरी के गर्त में धकेल दिया. कभी चीनी का कटोरा रहे इन इलाकों में कांग्रेस और राजद की सरकार ने किसानों और मजदूरों को कटोरा पकड़ा दिया. आज उसी राजद, कांग्रेस को उद्योग, पलायन, रोजगार व किसानों की बातें करते हुए शर्म भी नहीं आ रही है. इन्हें जनता से माफी मांगनी चाहिए.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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