'घुटने के नीचे मारनी थी गोली, जांघ और पेट में क्यों मारी?' भरत तिवारी के एनकाउंटर पर ग्रामीणों ने उठाए कई सवाल
भरत तिवारी के गांव के लोगों ने उठाए कई सवाल
Bharat Tiwari Encounter: आरा में भरत तिवारी के एनकाउंटर के बाद ग्रामीणों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है. गांव वालों का दावा है कि भरत ने सरेंडर कर दिया था, फिर भी उसे कई गोलियां मारी गईं. लोगों का कहना है कि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
Bharat Tiwari Encounter : आरा में पुलिस मुठभेड़ के दौरान घायल हुए भरत तिवारी की मौत के बाद गांव में गुस्सा बढ़ता जा रहा है. परिजनों के बाद अब ग्रामीण भी खुलकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं. उनका दावा है कि भरत ने सरेंडर कर दिया था, इसके बावजूद उसे कई गोलियां मारी गईं. घटना के बाद गांव में विरोध प्रदर्शन हुआ और लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई.
‘सरेंडर के बाद गोली चलाने की क्या जरूरत थी?’
ग्रामीणों का कहना है कि यदि भरत ने हथियार छोड़ सरेंडर कर दिया था, तो उसके बाद गोली चलाने का औचित्य क्या था. एक ग्रामीण ने कहा कि एनकाउंटर की स्थिति में भी नियमों का पालन किया जाता है. लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ. लोगों का आरोप है कि भरत को जरूरत से ज्यादा गोलियां मारी गईं.
‘ऑपरेशन लंगड़ा में घुटने के ऊपर गोली नहीं मारी जाती’
प्रदर्शन में शामिल एक ग्रामीण ने कहा कि पुलिस के ऑपरेशन लंगड़ा के तहत आमतौर पर घुटने के नीचे गोली मारी जाती है, ताकि आरोपी को पकड़ा जा सके. ग्रामीणों का दावा है कि भरत को घुटने के ऊपर जांघ में गोली लगी. इसके अलावा पेट के निचले हिस्से में भी गोली लगने की बात कही जा रही है. इसी को लेकर लोग कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं.
‘भरत का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था’
गांव के लोगों का कहना है कि भरत तिवारी का कोई बड़ा आपराधिक इतिहास नहीं था. वह अक्सर स्थानीय मुद्दों को उठाता था और लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश करता था. ग्रामीणों का दावा है कि वह समाज सेवा से जुड़े काम करता था. इसलिए उसकी मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है.
सड़क पर उतरा गांव, न्याय की मांग
भरत की मौत के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर उतर आए. लोगों ने शव रखकर आरा-बक्सर फोरलेन को जाम कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. यदि कहीं कोई गलती हुई है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए.
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पुलिस का दावा कुछ और
दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी. जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ और बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. हालांकि ग्रामीण पुलिस के इस दावे से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि सच्चाई सामने लाने के लिए पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है.
गांव में अब भी तनाव का माहौल
घटना के बाद से गांव में तनाव बना हुआ है. ग्रामीण लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं और प्रशासन से जवाब चाहते हैं. अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और भरत तिवारी की मौत को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कैसे मिलता है.
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By Abhinandan Pandey
अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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