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बायीं के बदले दायीं तरफ धड़क रहा नवजात का दिल, JLNMCH के नीकू वार्ड में कराया गया भर्ती

Updated at : 07 Dec 2020 6:29 AM (IST)
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बायीं के बदले दायीं तरफ धड़क रहा नवजात का दिल, JLNMCH के नीकू वार्ड में कराया गया भर्ती

जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में एक ऐसे बच्चे ने जन्म लिया है जिसका दिल दायीं तरफ धड़क रहा है. सामान्य तौर पर दिल बायीं ओर होता है. मेडिकल के लिहाज से यह मामला इसलिए भी दुर्लभ है कि अभी तक इस नवजात को कोई गंभीर समस्या नहीं हुई है. ऑक्सीजन की कमी के कारण नवजात को अस्पताल के नीकू वार्ड में भर्ती कराया गया है. जहां डॉक्टर लगातार इसकी सेहत पर नजर रख रहे हैं. मेडिकल भाषा में इसे डेस्ट्राकार्डिया ओ के नाम से जाना जाता है. इस तरह का मामला 1000 बच्चों में किसी एक का होता है. यह जन्म जांच विकृति के रूप में देखा जाता है.

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जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में एक ऐसे बच्चे ने जन्म लिया है जिसका दिल दायीं तरफ धड़क रहा है. सामान्य तौर पर दिल बायीं ओर होता है. मेडिकल के लिहाज से यह मामला इसलिए भी दुर्लभ है कि अभी तक इस नवजात को कोई गंभीर समस्या नहीं हुई है. ऑक्सीजन की कमी के कारण नवजात को अस्पताल के नीकू वार्ड में भर्ती कराया गया है. जहां डॉक्टर लगातार इसकी सेहत पर नजर रख रहे हैं. मेडिकल भाषा में इसे डेस्ट्राकार्डिया ओ के नाम से जाना जाता है. इस तरह का मामला 1000 बच्चों में किसी एक का होता है. यह जन्म जांच विकृति के रूप में देखा जाता है.

नाथनगर की रहने वाली हैं शिशु की मां

इस बच्चे की मां नाथनगर की है. सात दिन पहले इसका जन्म अस्पताल में हुआ था. इसकी हालत को देखते हुए नीकू वार्ड में भर्ती कराया गया है. परिजनों के मुताबित डॉक्टर ने पहले इसे सामान्य नवजात ही कहा. जब जांच किया गया तो पता चला इसका दिल ही दूसरी तरफ है. इसके बाद नवजात को ऑक्सीजन पर रखा गया है.

डॉक्टर कहते हैं- हृदय की होगी जांच

मायागंज अस्पताल के शिशु रोग विभाग के डॉ खलील अहमद कहते हैं नवजात को अभी निगरानी में रखा गया है. यह जन्मजात विकृति के कारण होता है. अभी नवजात के हृदय की जांच होगी. अगर इसमें कोई परेशानी नहीं हुई तो आगे यह लंबा सामान्य जीवन जी सकेगा. हालांकि अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं आयी है. अगर हृदय में कोई बीमारी या समस्या नहीं हुई तो किसी तरह की परेशानी आगे नहीं होगी. अभी नवजात को ऑक्सीजन पर रखा गया है. इस पर नजर रखी जा रही है.

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मेडिकल साइंस के अनुसार ऐसा क्यों होता है

डॉक्टर के अनुसार छह से आठ माह का गर्भ होने के बाद गर्भ में रह रहे शिशु का दिल अपनी जगह खोजने लगता है. यही वह सप्ताह होता है जब गर्भ में पलने वाले शिशु का दिल बनता है. गर्भ में पल रहे नवजात का दिल घूमता है और स्वाभाविक रूप से बायीं और स्थिर हो जाता है. लेकिन ऐसा इस नवजात के साथ नहीं हुआ. इसका दिल दायीं तरफ ही रह गया. यही वजह है कि गर्भ ठहरने के बाद तुंरत गर्भवती को पौष्टिक भोजन करने के लिए कहा जाता है. इस भोजन का असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है और वह मूव करता है. बेहतर भोजन नहीं करने के कारण गर्भ में पल रहे शिशु के हृदय की दीवार भी नहीं बन पाती है. इससे कई और परेशानी होने की आशंका रहती है. यही वजह है कि शिशु को फिलहाल ऑक्सीजन पर रखा गया है.

Posted by : Thakur Shaktilochan

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