विंडस्क्रीन पर बने ये काले डॉट्स क्यों होते हैं जरूरी? जानिए इनका असली काम

Published by :Ankit Anand
Published at :07 May 2026 3:08 PM (IST)
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Black Dots On Windscreen

विंडस्क्रीन के किनारों पर बने छोटे-छोटे काले डॉट्स (Photo: @imSaichowdary_/X)

Black Dots On Windscreen: विंडस्क्रीन के किनारों पर दिखने वाले काले डॉट्स सिर्फ डिजाइन के लिए नहीं दिए जाते हैं. ये हीट को बैलेंस रखते हैं, ग्लास की मजबूती बढ़ाते हैं और चिपकने वाले हिस्से को UV किरणों से बचाते हैं. ये छोटे दिखने वाले पैटर्न ड्राइविंग को सेफ और विजन को साफ बनाए रखने में बहुत जरूरी होते हैं.

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Black Dots On Windscreen: क्या आपने कभी ट्रैफिक सिग्नल पर अपनी कार में बैठे-बैठे विंडस्क्रीन के किनारों पर बने छोटे-छोटे काले डॉट्स को गौर से देखा है? ज्यादातर लोग इन्हें रोज देखते हैं, लेकिन शायद ही कभी सोचते हों कि आखिर ये होते क्यों हैं. कई लोगों को लगता है कि ये सिर्फ डिजाइन का हिस्सा हैं. लेकिन सच तो ये है कि इनका काम सिर्फ लुक्स तक सीमित नहीं है. ये छोटे-छोटे डॉट्स आपकी कार की सेफ्टी में बड़ा रोल प्ले करते हैं.

विंडस्क्रीन के किनारों पर बने छोटे-छोटे काले डॉट्स को क्या कहते हैं?

कार की विंडस्क्रीन पर दिखने वाले छोटे-छोटे काले डॉट्स ‘फ्रिट्स’ कहा जाता है. इन्हें खास ब्लैक एनामेल पेंट से बनाया जाता है, जिसे मैन्युफैक्चरिंग के दौरान ग्लास पर बेक किया जाता है ताकि ये हमेशा के लिए टिके रहें. आपने गौर किया होगा कि विंडस्क्रीन के किनारों पर एक मोटी काली पट्टी होती है, जो धीरे-धीरे अंदर की तरफ आते हुए छोटे-छोटे डॉट्स में बदल जाती है. ये पूरा पैटर्न सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि इसके पीछे एक खास वजह और स्मार्ट इंजीनियरिंग छिपी होती है.

क्यों जरूरी हैं फ्रिट्स?

गर्मी को कंट्रोल करने में मदद करते हैं

इन फ्रिट्स का सबसे बड़ा काम टेम्परेचर को मैनेज करना होता है. धूप में विंडस्क्रीन का शीशा बहुत ज्यादा गर्म हो सकता है. अगर ग्लास का एक हिस्सा दूसरे हिस्से की तुलना में ज्यादा गर्म हो जाए, तो ‘लेंसिं’ नाम की विजुअल डिस्टॉर्शन पैदा हो सकती है.

इसकी वजह से सीधी लाइनें भी मुड़ी हुई या टेढ़ी दिखाई देने लगती हैं. यह विजुअल डिस्टॉर्शन खतरनाक साबित हो सकता है और हादसों की वजह बन सकता है. ऐसे में ये ब्लैक डॉट्स गर्मी को पूरे ग्लास में ज्यादा समान तरीके से फैलाने में मदद करते हैं, जिससे लेंसिंग का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है.

विंडस्क्रीन की सील को सेफ रखते हैं

ये ब्लैक बॉर्डर और छोटे-छोटे डॉट्स कार की विंडस्क्रीन को मजबूती से पकड़कर रखने में मदद करते हैं. दरअसल, विंडस्क्रीन को कार में फिट करने के लिए एक मजबूत एडहेसिव (चिपकाने वाला मटेरियल) यूज किया जाता है. ब्लैक बॉर्डर और डॉट्स इस एडहेसिव को तेज धूप और UV किरणों से बचाते हैं. अगर यह सेफ्टी न मिले, तो समय के साथ एडहेसिव कमजोर या पिघल भी सकता है.

ग्लास को बेहतर तरीके से चिपके रहने में मदद करते हैं

ये ब्लैक डॉट्स विंडस्क्रीन को कार की बॉडी पर मजबूती से चिपकाने में भी मदद करते हैं. ये शीशे की सतह को थोड़ा रफ बना देते हैं, जिससे उसकी पकड़ बेहतर हो जाती है और ग्लास अच्छी तरह फिट रहता है. इतना ही नहीं, ये डॉट्स विंडस्क्रीन के लुक को भी ज्यादा प्रीमियम और स्टाइलिश बना देते हैं.

अगर ये काले डॉट्स फीके पड़ने लगें तो क्या होगा?

अगर आपकी कार के विंडस्क्रीन पर बने ये छोटे काले डॉट्स फीके पड़ने लगें या गायब होने लगें, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें. जैसे ही आपको ऐसा कुछ दिखे, तुरंत सर्विस सेंटर जाकर विंडस्क्रीन की जांच करवा लेना बेहतर रहेगा.

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Ankit Anand

लेखक के बारे में

By Ankit Anand

अंकित आनंद, प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वह पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं. टेक जर्नलिस्ट के तौर पर अंकित स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न्यूज, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इसके अलावा, वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी अहम खबरों पर भी लिखते हैं. अंकित ने GGSIP यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन की है.

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