VIDEO : शतरंज खिलाड़ी प्रज्ञाननंदा को गिफ्ट में XUV 400 EV देंगे आनंद महिंद्रा

आर प्रज्ञाननंदा महज 18 साल की उम्र में पिछले हफ्ते विश्व शतरंज चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंचने में सफल रहे थे. हालांकि, वह खिताबी मुकाबले में विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन से हार गए, लेकिन उन्होंने अपने शानदार खेल से सबको अपना मुरीद बना लिया.
फिडे विश्व कप के फाइनल तक पहुंचने वाले युवा भारतीय शतरंज खिलाड़ी आर प्रज्ञाननंदा के माता-पिता के सपने को पूरा करते हुए महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने अपनी कंपनी का लग्जरी इलेक्ट्रिक वाहन एक्सयूवी 400 गिफ्ट में देने का ऐलान किया है. आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (ट्विटर) पर प्रज्ञाननंदा के परिवार को यह इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी की तरफ से भेंट किए जाने की जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी कार विनिर्माता का असली लक्ष्य लोगों के सपने को पूरा करना होता है.
आर प्रज्ञाननंदा महज 18 साल की उम्र में पिछले हफ्ते विश्व शतरंज चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंचने में सफल रहे थे. हालांकि, वह खिताबी मुकाबले में विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन से हार गए, लेकिन उन्होंने अपने शानदार खेल से सबको अपना मुरीद बना लिया. उत्साहित समर्थकों ने सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले महिंद्रा से प्रज्ञाननंदा को ‘थार’ वाहन गिफ्ट में देने का सुझाव दिया था. इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महिंद्रा ने कहा कि वह प्रज्ञाननंदा के माता-पिता को उन्हें शतरंज के दिमागी खेल की तरफ प्रोत्साहित करने के लिए नए दौर का वाहन ‘एक्सयूवी 400’ भेंट करना चाहते हैं.
आनंद महिंद्रा ने कहा कि मैं चाहूंगा कि माता-पिता अपने बच्चों को शतरंज की तरफ आकर्षित करने की कोशिश करें और दिमागी कसरत वाले इस खेल को बढ़ावा दें. उन्होंने कहा कि यह इलेक्ट्रिक वाहन की तरह हमारे ग्रह के बेहतर भविष्य के लिए एक निवेश है. मुझे लगता है कि हमें प्रज्ञाननंदा के माता-पिता को एक्सयूवी 400 भेंट करना चाहिए.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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