15 August Special : भारत के यूपीआई से अमेरिका को क्या परेशानी है?

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 15 Aug 2023 6:52 PM

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रुपे डेबिट और क्रेडिट कार्ड आने के बाद भी भारत में डिजिटल पेमेंट जगत में अमेरिका का वर्चस्व खत्म नहीं हुआ. इसके बाद भारत ने यूपीआई पेमेंट सिस्टम विकसित किया. इसे नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई की ओर से विकसित किया गया है.

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Independence Day Special : भारत आज अपना 77वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. भारत ने अपनी आजादी के बाद से अब तक तकनीक के मोर्चे पर बड़े आयाम गढ़े हैं. कम्यूनिकेशन से लेकर स्पेस टेक्नोलॉजी और ऑनलाइन पेमेंट के मामले में भारत का झंडा बुलंद है. भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो ने हाल ही में चंद्रयान 3 मिशन लॉन्च किया है, जिसने इसे कई मायनों में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के समकक्ष ला खड़ा किया है. यही नहीं, भारत में 5G नेटवर्क तेजी से रोलआउट हो रहा है. इसके साथ ही, डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई ने विशेष रूप से अमेरिका की चिंताएं बढ़ा दी हैं. हम आपको बताते हैं कि आखिर कैसे-

डिजिटल पेमेंट की दुनिया में अमेरिका का वर्चस्व

डिजिटल पेमेंट के नाम पर भारत में जब डेबिट और क्रेडिट कार्ड का राज था, तब भारतीय डेबिट और क्रेडिट कार्ड के कारोबार में अमेरिकी कंपनियाें – वीजा और मास्टरकार्ड का ही वर्चस्व था. इसका मतलब यह कि आप किसी भी बैंक का डेबिट या क्रेडिट कार्ड उठाकर देख लीजिए, उसकी ऑपरेटर यही दोनों कंपनियां थीं. बाजार में उनकी मोनोपॉली थी, इसलिए वे मनमाफिक चार्ज भी वसूल करती थीं. यही नहीं, भारतीयों का डिजिटल पेमेंट डेटा भी उनके कंट्रोल में था. ये दोनों कंपनियां भारतीयों के पेमेंट डेटा को अमेरिकी सर्वर पर स्टोर करती थीं. अमेरिका के इस वर्चस्व को कम करने के लिए भारत ने अपना रुपे डेबिट और क्रेडिट कार्ड लॉन्च किया. धीरे-धीरे ही सही, रुपे डेबिट और क्रेडिट कार्ड को बैंक अपना रहे हैं और यह पॉपुलर हो रहा है.

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कैसे खत्म हुआ अमेरिकी कंपनियों का दबदबा

रुपे डेबिट और क्रेडिट कार्ड आने के बाद भी भारत में डिजिटल पेमेंट जगत में अमेरिका का वर्चस्व खत्म नहीं हुआ. इसके बाद भारत ने यूपीआई पेमेंट सिस्टम विकसित किया. इसे नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई की ओर से विकसित किया गया है. यूपीआई का आज के समय में हर जगह इस्तेमाल हो रहा है. भारत के साथ विदेशों में भी यूपीआई बहुत लोकप्रिय हो रहा है. यह यूपीआई की बढ़ती लोकप्रियता की ही देन है कि आज के समय में डेबिट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट में बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि जल्द ही एक वक्त ऐसा आयेगा, जब भारत अपने यूपीआई के दम पर वीजा और मास्टरकार्ड जैसी अमेरिकी कंपनियों का दबदबा खत्म कर देगा.

अमेरिकी कंपनियों की यूपीआई में एंट्री

भारत के यूपीआई जगत में भी अब अमेरिकी कंपनियों की एंट्री होने लगी है. भारतीय पेमेंट सिस्टम यानी यूपीआई में अमेरिकी टेक कंपनियों – गूगल पे, अमेजन पे और व्हाट्सऐप पे की दबदबा बढ़ने लगा है. भारत सरकार की मंशा है कि किसी भी एक या दो कंपनियों का यूपीआई पर दबदबा न कायम हो. ऐसे में केंद्र सरकार अब यूपीआई पेमेंट के मामले में गूगल पे, अमेजन पे और व्हाट्सऐप पे के दबदबे को कम करने के लिए यूपीआई प्लगइन सिस्टम लेकर आयी है.

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यूपीआई प्लगइन सिस्टम क्या है ?

यूपीआई प्लगइन सिस्टम के तहत यूपीआई पेमेंट करने के लिए यूपीआई ऐप जैसे गूगल पे, अमेजन पे और व्हाट्सऐप पे की जरूरत नहीं होगी. इसके तहत किसी भी ऑनलाइन पेमेंट के लिए वर्चुअल पेमेंट एड्रेस का इस्तेमाल किया जाएगा. इसका मतलब यह हुआ कि किसी भी कंपनी के पास खुद की यूपीआई पेमेंट आईडी होगी, जिस पर कोई मर्चेंट पेमेंट स्वीकर कर पाएगा. इससे उम्मीद है कि गूगल पे, अमेजन पे और व्हाट्सऐप पे जैसी कंपनियों का दबदबा कम हो जाए. यही देखकर अमेरिका की टेंशन बढ़ गई है.

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By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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