भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद, सब्सिडी पर एसीएमए के अध्यक्ष ने कही बड़ी बात

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :09 Aug 2023 2:27 PM (IST)
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भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद, सब्सिडी पर एसीएमए के अध्यक्ष ने कही बड़ी बात

एसीएमए के अध्यक्ष संजय कपूर ने कहा कि उन्नत प्रौद्योगिकियों के साथ स्थानीयकरण पर गहन ध्यान देने के साथ लागत आधारित बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की वृद्धि जारी रहेगी. प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना ने लागत संबंधी चिंताओं को दूर करने में योगदान दिया है.

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नई दिल्ली : भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद की जा रही है. हालांकि, सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक वाहन के निर्माण और इसकी खरीद पर सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है, लेकिन बताया यह भी जा रहा है कि सरकार की ओर से सब्सिडी मिले या नहीं, इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में तेजी आएगी. ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसीएमए) के अध्यक्ष संजय कपूर ने कहा कि स्थानीय बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ती रहेगी और फेम-टू (फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) के तहत प्रोत्साहनों के बाद पिछले दो महीने के दौरान इस क्षेत्र में मंदी के बावजूद इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ी है.

पीएलआई स्कीम ने तैयार किया रोडमैप

एसीएमए के अध्यक्ष संजय कपूर ने कहा कि उन्नत प्रौद्योगिकियों के साथ स्थानीयकरण पर गहन ध्यान देने के साथ लागत आधारित बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की वृद्धि जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी टेस्ला के चीनी आपूर्तिकर्ता भारत में स्थापित हो जाते हैं, तो विकासात्मक क्षमताओं में ये निवेश इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के खतरों को कम करने में मदद करेंगे. उन्होंने कहा कि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना ने लागत संबंधी चिंताओं को दूर करने में योगदान दिया है और उद्योग की गतिविधि को आगे बढ़ाने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है.

सरकार ने घटाई प्रोत्साहन राशि

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने एक जून 2023 से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन पर दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को 15 हजार रुपये प्रति यूनिट से घटाकर करीब 10 हजार रुपये कर दिया है. सरकार के इस कदम से अंतिम उपभोक्ता के लिए लागत बढ़ गई है. हालांकि, सरकार की ओर से की गई इस कार्रवाई के बाद से भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है. रिपोर्ट में बताया गयाय है कि इस साल के जुलाई महीने में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की 56,000 इकाइयां बेची गईं, जबकि जून में करीब 44,000 इकाइयां बिकीं. हालांकि, पिछले साल इसी अवधि में करीब 60,000 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बेचे गए थे.

कंपोनेंट निर्माताओं के राजस्व में वृद्धि

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान कंपोनेंट निर्माताओं का कुल राजस्व बढ़कर 2.7 फीसदी हो गई, जो 2021-22 के वित्त वर्ष के दौरान एक फीसदी से भी कम थी. इस समय इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री पर दबाव देखे जाने के बावजूद भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में बढ़ोतरी जारी रहेगी. एसीएमए के अध्यक्ष संजय कपूर ने आगे कहा कि ऑटो इंडस्ट्री की ओर से स्थानीयकरण पर ध्यान केंद्रित करने और एडवांस्ड केमिकल सेल, और ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं के लिए सरकार की ओर से पीएलआई स्कीम के तहत 44,038 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन राशि की घोषणा से भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी.

चाइना प्लस वन रणनीति पर काम कर रहे ऑटो कंपोनेंट निर्माता

उन्होंने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं को करीब 200 मिलियन डॉलर का घाटा उठाना पड़ा, जो पिछले पांच साल पहले वर्ष 2019 में हुए 2.5 बिलियन डॉलर के मुकाबले कम था. उन्होंने कहा कि दुनियाभर के वाहन निर्माताओं ने महामारी के बाद सप्लाई चेन को जोखिम मुक्त करने के लिए चाइना प्लस वन रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. भारत से कंपोनेंट की सोर्सिंग बढ़ रही है. वैश्विक स्तर पर निर्माताओं ने प्रौद्योगिकी को अपनाने की क्षमता को पहचानना शुरू कर दिया है.

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ऑटो कंपोनेंट निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज

उन्होंने आगे बताया कि वर्ष 2022-23 में ऑटो कंपोनेंट का निर्यात पांच फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 20.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. हालांकि, इस दौरान उत्तरी अमेरिका में शिपमेंट में आठ फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसी प्रकार यूरोप और एशियाई देशों में यह क्रमश: तीन और चार फीसदी बढ़ी. उन्होंने कहा कि उत्तरी अमेरिका भारतीय कंपोनेंट निर्माताओं के लिए सबसे बड़ा विदेशी बाजार है, जिसकी पिछले वित्त वर्ष में कुल निर्यात की करीब 32 फीसदी हिस्सेदारी थी. इस दौरान आयात करीब 11 फीसदी बढ़ गया. हालांकि, पिछले पांच सालों के दौरान इसमें गिरावट दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि आयात पर चीन का प्रभुत्व कायम है और यह रातोंरात खत्म नहीं हो सकता, लेकिन हमें निवेश जारी रखना होगा. चीन के बर्चस्व को समापत करने के लिए आपसी सहयोग पर विचार करना होगा.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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