भारत टैक्सी लॉन्च: सुरक्षा, सस्ती सवारी और ड्राइवरों का हक; जानिए खास बातें

Author :Rajeev Kumar
Published by :Rajeev Kumar
Updated at :05 Feb 2026 5:07 PM
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Bharat Taxi App Launch

ऊबर-ओला को टक्कर देने आया भारत टैक्सी, बिना सर्ज किराया / तस्वीर गूगल प्लेस्टोर से

भारत टैक्सी सहकारी मॉडल पर आधारित नया ऐप है जहां ड्राइवर हिस्सेदार हैं. बिना सर्ज प्राइसिंग, कम किराया और सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं के साथ यह ऊबर-ओला को सीधी चुनौती देता है

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भारत में कैब हाइलिंग सेक्टर (टैक्सी सर्विस) लंबे समय से ऊबर और ओला जैसे निजी खिलाड़ियों के कब्जे में रहा है. लेकिन अब तस्वीर बदलने जा रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली-एनसीआर से “भारत टैक्सी” की शुरुआत की है. यह ऐप सहकारी (कोऑपरेटिव) मॉडल पर आधारित है, जहां हर ड्राइवर यानी ‘सारथी’ कंपनी का हिस्सा होगा. बिना सर्ज प्राइसिंग और कम किराए के वादे के साथ यह प्लैटफॉर्म यात्रियों और ड्राइवरों दोनों के लिए नया विकल्प पेश कर रहा है.

कोऑपरेटिव मॉडल पर आधारित

भारत टैक्सी का संचालन सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है. इसे मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट के तहत पंजीकृत किया गया है और इसमें IFFCO, अमूल, NABARD जैसी बड़ी सहकारी संस्थाओं का सहयोग है. खास बात यह है कि हर ड्राइवर को शेयरधारक बनाया गया है. यानी वे केवल ऐप का हिस्सा नहीं बल्कि इसके मालिक भी हैं.

ड्राइवरों की कमाई होगी ज्यादा

प्लैटफॉर्म पर कोई कमीशन नहीं लिया जाएगा. ड्राइवरों को केवल ₹30 का दैनिक शुल्क देना होगा और बाकी किराया सीधे उनकी जेब में जाएगा. इसके अलावा सहकारी सदस्य होने के नाते उन्हें मुनाफे में हिस्सा और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी का अधिकार मिलेगा. साथ ही स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और रिटायरमेंट सेविंग जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं भी शामिल हैं.

यात्रियों के लिए राहत

भारत टैक्सी ने शुरुआत से ही सर्ज प्राइसिंग खत्म करने का ऐलान किया है. यानी पीक ऑवर में भी किराया स्थिर रहेगा. अधिकारियों का दावा है कि कमीशन-फ्री मॉडल से यात्रियों को लगभग 30% तक सस्ती सवारी मिल सकती है. सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर 35 सपोर्ट बूथ बनाए गए हैं और ऐप में इमरजेंसी बटन भी दिया गया है.

ऊबर-ओला से अलग पहचान

जहां ऊबर और ओला में ड्राइवर केवल कॉन्ट्रैक्टर होते हैं, वहीं भारत टैक्सी में वे सह-मालिक हैं. यहां प्रति राइड कमीशन नहीं बल्कि तय शुल्क है. यही फर्क इसे निजी कंपनियों से अलग बनाता है और ड्राइवरों को ज्यादा स्वतंत्रता देता है.

बाजार में नई चुनौती

भारत टैक्सी का आगमन निजी एग्रीगेटर्स के लिए सीधी चुनौती है. ड्राइवरों की नाराजगी और यात्रियों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए यह सहकारी मॉडल एक नया विकल्प पेश करता है. दिल्ली-एनसीआर में 2.5 लाख से अधिक वाहन पहले ही जुड़ चुके हैं और आने वाले दो वर्षों में इसे देशभर में विस्तार देने की योजना है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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