गोवा में टूरिस्ट छोड़ रहे किराये की कारें और आधार कार्ड, बढ़ीं रेंटल कंपनियों की मुश्किलें

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गोवा घूमने आए और कार छोड़कर चले गए / सिम्बॉलिक पिक एआई ने बनायी

गोवा में कई पर्यटक किराये की कारें एयरपोर्ट और होमस्टे के बाहर छोड़कर जा रहे हैं. रेंटल ऑपरेटरों के मुताबिक बड़ी संख्या में लोग आधार और वोटर आईडी भी वापस लेने नहीं लौट रहे.

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गोवा में घूमने आने वाले पर्यटकों से जुड़ी एक नई समस्या सामने आई है, जिसने रेंट-ए-कैब कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है. राज्य में कई पर्यटक किराये पर ली गई कारों को दुर्घटना के बाद या ट्रिप खत्म होने पर बीच रास्ते, एयरपोर्ट या होमस्टे के बाहर छोड़कर चले जा रहे हैं. इतना ही नहीं, कई मामलों में लोग अपने आधार कार्ड, वोटर आईडी और दूसरी पहचान संबंधी दस्तावेज भी वापस लेने नहीं लौटते. इससे वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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एयरपोर्ट और होमस्टे के बाहर छोड़ दी जा रही गाड़ियां

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में नॉर्थ गोवा रेंट-ए-कैब एसोसिएशन के हवाले से कहा गया है कि कई ग्राहक किराये की कारें तय समय पर वापस नहीं करते. कुछ वाहन एयरपोर्ट पार्किंग में मिलते हैं, तो कुछ होमस्टे या सड़क किनारे खड़े हुए पाए जाते हैं. कई बार चाबी तक गायब रहती है और ग्राहक बाद में फोन उठाना भी बंद कर देते हैं.

कारोबारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में उन्हें वाहन की मरम्मत, बीमा क्लेम, बैंक लोन की किश्त और दूसरी लागत खुद उठानी पड़ती है. इससे छोटे ऑपरेटरों पर बड़ा आर्थिक दबाव बन रहा है.

हर महीने बड़ी संख्या में छूट रहे पहचान पत्र

रेंटल ऑपरेटरों के अनुसार हर महीने करीब 20 से 25 प्रतिशत ग्राहक अपने आधार कार्ड, वोटर आईडी या अन्य दस्तावेज वापस लेने नहीं आते. कई ग्राहक ऑनलाइन आधार डाउनलोड कर लेने की वजह से पुराने दस्तावेजों को लेने में दिलचस्पी नहीं दिखाते.

समस्या यह भी है कि नियमों के अनुसार कारोबारी किसी का मूल पहचान पत्र अपने पास स्थायी रूप से नहीं रख सकते. ऐसे में दस्तावेजों की सुरक्षा और सही इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ जाती है.

किराये पर गाड़ी लेने के लिए क्या होती है प्रक्रिया

गोवा में रेंट-ए-कैब सेक्टर में करीब 6,000 से ज्यादा वाहन चलाए जा रहे हैं. वाहन लेने से पहले ग्राहकों को यात्रा विवरण, वापसी की तारीख और शर्तों से जुड़ा फॉर्म भरना होता है. साथ ही वाहन की स्थिति का वीडियो रिकॉर्ड भी बनाया जाता है.

ऑपरेटर ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपी, एडवांस पेमेंट और सिक्योरिटी डिपॉजिट भी लेते हैं. हैचबैक कारों के लिए लगभग 3,000 रुपये और SUV के लिए करीब 5,000 रुपये जमा कराए जाते हैं. इसके अलावा ग्राहकों को शराब पीकर गाड़ी चलाने के नियमों की जानकारी भी दी जाती है.

विशेषज्ञ बोले- सख्त SOP की जरूरत

गोवा कंज्यूमर एक्शन नेटवर्क से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि रेंट-ए-कैब और रेंट-ए-बाइक सेवाओं के लिए स्पष्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP बनना जरूरी है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहचान सत्यापन, वाहन ट्रैकिंग और शिकायत प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित किया जाए, तो ऐसे मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है. साथ ही ऑपरेटरों को जिला सड़क सुरक्षा समिति और पुलिस प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय बनाने की सलाह दी गई है.

पुलिस ने भी दी अहम सलाह

गोवा ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे कई मामले स्थानीय थानों तक ही सीमित रह जाते हैं और आगे बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती. पुलिस ने यह भी कहा कि रेंटल कंपनियों को ग्राहकों के मूल दस्तावेज रखने की जरूरत नहीं है. केवल आधार नंबर या फोटोकॉपी भी पर्याप्त हो सकती है.

इस पूरे मामले ने पर्यटन और वाहन रेंटल उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. आने वाले समय में यदि नियमों को और सख्त नहीं किया गया, तो छोटे कारोबारियों को लगातार नुकसान झेलना पड़ सकता है.

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