प्रचारक से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और अब शुभेंदु सरकार में मंत्री, दिलीप घोष का अंडमान से बंगाल तक का ऐसा रहा सफर

Published by :Mithilesh Jha
Updated at :12 May 2026 7:24 PM
विज्ञापन
Dilip Ghosh Minister West Bengal

Dilip Ghosh Minister West Bengal: पश्चिम बंगाल की नयी भाजपा सरकार में दिलीप घोष ने मंत्री पद की शपथ ली है. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और RSS प्रचारक रहे दिलीप घोष के राजनीतिक सफर और खड़गपुर सदर से उनकी जीत की पूरी कहानी पढ़ें यहां.

विज्ञापन

Dilip Ghosh Minister West Bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जब भी भाजपा के उत्थान की बात होगी, दिलीप घोष का नाम सबसे ऊपर आयेगा. शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शुभेंदु अधिकारी के साथ मंत्री पद की शपथ लेने वाले दिलीप घोष आज बंगाल भाजपा के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक हैं.

नयी सरकार में ‘एंकर ऑफ कैबिनेट’ हैं दिलीप घोष

एक साधारण स्वयंसेवक से प्रदेश अध्यक्ष, सांसद और अब कैबिनेट मंत्री तक का उनका सफर संघर्षों, विवादों और संगठन को मजबूत करने की अटूट जिद की कहानी है. खड़गपुर सदर से निर्वाचित होकर आये दिलीप घोष को नयी सरकार में अनुभव का लंगर (Anchor of Cabinet) माना जा रहा है.

अंडमान के जंगलों से बंगाल की सियासत तक

दिलीप घोष का राजनीतिक आधार उनकी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पृष्ठभूमि है. 1984 में आरएसएस के साथ सफर शुरू करने वाले दिलीप घोष ने दशकों तक संगठन के लिए काम किया. 1999 से 2007 के बीच वे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आरएसएस के प्रभारी थे.

इसे भी पढ़ें : लाठी चलाने में माहिर और ड्रैगन फ्रूट की खेती का विचार, जानें बीजेपी के ‘गेमचेंजर’ दिलीप घोष की अनसुनी दास्तां

2014 में संघ से भाजपा में आये दिलीप घोष

अंडमान में कठिन भौगोलिक और राजनीतिक हालातों में काम करने के अनुभव ने उन्हें एक सख्त और अनुशासित संगठनकर्ता बनाया. 2014 में उन्हें संघ से भाजपा में भेजा गया. 2015 में उन्हें ऐसे समय में प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जब बंगाल में भाजपा का वजूद कुछ भी नहीं था.

बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

वो जीत, जिसने हिला दी कांग्रेस की विरासत

दिलीप घोष ने अपना पहला चुनावी धमाका वर्ष 2016 में किया. खड़गपुर सदर सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्ञान सिंह सोहनपाल (चाचा) को हराया, जो वहां से लगातार 7 बार विधायक रह चुके थे. घोष के नेतृत्व में ही भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 18 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया. ‘19 में हाफ, 21 में साफ’ का मशहूर नारा उन्होंने ही दिया था.

बंगाल में फायरब्रांड नेता की छवि

अपने बेबाक और कई बार विवादित बयानों के लिए मशहूर दिलीप घोष ने बंगाल के ग्रामीण इलाकों और आदिवासी बेल्ट (जंगलमहल) में भाजपा को घर-घर तक पहुंचाया.

इसे भी पढ़ें : माओवादियों के ‘लाल’ आतंक को हराकर ‘लोकतंत्र’ के नायक बने खुदीराम टुडू, पढ़ें रानीबांध के शिक्षक की पूरी कहानी

Dilip Ghosh Minister West Bengal: नयी सरकार में दिलीप घोष की अहमियत

शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट में दिलीप घोष का होना कई मायनों में महत्वपूर्ण है. शुभेंदु अधिकारी और नीशीथ प्रमाणिक युवा जोश का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो दिलीप घोष संगठन के पुराने और वफादार कैडर का भरोसा हैं. वे अक्सर कहते हैं- आरएसएस ने हमें लोगों के साथ घुलना-मिलना सिखाया है. अब उनके इसी अनुभव का इस्तेमाल बंगाल की चरमरायी कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को पटरी पर लाने में किया जायेगा.

बंगाल में भाजपा की नींव को पत्थर की तरह मजबूत किया

खड़गपुर से कोलकाता तक के इस सफर में दिलीप घोष ने कई हमले झेले और अनगिनत विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया. आज जब वे मंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं, तो यह उनके उस संघर्ष का इनाम है, जिसने बंगाल में भाजपा की नींव को पत्थर की तरह मजबूत कर दिया.

इसे भी पढ़ें

दिलीप घोष को गांवों की जिम्मेदारी, अग्निमित्रा संभालेंगी ‘नारी शक्ति’, देखें बंगाल में किसे कौन-सा मंत्रालय मिला

75 साल की तपस्या : श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों से शुभेंदु अधिकारी के राजतिलक तक, जानें कैसे संघ ने खामोशी से बदल दी बंगाल की सत्ता

40 साल का संघर्ष और आंखों में खुशी के आंसू, भाजपा की जीत पर क्या बोलीं माखनलाल सरकार की पत्नी

कौन हैं नंदीग्राम के ‘जायंट किलर’ शुभेंदु अधिकारी, जिन्होंने ममता बनर्जी को 2 बार हराया और ढाह दिया टीएमसी का अभेद्य किला

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola