महिलाएं बाइक पर एक तरफ क्यों बैठती हैं? सदियों पुरानी आदत की दिलचस्प है कहानी

Author :Rajeev Kumar
Published by :Rajeev Kumar
Updated at :12 May 2026 11:20 PM
विज्ञापन
Women Sitting Sideways Bike

क्या आप जानते हैं बाइक पर महिलाओं के ऐसे बैठने का इतिहास? / सिम्बॉलिक पिक एआई से

बाइक पर महिलाओं के साइड में बैठने की आदत का संबंध मध्यकालीन यूरोप और ब्रिटिश दौर से जुड़ा बताया जा रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल चर्चा ने इस परंपरा की ऐतिहासिक कहानी को फिर सुर्खियों में ला दिया है.

विज्ञापन

भारत समेत दक्षिण एशिया के कई देशों में आपने अक्सर देखा होगा कि महिलाएं बाइक या स्कूटर पर पीछे बैठते समय दोनों पैर एक ही तरफ रखती हैं. यह इतना आम दृश्य है कि ज्यादातर लोग कभी इसके पीछे की वजह जानने की कोशिश ही नहीं करते. दिलचस्प बात यह है कि यह तरीका किसी वैज्ञानिक नियम या सुरक्षा मानक से नहीं जुड़ा, बल्कि इसकी जड़ें सदियों पुराने सामाजिक नियमों और विदेशी सांस्कृतिक प्रभावों में छिपी हैं. अब इस पर नई चर्चा तब शुरू हुई जब बाइक राइडर और कंटेंट क्रिएटर जेनिथ इरफान ने इसके इतिहास को विस्तार से समझाया.

यूरोप की शाही परंपरा से जुड़ा है यह तरीका

जेनिथ इरफान के मुताबिक महिलाओं के साइड में बैठने की शुरुआत दक्षिण एशिया में नहीं हुई थी. इसका इतिहास मध्यकालीन यूरोप से जुड़ा है, जहां राजघरानों की महिलाएं घोड़े पर दोनों पैर एक तरफ करके बैठती थीं. उस दौर में महिलाओं के लिए पुरुषों की तरह घोड़े पर बैठना सामाजिक तौर पर उचित नहीं माना जाता था.

ऐसे में साइड-सैडल राइडिंग को महिलाओं के लिए सम्मानजनक और शालीन तरीका माना गया. बताया जाता है कि Anne of Bohemia जैसी शाही हस्तियां भी लंबे सफर के दौरान इसी अंदाज में घुड़सवारी करती थीं.

ब्रिटिश दौर में भारत पहुंची यह आदत

जब ब्रिटिश शासन भारत और दक्षिण एशिया में आया, तो उनके साथ कई सामाजिक आदतें और जीवनशैली भी यहां पहुंचीं. धीरे-धीरे महिलाओं के साइड में बैठने का तरीका भी स्थानीय समाज में अपनाया जाने लगा.

बाद में जब मोटरसाइकिल और स्कूटर आम हुए, तो यही आदत वाहनों पर भी जारी रही. समय के साथ यह इतना सामान्य बन गया कि कई पीढ़ियों की महिलाएं इसे बिना सवाल किए अपनाती रहीं. आज भी गांवों से लेकर बड़े शहरों तक यह दृश्य आम है.

रानी लक्ष्मीबाई का उदाहरण बताता है अलग कहानी

जेनिथ इरफान ने इस चर्चा में रानी लक्ष्मीबाई का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि भारतीय इतिहास में ऐसी कई महिलाएं रही हैं जो पुरुषों की तरह घोड़े पर बैठकर युद्ध लड़ती थीं. रानी लक्ष्मीबाई इसका सबसे बड़ा उदाहरण मानी जाती हैं.

इससे यह साफ होता है कि भारतीय समाज में महिलाएं पारंपरिक रूप से astride यानी दोनों तरफ पैर रखकर सवारी करने में सक्षम थीं. लेकिन औपनिवेशिक प्रभाव और सामाजिक सोच ने धीरे-धीरे साइड में बैठने की छवि को ज्यादा स्वीकार्य बना दिया.

Women Sitting Sideways Bike: आज भी क्यों जारी है यह परंपरा?

आधुनिक समय में बाइक और स्कूटर पूरी तरह अलग तकनीक वाले वाहन बन चुके हैं. इसके बावजूद कई महिलाएं अब भी साइड में बैठना पसंद करती हैं. इसके पीछे कपड़ों की सुविधा, सामाजिक आदत, पारिवारिक संस्कार और शालीनता जैसी धारणाएं बड़ी वजह मानी जाती हैं.

हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञ अक्सर मानते हैं कि दोनों तरफ पैर रखकर बैठना ज्यादा संतुलित और सुरक्षित हो सकता है, लेकिन सामाजिक व्यवहार कई बार तकनीकी सलाह से ज्यादा प्रभावशाली साबित होता है.

सोशल मीडिया पर शुरू हुई नई बहस

जेनिथ इरफान की इस जानकारी के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने हैरानी जताई कि रोजमर्रा की इतनी सामान्य दिखने वाली आदत का संबंध यूरोप के सदियों पुराने इतिहास से हो सकता है. कई यूजर्स ने माना कि वे आज तक इसे सिर्फ भारतीय परंपरा समझते थे.

यह चर्चा इस बात को भी दिखाती है कि इतिहास और सामाजिक प्रभाव हमारे रोजमर्रा के व्यवहार को कितनी गहराई से प्रभावित करते हैं. कई बार हम जिन आदतों को सामान्य मान लेते हैं, उनके पीछे लंबा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सफर छिपा होता है.

यह भी पढ़ें: 45 डिग्री से ऊपर की गर्मी में इलेक्ट्रिक कार कितनी सेफ होती है? जानें यहां हर एक बात

विज्ञापन
Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola