45 डिग्री से ऊपर की गर्मी में इलेक्ट्रिक कार कितनी सेफ होती है? जानें यहां हर एक बात

Published by :Ankit Anand
Published at :11 May 2026 4:30 PM (IST)
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Electric Cars In High Temperature

इलेक्ट्रिक कार को चेक करता एक आदमी (Photo: AI Generated)

Electric Cars: भारत में 45 डिग्री से ज्यादा गर्मी में भी EVs सेफ तरीके से काम करने के लिए डिजाइन की जाती हैं. इनकी बैटरी थर्मल सिस्टम गर्मी को कंट्रोल करता है और परफॉर्मेंस को स्टेबल रखता है. हालांकि, ज्यादा टेम्परेचर में रेंज और चार्जिंग स्पीड पर हल्का असर देखा जा सकता है.

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Electric Cars In High Temperature: पिछले कुछ सालों में इलेक्ट्रिक कारों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद नए कस्टमर्स के मन में सेफ्टी को लेकर सवाल उठना बिल्कुल लाजमी है. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सिर्फ EV ही नहीं, बल्कि किसी भी तरह की कार में आग लग सकती है. इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जैसे तकनीकी खराबी, शॉर्ट सर्किट या फिर बेहद ज्यादा गर्मी. यही कारण है कि बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या इलेक्ट्रिक गाड़ियां उन इलाकों में सेफ हैं, जहां टेम्परेचर काफी ज्यादा रहता है. आइए जानते हैं.

क्या इलेक्ट्रिक गाड़ियां हाई टेम्परेचर में सेफ तरीके से काम कर सकते हैं?

भारत के कई हिस्सों में गर्मियों के दौरान टेम्परेचर 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाता है. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल आना बिल्कुल जायज है. तो इसका सीधा जवाब बिल्कुल हां है. EVs यानी इलेक्ट्रिक गाड़ियां हाई टेम्परेचर में भी सेफ तरीके से काम करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं. 45 डिग्री से ज्यादा गर्मी में भी ये अच्छी तरह ऑपरेट कर सकते हैं.

हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है कि हर इलेक्ट्रिक कार सेफ ऑपरेटिंग लिमिट अलग-अलग हो सकती है. यानी कुछ मॉडल्स बेहद गर्म मौसम को बेहतर तरीके से संभाल लेते हैं, जबकि कुछ में परफॉर्मेंस पर थोड़ा असर देखने को मिल सकता है.

उदाहरण के तौर पर, Tata Nexon EV और Tata Punch EV जैसी इलेक्ट्रिक कारें माइनस 22 डिग्री सेल्सियस से लेकर 55 डिग्री सेल्सियस तक के टेम्परेचर में सेफ तरीके से काम कर सकती हैं. हालांकि, हर EV की टेम्परेचर सहने की क्षमता अलग-अलग हो सकती है.

लेकिन एक बात लगभग सभी इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर लागू होती है. यही कि जब मौसम जरूरत से ज्यादा गर्म या बेहद ठंडा हो जाता है, तो उसका सीधा असर गाड़ी की परफॉर्मेंस पर पड़ता है. ऐसे हालात में बैटरी की एफिशिएंसी, ड्राइविंग रेंज और चार्जिंग स्पीड पर असर पड़ सकता है.

क्या होता है बैटरी थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम?

EV में बैटरी को सेफ और सही टेम्परेचर पर रखने के लिए एक खास सिस्टम होता है, जिसे बैटरी थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम (Battery Thermal Management System) कहते हैं. इसे आप ऐसे समझिए जैसे कार की बैटरी के लिए एक कूलिंग गार्ड हो, जो हर वक्त उसका ध्यान रखता है. जैसे ही बैटरी का टेम्परेचर बढ़ने लगता है, ये सिस्टम अपने आप एक्टिव हो जाता है और उसे वापस सेफ लेवल पर लाने की कोशिश करता है. अगर कभी टेम्परेचर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए, तो बैटरी को नुकसान से बचाने के लिए सिस्टम उसे अस्थायी रूप से बंद भी कर देता है.

आजकल की नई EVs में ज्यादातर लिक्विड कूलिंग सिस्टम यूज होता है. यह बैटरी को ज्यादा एफिशिएंट तरीके से ठंडा करता है. वहीं, पुराने या बजट वाले मॉडल्स में आमतौर पर एयर कूलिंग सिस्टम मिलता है. यह हवा के जरिए बैटरी का टेम्परेचर कंट्रोल करता है.

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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