सरकार ने यह शर्त मान ली तो केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगी ₹75 लाख की ग्रेच्युटी
8th Pay Commission : 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी संगठनों ने ग्रेच्युटी नियमों में बड़े पैमाने पर सुधार की मांग रखी है. मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संगठनों ने न केवल ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को ₹25 लाख से बढ़ाकर ₹75 लाख तक करने का प्रस्ताव दिया है, बल्कि नौकरी के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर आश्रितों को मिलने वाली वित्तीय मदद (डेथ ग्रेच्युटी) को भी पहले से अधिक मजबूत करने की मांग की है.
8th Pay Commission : देश के लाखों केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आने वाले समय में ग्रेच्युटी के नियम पूरी तरह बदल सकते हैं. 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के सामने कर्मचारी यूनियनों ने वर्तमान में मिलने वाली ग्रेच्युटी की राशि, उसकी ऊपरी सीमा (Caping) और उसके कैलकुलेशन के पुराने फॉर्मूले को बदलने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं.
सामान्य नियमों के तहत, किसी भी सरकारी कर्मचारी को कम से कम 5 साल की लगातार सेवा पूरी करने के बाद रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी का लाभ मिलता है. इसके अलावा, यदि सेवा के दौरान ही किसी कर्मचारी का निधन हो जाता है, तो उसके परिवार को डेथ ग्रेच्युटी (Death Gratuity) का भुगतान किया जाता है. आइए समझते हैं कि वर्तमान में क्या नियम हैं और संगठनों ने इसमें क्या-क्या बदलाव सुझाए हैं.
क्या हैं ग्रेच्युटी के मौजूदा नियम और कैलकुलेशन ?
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, रिटायरमेंट या मृत्यु के समय मिलने वाली कुल ग्रेच्युटी राशि की गणना नीचे दिए गए आधार पर की जाती है.
- कैलकुलेशन का फॉर्मूला: कर्मचारी की नौकरी के दौरान पूरे किए गए हर 6 महीने के कार्यकाल के लिए (बेसिक सैलरी + महंगाई भत्ता यानी DA) का एक-चौथाई (1/4) हिस्सा ग्रेच्युटी के रूप में जोड़ा जाता है.
- अधिकतम सीमा: फिलहाल मौजूदा नियमों के तहत कोई भी कर्मचारी अपने पूरे करियर में कुल मिलाकर अपनी अंतिम सैलरी (बेसिक + डीए) का अधिकतम 16.5 गुना या फिर अधिकतम ₹25 लाख रुपये तक ही ग्रेच्युटी हासिल कर सकता है.
कर्मचारी संगठनों के प्रमुख प्रस्ताव और मांगें
इस मामले में अलग-अलग बड़े संगठनों ने वेतन आयोग के सामने अपने विस्तृत ज्ञापन (Memorandums) सौंपे हैं, जिनमें मुख्य बातें इस प्रकार हैं.
भारतीय रेलवे तकनीकी पर्यवेक्षक संघ (IRSTA) का प्रस्ताव
रेलवे के इस संगठन ने ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को ₹25 लाख से सीधे बढ़ाकर ₹50 लाख करने की वकालत की है. इसके साथ ही उन्होंने कैलकुलेशन फॉर्मूले में बदलाव की मांग की है.
- नया फॉर्मूला: ग्रेच्युटी = (1/3) x (बेसिक सैलरी + महंगाई भत्ता) × (6-6 महीने के कार्यकालों की कुल संख्या).
- 33 साल की सेवा पर लाभ: संगठन का कहना है कि 33 वर्ष या उससे अधिक की जरूरी सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों के लिए कुल ग्रेच्युटी उनकी मंथली सैलरी (बेसिक+डीए) की 32 गुना होनी चाहिए.
IRSTA द्वारा प्रस्तावित डेथ ग्रेच्युटी का नया स्लैब
रेलवे तकनीकी पर्यवेक्षक संघ ने ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिजनों के लिए नौकरी की अवधि के आधार पर डेथ ग्रेच्युटी को तर्कसंगत बनाने का सुझाव दिया है.
| कर्मचारी की कुल सेवा अवधि (Service Period) | प्रस्तावित डेथ ग्रेच्युटी राशि |
| 1 साल से कम | मूल वेतन (Basic Pay) का 4 गुना |
| 1 साल से अधिक लेकिन 5 साल से कम | मूल वेतन का 12 गुना |
| 5 साल से अधिक लेकिन 11 साल से कम | मूल वेतन का 24 गुना |
| 11 साल से अधिक लेकिन 20 साल से कम | मूल वेतन का 30 गुना |
| 20 साल या उससे अधिक | हर 6 महीने की सेवा के लिए सैलरी का आधा भाग (अधिकतम 50 गुना पारिश्रमिक की सीमा में) |
रेलवे वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति (RSCWS) की मांग
इस सीनियर सिटिजन सोसाइटी ने मांग की है कि ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को फिक्स रखने के बजाय, बढ़ती महंगाई के अनुपात में समय-समय पर खुद-ब-खुद संशोधित (Review) किया जाना चाहिए. इसके अलावा, कर्मचारी के रिटायर होते ही बिना किसी कागजी देरी के तुरंत भुगतान होना चाहिए. साथ ही पुरानी पेंशन (OPS), नई पेंशन (NPS) और यूनिफाइड पेंशन (UPS) सभी के तहत ग्रेच्युटी के नियमों को एक समान व तर्कसंगत बनाया जाए.
NC-JCM ने उठाई ग्रेच्युटी लिमिट ₹75 लाख करने की मांग
केंद्र सरकार के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे बड़े संगठन नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसलटेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने सबसे बड़ी मांग रखी है.
- ₹75 लाख की सीमा: संगठन का कहना है कि आज के रहन-सहन और महंगाई को देखते हुए ग्रेच्युटी की ऊपरी सीमा को बढ़ाकर ₹75 लाख रुपये किया जाए.
- कामकाजी दिनों के आधार पर गणना: ग्रेच्युटी की गणना के लिए महीने में 30 दिनों के बजाय केवल 25 कामकाजी दिनों को आधार माना जाए, जिससे मिलने वाली रकम में बढ़ोतरी होगी.
- 16.5 गुना की बंदिश खत्म हो: NC-JCM ने सैलरी के अधिकतम 16.5 गुना की सीमा को पूरी तरह हटाने की मांग की है. उनका तर्क है कि इस नियम के कारण 33 साल से अधिक की लंबी सेवा देने वाले वफादार कर्मचारियों को ग्रेच्युटी में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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