ePaper

Good Story: दोनों पैर से दिव्यांग ‘डिलिवरी ब्वॉय’ मो शादाब चढ़ रहे हौसले की सीढ़ियां

Updated at : 14 Jul 2025 9:53 PM (IST)
विज्ञापन
बोरिंग रोड में डिलिवरी लेने के दौरान मो शादाब की तस्वीर.

बोरिंग रोड में डिलिवरी लेने के दौरान मो शादाब की तस्वीर.

Good Story: पटना के मो शादाब दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, फिर भी जोमैटो पर हर दिन 15 से ज्यादा खाने के ऑर्डर डिलीवर करते हैं. 30 साल के शादाब ने पोलियो के बावजूद हिम्मत नहीं हारी. वह अपनी बैटरी वाली ट्राइसाइकिल से डिलीवरी करते हैं और अपनी मेहनत से हर दिन करीब 600 रुपये कमाते हैं. पढ़ें पूरी स्टोरी..

विज्ञापन

Good Story: दिव्यांग हूं, मजबूर नहीं… मेहनत कर अपने पैरों पर खड़ा हूं. ये शब्द हैं पटना के मैनपुरा (राजापुल) के रहने वाले मो शादाब हुसैन की. वह बिना दोनों पैरों के रोजाना 15 से ज्यादा डिलीवरी कर अपने आत्मनिर्भर बनने की मिसाल कायम कर रहे हैं. 30 वर्षीय शादाब (Md Shadab) बीते छह महीनों से जोमैटो में बतौर डिलीवरी एग्जीक्यूटिव काम कर रहे हैं. शादाब बताते हैं कि जब वे दो साल के थे, तब पोलियो ने उनके शरीर को जकड़ लिया. समय रहते समुचित इलाज न मिल पाने की वजह से दोनों पैर पूरी तरह प्रभावित हो गए. पिता मो एहतेशाम मजदूरी करते थे, जिससे आर्थिक स्थिति ज्यादा इलाज की इजाजत नहीं दे पायी. हालांकि, शरीर के बाकी हिस्से जिसमें हाथ, गर्दन आदि सामान्य इलाज स धीरे-धीरे सामान्य हो गए, लेकिन चलने में असमर्थता बनी रही.

बता दें कि, शादाब ने मगध यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स ऑनर्स में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है. परिवार में वे सबसे छोटे हैं.बड़े भाई नौकरी करते हैं और मंझले भाई प्लंबर का ठेकेदारी कार्य करते हैं. लेकिन शादाब का मानना है कि घर बैठकर खाना उन्हें मंजूर नहीं. वे रोज मेहनत करके 500 से 600 रुपये तक की आमदनी कर लेते हैं.

ये भी पढ़ें: हर दुकान व वेंडर का सर्वे करेगी PMC, शहर की सुंदरता बढ़ा रही वर्टिकल गार्डेन

लोगों से मिलती है हौसला और इज्जत
शादाब बताते हैं कि पटना के कई इलाकों में जब वे खाना लेकर पहुंचते हैं, तो लोग खुद नीचे आकर ऑर्डर ले लेते हैं. कुछ लोग उन्हें टिप भी देते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास और बढ़ता है. वे कहते हैं कि कई लोग छोटी-छोटी बातों पर हिम्मत हार जाते हैं, लेकिन जब अपनी मेहनत से कुछ कमाते हैं तो उसका सुख अलग होता है. हाल ही में दिव्यांगों की पेंशन 400 रुपये से बढ़कर 1100 रुपये हुई है, जिसके लिए वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आभार व्यक्त करते हैं.

ये भी पढ़ें: कृत्रिम रोशनी से भटक रहा गोबरैला, परागण का भी बना संकट; देसी बीज की विलुप्ति व गायों की नस्ल भी असंतुलन खतरे में

वीडियो देखकर सीखी जोमैटो डिलीवरी की राह
शादाब ने यूट्यूब पर कई प्रेरणादायक वीडियो देखे. उन्हें यह समझ आया कि शारीरिक अक्षमता किसी की प्रगति में बाधा नहीं हो सकती. तभी उन्होंने जोमैटो से जुड़ने का निर्णय लिया. वे एक छोटी बैटरी वाली ट्राइसाइकिल से खाना पहुंचाते हैं. हालांकि गर्मी और रास्तों की कठिनाइयों के चलते कभी-कभी डिलीवरी में थोड़ी देरी हो जाती है.सड़कों पर कई बार जाम से निकलने में परेशानी होती है. इससे निबटने के लिए वे स्कूटी खरीदने के लिए पैसे जमा कर रहे हैं.

विज्ञापन
हिमांशु देव

लेखक के बारे में

By हिमांशु देव

सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola