मधेपुरा में खुले ट्रैक्टर से ढोया जा रहा कचरा, राहगीरों पर गिर रहा कूड़ा: संक्रमण का बढ़ा खतरा

Author Kumar Ashish|Edited by Shruti Kumari
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Madhepura Garbage Management: मधेपुरा में नगर परिषद के खुले ट्रैक्टरों से कचरा ढोए जाने के कारण सड़कों पर गंदगी फैल रही है. राहगीरों को संक्रमण और प्रदूषण का खतरा बना हुआ है, जबकि नियमों के अनुसार कचरे को ढंककर ले जाना अनिवार्य है.

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मधेपुरा से कुमार आशीष की रिपोर्ट:

Madhepura Garbage Management: “स्वच्छ मधेपुरा, सुंदर मधेपुरा” का सपना अभी भी धरातल पर अधूरा नजर आ रहा है. शहर में सफाई व्यवस्था पर प्रतिमाह करीब 30 लाख रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कचरा परिवहन की व्यवस्था लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है. नगर परिषद के ट्रैक्टर खुले में कचरा लेकर डंपिंग यार्ड तक पहुंच रहे हैं, जिससे रास्ते भर कूड़ा गिर रहा है और आम लोगों को दुर्गंध एवं संक्रमण का सामना करना पड़ रहा है.

राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बनी मुसीबत

शहर की सड़कों से गुजरने वाले कचरा लदे ट्रैक्टर बिना तिरपाल ढके ही डंपिंग यार्ड तक पहुंचते हैं. इस दौरान उड़ता हुआ कचरा पीछे चल रहे दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों के शरीर व चेहरे पर पड़ता है. कई जगहों पर कचरा सड़क पर गिरने से गंदगी फैल रही है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रैक्टर के पिछले हिस्से का ढक्कन भी कई बार खुला रहता है, जिससे रास्ते भर कूड़ा गिरता रहता है.

26 वार्डों से प्रतिदिन निकलता है 8 से 10 टन कचरा

जानकारी के अनुसार नगर परिषद क्षेत्र के 26 वार्डों से प्रतिदिन लगभग 8 से 10 टन कचरा निकलता है. नगर परिषद द्वारा शहर के विभिन्न इलाकों से कचरा उठाकर डंपिंग यार्ड तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है, लेकिन परिवहन के दौरान निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है.

प्रमुख मार्गों से गुजरते हैं कचरा वाहन

पूर्णिया गोला, स्टेट बैंक रोड, कर्पूरी चौक, सुभाष चौक, कॉलेज चौक और पानी टंकी चौक समेत कई प्रमुख मार्गों से कचरा लदे वाहन गुजरते हैं. इन मार्गों पर विद्यालय, मंदिर और सार्वजनिक स्थल स्थित हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग आते-जाते हैं.

ऐसे में खुले में कचरा परिवहन से प्रदूषण और संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है.

कार्यादेश की भी हो रही अनदेखी

नगर परिषद के कार्यादेश में स्पष्ट प्रावधान है कि कचरा परिवहन करने वाले ट्रैक्टर अथवा अन्य वाहनों को तिरपाल से ढंककर ले जाना अनिवार्य होगा. बावजूद इसके नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों को स्थिति की जानकारी होने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है.

डॉक्टर ने बताया संक्रमण का खतरा

सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. यश शर्मा ने बताया कि कचरे से निकलने वाली धूल और गंदगी आंख, कान, गला, फेफड़े तथा त्वचा को प्रभावित कर सकती है. उन्होंने कहा कि कचरे के सूक्ष्म कण नाक के जरिए शरीर में प्रवेश कर कई प्रकार की बीमारियों का कारण बन सकते हैं.

व्यवस्था सुधारने की मांग

शहरवासियों ने नगर परिषद प्रशासन से कचरा परिवहन व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है. लोगों का कहना है कि स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए सबसे पहले कचरा ढोने वाले वाहनों को निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित किया जाना चाहिए.

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