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न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पवित्र कुरान पर हाथ रखकर लेंगे शपथ, रचेंगे एक और इतिहास, जानें क्यों है ये खास

Zohran Mamdani New York City Mayor Oath on Quran: न्यूयॉर्क के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी शपथ ग्रहण के समय एक सदियों पुराने कुरान पर हाथ रखेंगे. ऐसा पहली बार होगा जब न्यूयॉर्क सिटी का कोई मेयर इस्लाम के पवित्र ग्रंथ पर शपथ लेगा. अब तक शहर के अधिकांश मेयर बाइबिल पर शपथ लेते आए हैं. शपथ समारोह के बाद इस क़ुरान को न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखा जाएगा.

Zohran Mamdani New York City Mayor Oath on Quran: न्यूयॉर्क के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी अपने शपथ ग्रहण के दौरान सदियों पुराने कुरान पर हाथ रखेंगे. यह पहली बार होगा जब न्यूयॉर्क सिटी का कोई मेयर इस्लाम के पवित्र ग्रंथ पर शपथ लेगा. इससे पहले शहर के अधिकतर मेयर बाइबिल पर शपथ लेते रहे हैं, हालांकि संघीय, राज्य और नगर के संविधान की रक्षा की शपथ के लिए किसी धार्मिक ग्रंथ का इस्तेमाल अनिवार्य नहीं है. शपथ के बाद जिस कुरान का उपयोग किया जाएगा, उसे न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी में आम जनता के देखने के लिए प्रदर्शित किया जाएगा.

34 वर्षीय डेमोक्रेट जोहरान ममदानी जब 1 जनवरी, 2026 को आधी रात के तुरंत बाद सिटी हॉल के नीचे स्थित एक लंबे समय से बंद सबवे स्टेशन में पद की शपथ लेंगे, तो वे न्यूयॉर्क सिटी के पहले मुस्लिम, पहले दक्षिण एशियाई और पहले अफ्रीका में जन्मे मेयर बन जाएंगे. यह आयोजन शहर के इतिहास में कई ऐतिहासिक ‘पहलों’ को एक साथ रेखांकित करेगा.

सबवे स्टेशन में होने वाले इस समारोह के दौरान ममदानी दो कुरानों पर हाथ रखेंगे, जबकि नए साल के पहले दिन सिटी हॉल में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में तीसरे कुरान का उपयोग किया जाएगा. इनमें से दो कुरान उनके दादा-दादी के रहे हैं. तीसरा कुरान एक जेब में रखने लायक पांडुलिपि है, जिसे 18वीं सदी के अंत या 19वीं सदी की शुरुआत का माना जाता है. यह पांडुलिपि न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी के शॉम्बर्ग सेंटर फॉर रिसर्च इन ब्लैक कल्चर के संग्रह का हिस्सा है.

न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी में मिडिल ईस्टर्न और इस्लामिक स्टडीज की क्यूरेटर हिबा आबिद के अनुसार, यह कुरान शहर के मुस्लिम समुदाय की विविधता और व्यापक पहुंच का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यह आकार में भले ही छोटा हो, लेकिन यह न्यूयॉर्क सिटी के इतिहास में आस्था और पहचान से जुड़े कई पहलुओं को एक साथ जोड़ता है.

न्यूयॉर्क तक कैसे पहुंची यह पांडुलिपि और इसकी विशेषताएं

यह कुरान आर्तुरो शॉम्बर्ग द्वारा एकत्र किया गया था, जो एक अश्वेत प्यूर्टो रिकन इतिहासकार थे. उनके संग्रह में अफ्रीकी मूल के लोगों के वैश्विक योगदानों का व्यापक दस्तावेजीकरण है. यह स्पष्ट नहीं है कि शॉम्बर्ग को यह कुरान किस तरह मिला, लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अमेरिका और अफ्रीका में अश्वेत संस्कृतियों तथा इस्लाम के ऐतिहासिक रिश्तों में उनकी गहरी रुचि को दर्शाता है.

राजघरानों या अभिजात वर्ग से जुड़े अलंकृत और भव्य धार्मिक ग्रंथों के विपरीत, जिस कुरान का इस्तेमाल ममदानी करेंगे वह बनावट में सादा है. इसकी गहरी लाल जिल्द पर साधारण फूलों की डिजाइन है और इसमें काले व लाल स्याही का प्रयोग किया गया है. इसकी लिपि सरल और साफ-सुथरी है, जिससे संकेत मिलता है कि इसे रोजमर्रा के उपयोग के लिए तैयार किया गया था, न कि केवल औपचारिक प्रदर्शन के लिए.

क्योंकि इस पांडुलिपि पर न तो कोई तारीख दर्ज है और न ही किसी का हस्ताक्षर, इसलिए विद्वानों ने इसकी जिल्द और लेखन शैली के आधार पर इसके काल का अनुमान लगाया है. माना जाता है कि यह 18वीं सदी के अंत या 19वीं सदी की शुरुआत की यानी ओटोमन काल की रचना है और इसका संबंध उस भौगोलिक क्षेत्र से है जिसमें आज का सीरिया, लेबनान, इजरायल, फिलिस्तीनी क्षेत्र और जॉर्डन शामिल हैं.

ममदानी ने चुनाव जीतकर रचा इतिहास

ममदानी एक दक्षिण एशियाई न्यूयॉर्कर हैं, जिनका जन्म युगांडा में हुआ था. उनकी पत्नी रमा दुवाजी अमेरिकी-सीरियाई हैं. न्यूयॉर्क के मेयर का चुनाव जीतकर उन्होंने इतिहास रचा है. डेमोक्रेट उम्मीदवार के रूप में उन्होंने रिपब्लिकन और एक स्वतंत्र उम्मीदवार को हराया और 100 वर्षों में शहर के सबसे युवा मेयर बनने का गौरव भी हासिल किया.

अपने चुनाव अभियान के दौरान ममदानी ने महंगाई और जीवन-यापन की लागत जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा, लेकिन वे अपने मुस्लिम विश्वास को लेकर भी खुलकर सामने आए. समर्थन जुटाने के लिए उन्होंने शहर के फाइव बरो में मस्जिदों का दौरा किया, जिससे पहली बार मतदान करने वाले कई दक्षिण एशियाई और मुस्लिम मतदाता उनके पक्ष में आए.

कुरान पर शपथ ग्रहण की हो रही आलोचना

हालांकि कुरान पर शपथ लेने के उनके फैसले की कुछ रूढ़िवादी समूहों ने आलोचना की है. अलबामा से अमेरिकी सीनेटर टॉमी ट्यूबर्विल ने ममदानी के शपथ समारोह से जुड़ी एक खबर पर सोशल मीडिया में लिखा, “दुश्मन हमारे दरवाजों के अंदर है.” काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (CAIR) ने ट्यूबर्विल को उनके पिछले बयानों के आधार पर मुस्लिम-विरोधी चरमपंथी के रूप में सूचीबद्ध किया है. हालांकि, ऐसी प्रतिक्रिया कोई नई बात नहीं है. 2006 में, कांग्रेस के लिए चुने गए पहले मुस्लिम सांसद कीथ एलिसन को भी कुरान पर औपचारिक शपथ लेने के उनके निर्णय पर रूढ़िवादी आलोचना का सामना करना पड़ा था.

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Anant Narayan Shukla
Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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