समुद्र में छिड़ा महायुद्ध? अमेरिकी जंगी जहाज पर हमले के लिए बढ़ा ईरानी ड्रोन; नेवी ने आसमान में ही उड़ाया

अमेरिका ने मार गिराया ईरान का ड्रोन.
US Navy Shoots Down Iran Drone: USS अब्राहम लिंकन की ओर बढ़ रहे ईरानी 'शाहेद' ड्रोन को अमेरिकी फाइटर जेट ने मार गिराया. वहीं, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी नौसेना ने अमेरिकी मर्चेंट शिप को घेरने की कोशिश की, जिसे नेवी ने नाकाम कर दिया. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच समुद्र में आमने-सामने आई दोनों देशों की सेनाएं.
US Navy Shoots Down Iran Drone: अरब सागर में मंगलवार को माहौल उस वक्त काफी गरम हो गया जब अमेरिकी नेवी के एक फाइटर जेट ने ईरान के एक ड्रोन को मार गिराया. यह ड्रोन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर (जंगी जहाज) ‘USS अब्राहम लिंकन’ की तरफ बहुत ही आक्रामक तरीके से बढ़ रहा था. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन की मंशा साफ नहीं थी, जिसके बाद यह कदम उठाना पड़ा. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही काफी खींचतान चल रही है.
आखिर क्या हुआ ‘USS अब्राहम लिंकन’ के पास?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी मिलिट्री ने बताया कि ईरान का ‘शाहेद-139’ (Shahed-139) नाम का एक अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV यानी ड्रोन) मंगलवार को सीधे USS अब्राहम लिंकन की ओर उड़कर आ रहा था. उस वक्त यह जंगी जहाज अरब सागर में मौजूद था. अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन जहाज के काफी करीब आ गया था और उसकी हरकतें देख कर लग रहा था कि वह हमला कर सकता है.
जहाज की सुरक्षा के लिए USS अब्राहम लिंकन से एक F-35C फाइटर जेट ने उड़ान भरी और ड्रोन को हवा में ही ढेर कर दिया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता, नेवी कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि यह कार्रवाई ‘सेल्फ-डिफेंस’ (आत्मरक्षा) और जहाज पर मौजूद क्रू मेंबर्स को बचाने के लिए की गई थी.
कैप्टन टिम हॉकिन्स के अनुसार, USS अब्राहम लिंकन ईरान के दक्षिणी तट से करीब 500 मील दूर था, तभी ईरानी शाहेद-139 ड्रोन बिना किसी वजह के जहाज की तरफ मुड़ गया. अमेरिकी फोर्सेस ने तनाव कम करने की कोशिश भी की, लेकिन ड्रोन फिर भी बढ़ता रहा. राहत की बात यह रही कि इस पूरी घटना में किसी भी अमेरिकी सैनिक को चोट नहीं आई और न ही किसी मशीन या हथियार को नुकसान पहुँचा है.
ईरान की ओर से एक और ‘धमकी’: मर्चेंट शिप को घेरने की कोशिश
उसी दिन एक और बड़ी घटना हुई. फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, टिम हॉकिन्स ने बताया कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की दो नावें और एक ‘मोहजेर’ ड्रोन ने अमेरिका के झंडे वाले एक व्यापारिक जहाज ‘M/V स्टेना इमपेरेटिव’ को घेरने की कोशिश की.
ये नावें बहुत तेज रफ्तार से जहाज की तरफ बढ़ीं और उसे कब्जे में लेने की धमकी दी. तभी पास में मौजूद अमेरिकी डिस्ट्रॉयर USS मैकफॉल वहां पहुंच गया और एयर फोर्स की मदद से मर्चेंट शिप को सुरक्षित वहां से निकाला.
क्यों खास है ‘USS अब्राहम लिंकन’ का वहां होना?
UK डिफेंस जर्नल की जानकारी के मुताबिक, USS अब्राहम लिंकन दुनिया के सबसे ताकतवर जंगी जहाजों में से एक है. यह न्यूक्लियर पावर से चलता है और इसका वजन 1 लाख टन से भी ज्यादा है. इस पर करीब 90 फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टर्स तैनात रहते हैं. यह जहाज जनवरी के आखिर में ही मिडिल ईस्ट पहुंचा था, जो दुनिया के तेल सप्लाई वाले रास्तों की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी माना जाता है.
क्या है इसके पीछे की बड़ी वजह?
यह पूरा ड्रामा तब हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर डील को लेकर बातचीत की कोशिशें चल रही हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर कोई डील नहीं हुई, तो हालात बिगड़ सकते हैं, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान बातचीत को लेकर गंभीर है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान में हाल ही में हुए प्रदर्शनों के बाद अमेरिका ने इस इलाके में अपनी मिलिट्री ताकत बढ़ा दी है, जिससे तनाव और ज्यादा बढ़ गया है.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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