ट्रंप बोले- NATO का फ्यूचर 'बहुत बुरा' होगा… अगर उन्होंने होर्मुज खोलने में US मदद नहीं की

Updated at : 16 Mar 2026 9:54 AM (IST)
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Trump says if NATO do not help open Hormuz Strait it's future will be very bad.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. फोटो- एक्स (@WhiteHouse).

Iran War NATO: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से पूरी दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का आवागमन होता है. लेकिन ईरान के द्वारा इसे बंद किए जाने से वैश्विक तेल संकट पैदा हो गया है. तेल की कमी के साथ, इसकी कीमतें भी बढ़ गई हैं. यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे खुलवाने के लिए अलग-अलग तरह के प्रयास कर रहे हैं.

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Iran War NATO: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के दौरान ईरान ने अहम तेल परिवहन मार्ग होरमुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है. ईरान युद्ध के बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बहुत बुरी तरह पड़ा है. अमेरिका की सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद पिछले दो हफ्तों में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. अमेरिका में भी पेट्रोल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है और यह प्रति गैलन 70 सेंट से ज्यादा बढ़ चुकी है. ऐसे में ईरान की दक्षिणी सीमा के इस समुद्री रास्ते को खुलवाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पूरा जोर लगा रहे हैं. रविवार, 15 मार्च को ट्रंप कहा कि अगर अमेरिका के सहयोगी होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद नहीं करते हैं, तो नाटो (NATO) का भविष्य ‘बहुत खराब’ हो सकता है. 

फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक शॉर्ट इंटरव्यू में ट्रंप ने दुनिया के अन्य क्षेत्रों में अमेरिका की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा, ‘मुझे लगता है कि हमें अच्छा जवाब मिल रहा है. हम हमेशा NATO के लिए मौजूद रहते हैं. हम यूक्रेन के मुद्दे पर उनकी मदद कर रहे हैं. इससे हमें सीधे तौर पर कोई असर नहीं पड़ता, फिर भी हमने उनकी मदद की. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-सा देश इतने छोटे से प्रयास में हमारी मदद नहीं करेगा, जो सिर्फ जलडमरूमध्य को खुला रखने का मामला है.’

पहले आलोचना अब मदद की अपील

ट्रंप पहले भी कई बार इस सैन्य गठबंधन की आलोचना करते रहे हैं और कहते रहे हैं कि यह अमेरिकी संसाधनों का फायदा उठाता है. हालांकि, अब ट्रंप उन्हीं से मदद की अपील कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जैसे अमेरिका ने रूस के साथ युद्ध में यूक्रेन की मदद की है, वैसे ही वह उम्मीद करते हैं कि यूरोपीय देश होरमुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर अमेरिका की मदद करेंगे. ट्रंप ने कहा, ‘अगर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती या नकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है, तो मुझे लगता है कि यह नाटो के भविष्य के लिए बहुत खराब होगा.’ 

अन्य देशों से वॉरशिप तैनात करने की मांग की- ट्रंप

वहीं, रविवार को ही डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि उन्होंने लगभग सात देशों से वॉरशिप तैनात करने का अनुरोध किया है, ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रखी जा सके. यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल निर्यात इसी रास्ते से गुजरते हैं. 

राष्ट्रपति ट्रंप ने एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, ‘हम जलडमरूमध्य की निगरानी के लिए देशों से बात कर रहे हैं, क्योंकि असल में वही देश इससे ज्यादा प्रभावित होते हैं. आप जानते हैं, हमें बहुत कम तेल मिलता है- करीब 1 प्रतिशत. उदाहरण के तौर पर चीन को अपना लगभग 90 प्रतिशत तेल होरमुज जलडमरूमध्य से मिलता है. अच्छा होगा अगर दूसरे देश भी हमारे साथ इसकी निगरानी करें. हम उनकी मदद करेंगे और उनके साथ काम करेंगे.’

अपने क्षेत्र की जिम्मेदारी खुद संभालें प्रभावित देश

ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों की जिम्मेदारी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, ‘मैं मांग कर रहा हूं कि ये देश आगे आएं और अपने ही क्षेत्र की सुरक्षा करें, क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है.’ हालांकि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, फिर भी अब तक किसी देश ने इस मिशन में शामिल होने की स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई है. इससे पहले ट्रंप ने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से होर्मुज स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की थी. 

जिनपिंग से होने वाली मुलाकात संशय में

ट्रंप ने यह भी कहा कि बीजिंग में अपने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाला आगामी शिखर सम्मेलन टल सकता है, क्योंकि वह जलडमरूमध्य को खोलने में चीन की मदद चाहते हैं. ट्रंप ने कहा, ‘हम शिखर सम्मेलन से पहले ही जानना चाहेंगे.’  जब उनसे पूछा गया कि वह किस तरह की मदद चाहते हैं, तो ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि उन्हें माइंसवीपर जहाजों की जरूरत है, साथ ही ‘ऐसे लोग भी चाहिए जो ईरानी तट के पास मौजूद कुछ बुरे तत्वों को खत्म कर सकें.’

तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी

ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध कितने समय तक चलेगा, इस अनिश्चितता ने तेल बाजार को भी झकझोर दिया है. आपूर्ति को लेकर बढ़ते जोखिम के कारण पिछले दो हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. रविवार को अमेरिकी बेंचमार्क की कीमत 2.5% बढ़कर 100.22 डॉलर प्रति बैरल पर खुली, जबकि अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.9% बढ़कर 106.11 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. कीमतों में यह बढ़ोतरी 2022 के बाद पहली बार इतनी ज्यााद हुई है.

ईरान की सैन्य क्षमता हुई कमजोर- ट्रंप

वहीं, ईरान की सैन्य स्थिति पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि तेहरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि सीमित जवाबी कार्रवाई की संभावना बनी रह सकती है. उन्होंने कहा, ‘मेरे हिसाब से हमने लगभग ईरान को हरा दिया है. हो सकता है कि वे थोड़ा बहुत जवाबी हमला करें, लेकिन ज्यादा नहीं. हमने उनकी वायु सेना और वायु रक्षा प्रणाली को खत्म कर दिया है. हमने उनके नेतृत्व को भी खत्म कर दिया है. वे बातचीत करना चाहते थे, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे अभी तैयार हैं.’

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ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की हथियार बनाने वाली औद्योगिक क्षमता को लगभग पंगु बना दिया है. उन्होंने कहा कि मिसाइलों की संख्या काफी कम हो गई है. वे बहुत कम मिसाइलें दाग रहे हैं क्योंकि हमने उनकी उत्पादन क्षमता को बुरी तरह नष्ट कर दिया है. इसी तरह ड्रोन की संख्या भी बहुत कम हो गई है. अब वे पहले के मुकाबले लगभग 20 प्रतिशत ही रह गए हैं. कल से हम उन जगहों पर भी हमला करना शुरू कर रहे हैं जहां ड्रोन बनाए जाते हैं. 

ईरान ने किया किसी भी बातचीत से इनकार

दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वॉशिंगटन के साथ युद्ध खत्म करने के लिए किसी कूटनीतिक बातचीत की संभावना को भी खारिज कर दिया.  उन्होंने कहा कि 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका ने समन्वित हमलों के साथ इस संघर्ष की शुरुआत की थी. उस समय ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अप्रत्यक्ष वार्ताएं चल रही थीं. उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान के पास अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को फिर से हासिल करने की ‘कोई योजना नहीं’ है, क्योंकि पिछले साल अमेरिकी और इजराइली अभियानों के दौरान उन्हें नष्ट कर दिया गया था.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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